- मकान की नींव खोदकर ईशान कोण के गड्डे में जल, पवित्र नदियों का पुण्य जल और चांदी से निर्मित नाग नागिन का जोड़ा रखने का विधान इसलिए है कि भूमि भूत, प्रेत, पिशाच, पित्त दोष से मुक्त हो जाए।
- स्कंध पुराण के अनुसार शेषनाग क्षीरसागर यानि पाताल लोक में रहते हैं, इसलिए पूजन के कलश में दूध, दही, घी डालकर मंत्रों से आह्वान कर शेषनाग को बुलाया जाता है, ताकि वे साक्षात् उपस्थित होकर भवन की रक्षा का भार वहन करें।
- नवीन भवन निर्माण या नया मकान बनवाते समय भूमि पूजन जरूर करना चाहिए। जिस दिन भी आपको निर्माण शुरू करना हो उससे 3, 5 या 7 दिन पहले समतल भूमि पर गंगाजल छिड़कें।
- जमीन के चारों कोनों पर एक दीपक मिट्टी के तिल तेल में पान के पत्ते पर रखकर जलाएं और बीच में 5 दीपक आटे के देशी घी के पान के पत्ते पर रखकर जलाएं। तीन या 9 छोटी कन्याओं को पत्तल पर खीर, मालपुआ, सफेद बर्फी आदि खिलाएं।
- मंगलवार को छोड़कर सबसे पहले ईशान कोण में गड्ढा खोदकर भूमि पूजन करे, तो मकान तुरंत बनता है और सभी तरह दोष, दुखों का निवारण हो जाता है। वस्तु शांति भी हो जाती है।
- अपने भवन की पुख्ता नीव के लिए करे ये उपाय जब भी मकान, दुकान का नवीन निर्माण कराएं तो, उसकी नींव में निम्र वस्तुएँ रखने से धन लाभ के साथसाथ सांसारिक, भौतिक, आध्यात्मिक लाभ भी होगा। साथ ही टोनों- टोटकों से जीवन भर बचाव रहेगा।
- मकान की नींव भरते समय गड्डे में क्या-क्या रखें अपनी सुविधानुसार – मिट्टी का मटका अथवा ताँबें की लुटिया, ढक्कन सहित जल भरकर, नारियल (पानी वाला)
- चंदन का इत्र, चन्दन की लकड़ी, गरी गोला में मिश्री भरकर, चावल, सभी प्रकार की दालें, अन्न, मिश्री, उड़द व मूंग की दाल के मंगौडे, पांच फल, मिष्ठान, २-३ इलाइची, बच्चे की नाल (नरा), गुड़, जौ, 8 लोंग, सोना, एवं 3 छोटे बच्चे, यज्ञ वेदी की ईंटें, चाँदी अथवा ताँबे के दो नाग नागिन जोड़ा चाँदी का एक टुकड़ा, पाँच- नौ या सात्ताईस सुपारी बड़ी खाने वाली, हल्दी की सात साबुत गाँठे, पंचमेवा, नवरत्न, गंगाजल आदि।
- भोजपत्र पर ।।ॐ शंभूतेजसे नमः शिवाय।। चन्दन इत्र से लिखकर, गुप्त दान ( पुराने पैसे सिक्के हो) शुद्ध मधु, २-३ पान के पत्ते मुख्य द्वार के पश्चिम की ओर अथवा पुरोहित के निर्देशानुसार नींव में रखें। इस लघु प्रयोग से वर्तमान व भविष्य में आने वाली संतति का जीवन सुखमय कर सकेंगे।
- विशेष- यदि संभव हो तो चाँदी – सोना- ताम्र पत्र पर निर्मित श्रीयंत्र का विधि-विधान से पूजन कराकर नींव में स्थापित करने से जीवन भर ऐश्वर्य, कीर्ति और समृद्धि बनी रहती है।
- कलश में दूध, दही, घी, पुष्प और एक सिक्का डालकर मंत्रोच्चार कर भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और शेषनाग का आवाहन किया जाता है।
- कलश को नींव में स्थापित किया जाता है। मकान का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाता है।
- माना जाता है कि इस कर्मकांड के बाद स्वयं भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और शेषनाग मकान की रक्षा का दायित्व अपने ऊपर ले लेते हैं।
भूमि पूजन किस दिशा,कौन से कोने में करना चाहिए?
- भूमि पूजन के बाद नींव की खुदाई ईशान कोण से ही प्रारंभ करें। ईशान के बाद आग्नेय कोण की खुदाई करें। आग्नेय के बाद वायव्य कोण, वायव्य कोण के बाद नैऋ त्य कोण की खुदाई करें।
मकान की नींव खोदने का शुभ मुहूर्त
- बैसाख (मई), मार्गशीर्ष (दिसंबर), पौष (जनवरी) और फाल्गुन (मार्च) नींव रखने के लिए सबसे अच्छे महीने हैं। प्राचीन हिंदू शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, बैशाख, श्रावण, मार्गशीर्ष, माघ, फाल्गुन, भाद्रपद और कार्तिक महीने भी चल सकते हैं।
अमृतम पत्रिका, ग्वालियर नवम्बर 2009 से साभार
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