चना शरीर को पुष्ट और घना बना देता है! जिसने भी बचपन में खाया चना, उसका ५५ तक जीवन बना

कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना, कभी उनमें भी मना, यही है डायट का ड्रामा और प्रकृति का नियमना!

शुद्धं रक्तं बलं रूपं दीर्घायुष्यं च देहि मे।आयुर्वेदप्रार्थना

चणक यानि चने का चमत्कारी रहस्य-यही है कि चना उन्हीं के के लिए अमृत है, जो पचा सकें! वही धूम मचा देगा 

    चणकं वायुवर्धनं, बल्यं पित्तकफप्रदम्। भावप्रकाश निघण्टु

    • अर्थात् चना (चणक) बलवर्धक तो है, परंतु वात को बढ़ाने वाला भी है। इसलिए यह तभी अमृत बनता है, जब व्यक्ति का शरीर इसे सहन करने की क्षमता रखता हो।
    • चना गरीबों का प्रोटीन, साधुओं का बल और वैद्यों का रहस्य ये है कि आयुर्वेद में चने को बल्य यानी शक्ति देने वाला, रक्तवर्धक यानि रक्त बढ़ाने वाला और मांसपुष्टिकर (मांसपेशियों को मजबूत करने वाला) बताया गया है। परंतु चरक संहिता और भावप्रकाश निघण्टुदोनों ही आयुर्वेदिक ग्रन्थ चेतावनी देते हैं!

    अति सेवनं चणकस्य वातजं विकारं जनयेत्।

    • अर्थात् अधिक मात्रा में सेवन करने से वात बढ़ता है, जिससे गैस, जोड़ों का दर्द, और वीर्यदोष उत्पन्न हो सकता है। चने को हमेशा छिलका सहित ही खाना चाहिए अन्यथा हृदय विकार हो सकते हैं!
    • आयुर्वेदिक आधुनिक विज्ञान के अनुसार चना प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होता है। परंतु इसमें फाइटिक एसिड (Phytic Acid) और ऑक्सलेट्स होते हैं,जो शरीर में आयरन और जिंक के अवशोषण को रोकते हैं।
    • इसलिए जो लोग कमज़ोर पाचन या एनीमिया से ग्रसित हैं, उनके लिए चना भारी सिद्ध हो सकता है। अपच पैदा कर सकता है! वहीं, मेहनती और श्रमशील व्यक्ति जैसे किसान या खिलाड़ी इसे खाकर घोड़े जैसी ताक़त महसूस करते हैं।

    ये शिव शम्भू की लीला- नहीं जाने गुरु और चेला!

    • भोलेनाथ ने मानव जीवन बड़ा ही विचित्र बनाया है! धरती पर आस्तिक भी सुखी हैं, नास्तिक भी! ये दोनों बहुत परेशान भी देखे जाते हैं! महादेव कभी तो छप्पर फाड़ के देते हैं और कभी इतना कष्ट देते हैं कि गाढ़ फैट जाए! कुछ समझ नहीं आता!
    • महाकाल की चोखट पर रोज़ माथा टेकने वाले भी महादेव की माया नहीं समझ सके! तभी, तो कभी लोग कहते हैं

    कभी घी घना। कभी मुट्ठी भर चना। कभी उसमें भी मना

    • घी खाओ तो दिमाग़ चलेगा, जोड़ों में तेल आएगा! फिर वही लोग कहते हैं घी मत खाओ, कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाएगा!अब समझो! घी तो वही है, बदलती है दुनिया की राय और डॉक्टर की डाइट।
    • अति सर्वत्र वर्जयेत् यानी हर चीज़ की अति नुकसानदायक है।आयुर्वेद कहता है — घी अग्निवर्धक, त्वचा निखारक और स्मरणशक्ति बढ़ाने वाला होता है। बस मात्रा सही होनी चाहिए रोज़ 1-2 चम्मच पर्याप्त!

    कभी मुट्ठी भर चना

    • कभी कहते हैं भिगोया चना खाओ, घोड़े जैसी ताक़त आ जाएगी! फिर अगले दिन सुनो गीले चने से वीर्य घटता है, मत खाओ! अब बेचारा चना सोच में है कि मैं ताक़त भी दूँ, सुंदरता भी, फिर भी इलज़ाम मेरे ही सर पर!

    आयुर्वेद निघण्टु के विचार

    • 20 ग्राम चना + थोड़ा गुड़ = परफ़ेक्ट एनर्जी बूस्टर! परंतु अधिक खाने से वात बढ़ता है, गैस और थकान ला सकता है।

    मात्रा हि औषधं भवति, अति सर्वत्र वर्जयेत्।

    • अर्थात- सही मात्रा में हर चीज़ औषधि है, अति करने से विष बन जाती है।

    कब और कैसे खाएं चना?

    कालमात्रं हितं सर्वं, नात्यर्थं न च हीनकम्। (चरक)

    • यानी हर चीज़ उचित मात्रा और समय पर ही हितकारी होती है।

    कभी उनमें भी मना…

    कभी कहते हैं घी मत खाओ, मोटे हो जाओगे।

    कभी कहते हैं चना मत खाओ, वीर्य घट जाएगा।

    कभी कहते हैं शहद मत खाओ, गर्मी बढ़ेगी।

    • अब जनाब, अगर घी, चना, शहद, दूध, गुड़, दही सबमें मना लगा दिया, तो बचेगा क्या? हवा? वो भी अब pollutedयही है प्रकृति का नियम हर चीज़ का समय और संतुलन।
    • विज्ञान भी यही कहता है घी में Omega-3 Fatty Acids होते हैं! हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभकारी।
      • चने में Protein + Iron जो Hemoglobin और Energy बढ़ाता है। परंतु दोनों की अति से Fat Storage और Digestion Problem हो सकती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा, रोज़-रोज़ यही है फिटनेस का सही डोज और उचित सेवन विधि-
    • सुबह-सुबह 20 ग्राम कच्चा चना (अच्छी तरह भिगोया हुआ)।
    • साथ में थोड़ा गुड़ — यह चने की कसैलेपन और वात दोष को संतुलित करता है।
    • चना खाने के 2 घंटे बाद तक पानी न पिएं,
      ताकि यह रस में परिवर्तित होकर शरीर में पूर्ण रूप से पच सके।
    • पाचन कमजोर है। शरीर में वात (गैस, जोड़ों में दर्द, कमजोरी) बढ़ी हुई है।
    • वीर्य या शुक्र की कमी महसूस होती है —
      क्योंकि गीले चने का अधिक सेवन शुक्र धातु को दुर्बल करता है।

    क्यों गीले चने से शुक्र का नाश होता है?

    • गीले चने में अत्यधिक नमी और कच्चा प्रोटीन होता है। यह पाचन अग्नि (Digestive Fire) को मंद करता है। जब पाचन शक्ति कमजोर होती है, तो रस धातु से शुक्र धातु तक का निर्माण बाधित होता है जिससे वीर्य में कमी और मानसिक थकान उत्पन्न होती है।

    अग्निं निहत्य तु धातूनां क्षयो भवति निश्चितम्। आयुर्वेद

    • यदि सही मात्रा और विधि से लिया जाए तो शरीर में हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ता है। मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। भूख बढ़ती है और आलस्य दूर होता है।शरीर में ऊर्जा और ओजस का संचार होता है।

    आयुर्वेदिक संयोजन — Keyliv Malt + चना

    • यदि आप चने के साथ Amrutam Keyliv Malt का सेवन करते हैं, तो यह लीवर को सक्रिय कर देता है, जिससे चना शरीर में सही प्रकार से पचकर रक्त और बल में परिवर्तित हो जाता है।

    Keyliv Malt के फायदे

    • लीवर की शुद्धि और रक्त निर्माण में सहायता
    • थकान, पाचन दोष, और हीमोग्लोबिन की कमी दूर
    • चेहरे पर निखार और त्वचा में दमक! इस संयोजन से शरीर रक्तमय और चेहरा चमकमय बनता है।

    चणकं बलदं तस्मात्, मात्रया नातिभोजितम्।

    गुडेन सह यः खद्यात्, सदा बलसमन्वितः॥

    • अर्थात् मात्रा से चना, गुड़ के साथ लिया जाए तो अमृत समान है। अधिक मात्रा या गलत समय पर लिया गया चना विष बन सकता है।
    • चना यानी चणक यदि संयम, समय और समझ से लिया जाए, तो यह बल, रक्त और सौन्दर्य बढ़ाने वाला चमत्कारी अन्न है। परंतु अगर बिना ज्ञान के लिया जाए, तो वही चना वात, वीर्यदोष और पाचनदोष का कारण भी बन सकता है।
    • ज्ञानयुक्त आहार ही औषधि बनता है और अज्ञानयुक्त आहार हमेशा रोग उत्पन्न करता है!

    चने को संस्कृत भाषा में चणक भी कहते हैं।

    अगर चने खाकर घोड़े की तरह दौड़ सकें, तभी चने खाएं। अलसी लोगों को चना बहुत हानि देता है। सामान्य तौर पर 20 ग्राम कच्चा चना आसानी से पचाया जा सकता है। चने के साथ गुड़ अवश्य खाएं और 2 घण्टे पानी न पिएं। यह बहुत बल-पुष्टिकारक होता है।

    गीले चने के सेवन से शुक्र का नाश होता है यानी वीर्य कमजोर होता है। वात की वृद्धि होती है ऐसा निघण्टु में लिखा है।

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