चंबल की नार 

साझे का व्यापार! संपत्ति बेचकर ली गई कार! लंगोट का कच्चा यार हमेशा दुख देते हैं!

  • देसी दुनिया और देसी दर्द- भारत की मिट्टी में जितनी उपजाऊ जमीन है, उतनी ही उपजाऊ है यहाँ की कहावतें और रिश्तों की कहानियाँ। जहाँ चंबल की नार का दिल बिजली से तेज़ और लंगोट का यार वाई-फाई से भी तेज़ बदल जाता है!

चंबल की नार – दिल भी तेज, ड्राइविंग भी तेज़!

  • चंबल की नार अगर प्यार में पड़ जाए तो जीवन रंगीन! अगर गुस्से में आ जाए तो पूरा जीवन डीजल पेट्रोल से भी महंगा! इनका गुस्सा, फास्ट एंड फ्यूरियस की तरह – एक बार शुरू तो पूरा इलाका थर्रा जाए!

स्त्रियो हि कारणं नूनं सर्ववर्णविनाशनम्। (मनुस्मृति)

  • अर्थात-स्त्रियाँ सृष्टि का कारण हैं और कभी-कभी विनाश का भी!
  • जीवन में तीन चीज़ें सोच-समझकर ही करनी चाहिए! नार से प्यार, यार से उधार, और साझे का व्यापार! क्योंकि ये तीनों अगर एक साथ हो जाएँ, तो बैंक, बीवी और बरबादी! तीनों आपकी परछाई बन जाते हैं!

विश्वासो धनसंपत्तिर्मित्रं बन्धुश्च यः सदा।

तं परिक्ष्य तु सेवेत, अन्यथा दुःखमावहेत्॥

  • अर्थात- मित्रता और धन से पहले विश्वास को परखो, वरना दुख तय है।

साझे का व्यापार यानि दिल भी गया, माल भी गया!

  • अगर कभी किसी दोस्त कहे कि चल साझे में दुकान खोलते हैं तो समझिए, उस दिन से आपकी नींद, चैन, और बैंक बैलेंस सबको बुखार चढ़ना तय है!
  • साझे का व्यापार वही टिकता है, जहाँ एक गिनता है पैसा, दूसरा विश्वास! साझेदारी में अक्सर एक “काम” करता है, दूसरा “नाम” कमाता है और तीसरा (अगर हो) कमीशन लेकर भाग जाता है।

संपत्ति बेचकर ली गई कार और किस्मत का पंचर!

  • देसी आदमी का सपना होता है कि गांव में पहली कार मेरी हो!पर जब कार आती है, EMI उसके पीछे दौड़ती है। घरवाले सोचते हैं! बेटा बड़ा आदमी बन गया, बैंक सोचता है बड़ा उधारी बन गया!

धनं गतं न पुनरायाति, परं ब्याजं समायाति।

  • अर्थात-धन गया तो लौटकर नहीं आता, पर ब्याज जरूर साथ लाता है!

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