दूध घी के क्या फायदे हैं?

  1. घी खाये खोपड़ा! क्यों कहते थे हमारे बुज़ुर्ग? जानिए आयुर्वेदिक कारण!
  • भिण्ड-मुरैना का देसी बोलचाल में कहते हैं कि जो रोज दूध-घी पीता है, उसका खोपड़ा फिर खोपड़ेश्वर बन जाता है! क्योंकि दूध-घी दोनों मिलकर शरीर में ऐसी ऊर्जा जगाते हैं कि आदमी तन से बलवान और मन से जवान बना रहता है।
  • घी और दूध दोनों प्राकृतिक ओषधियाँ हैं। वीर्य, रक्त, मांस, हड्डी! सभी धातुओं का पोषण करते हैं। इनका सेवन संयम और पाचन शक्ति के अनुसार करें। अमृतम से साभार

मांस खाये चर्बी बढ़े, घी खाये खोपड़ा!

  • भिण्ड–मुरैना के गाँवों की देसी कहावत का वैज्ञानिक रहस्य!आज भी बड़ी मशहूर है कि

मांस खाये चर्बी बढ़े, घी खाये खोपड़ा।

दूध पियें, तो लिंग बढ़े, जो फाड़ डाले भोषड़ा।

  • अब भले ही यह सुनकर लोग मुस्कुरा दें, मगर इसमें छिपा आयुर्वेदिक विज्ञान और देसी तजुर्बा कमाल का है।
  • दूध-घी से ज्यादा अच्छी चीज दुनिया में दूसरी कोई बनी नहीं है। दूध से वीर्य की वृद्धि होती है। रक्त बढ़ता है। शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है। स्पर्म गाढ़ा होता है।
  • दूध और देशी घी भी स्वयं में सर्वश्रेष्ठ ओषधियाँ हैं। आज की पीढ़ी इनका उपयोग कम करने के कारण अनेक रोगों से घिर रही है। मर्दाना ताकत में बढ़ोत्तरी के लिए दूध एक बेहतरीन चिकित्सा है और घी से शरीर में फुर्ती एवं लचीलापन बना रहता है।
    • थायराइड की समस्या उत्पन्न ही नहीं होती। दूध-घी अगर पच जाए, तो यूरिक एसिड को सन्तुलित बनाये रखता है।

जाने दूध-घी के फायदे-

  • घी दिमाग को ताकत देता है। जोड़ों में लुब्रिकेशन बनाये रखता है। घी खाने से फुर्ती बनी रहती है। आँतों में रुखापन नहीं आता। घी दिमाग का लुब्रिकेंट है। यह ब्रेन सेल्स को सक्रिय रखता है, याददाश्त और मूड को बेहतर बनाता है। जो रोज घी खाये, उसका माथा भी चमकता है और बातों में दम भी आता है।
  • दूध में होता है कैल्शियम, ट्रिप्टोफैन और केसिन, जो हार्मोनल बैलेंस रखता है। घी में होता है ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन A, D, E, K, जो स्पर्म क्वालिटी सुधारते हैं। दोनों मिलकर टेस्टोस्टेरोन स्तर बढ़ाते हैं, जिससे पुरुषत्व, स्टैमिना और इम्यूनिटी सब बढ़ते हैं।
  • देवताओं के भोग में भी घी और दूध का ही प्रयोग होता है।क्योंकि ये सत्त्वगुण” के प्रतीक हैं! मन को शुद्ध, तन को पुष्ट और बुद्धि को प्रखर बनाते हैं।

अमृतं वै घृतं प्रोक्तं, पयः सोमस्य जन्मनि।

  • अर्थात- घी और दूध अमृत के समान हैं, जो शरीर को देवत्व प्रदान करते हैं। देसी हकीम कहते हैं जिसके घर में रोज दूध-घी का दीया जलता है, उसके शरीर में डॉक्टर भी डरता है! यानी जिसने ये दोनों अपनाए, वो बॉडी-बिल्डर नहीं, घी-बिल्डर कहलाता है!
  • मांस से सिर्फ़ चर्बी बढ़ती है, पर दूध-घी से बल और तेज दोनों आते हैं। घी-पचने वाला शरीर रोग से लड़ने की मशीन बन जाता है। दूध-घी की शक्ति सिर्फ़ भोजन नहीं, आयुर्वेदिक ध्यान है।
  • दूध- शुक्र धातु का पोषक तत्व है। यह वीर्य को गाढ़ा बनाता है, शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है, और मानसिक तनाव कम करता है।
  • घी- ओज व तेज का मूल स्रोत है। यह मस्तिष्क को ऊर्जा देता है, थायराइड सन्तुलित रखता है और जोड़ों की जकड़न मिटाता है।
  • मांस व चर्बी- शरीर को वसा तो देते हैं, परंतु आयुर्वेद कहता है कि यह स्थूलता तो बढ़ाते हैं पर बल नहीं। इसलिए दादी-नानी कहती थीं! घी खा, फुर्ती ला!
  • शास्त्रों में घी को अमृत का अंश कहा गया है। अग्निहोत्र और हवन में जो घी अर्पित किया जाता है, वह वातावरण को पवित्र करता है।

घृतं मे चक्षुषे चक्षुः, घृतं मे मनसा मतिः।

घृतं ब्रह्मा प्रजापतिः, घृतं नः सुकृतं कृतम्॥

अर्थात- घी मेरी दृष्टि, बुद्धि और जीवन में शुभता बढ़ाए।

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