राहु को खुश किए बिना कुछ नहीं मिलेगा

तंत्र सिद्धांत का मूल नियम ये है कि
ऊर्जा को ऊर्जा द्वारा ही संतुलित किया
जाता है।
यही कारण है कि त्रिकोण + ॐ + शिवलिंग
का संयोग राहु की छाया शक्ति को
शांत करता है।

राहु शांति से सम्बंधित प्राचीन श्लोक

अर्धनारीश्वरं देवं भुक्तिमुक्ति-प्रदायकम्।
राहु-ग्रस्तं मनो नित्यं शिवलिङ्गं विमोचयेत्॥

जो व्यक्ति शिवलिंग का आराधन करता है,
उसके मन पर राहु का प्रभाव धीरे-धीरे
समाप्त होकर मुक्ति प्रदान करता है।

पार्थिव पूजन/शिवलिंग निर्माण का
तांत्रिक उल्लेख

पार्थिवं शिवलिङ्गं तु सर्वदोषापहारकम्।
भक्त्या निर्माय पूजेथ मानवो वांछितं लभेत्॥

राहु मन पर धुँध, भ्रम और चिंता पैदा
करता है। अश्विन नक्षत्र— मानसिक व
शारीरिक रिपेयरिंग मोड सक्रिय करता है।
जब दोनों का संयम होता है कि
सुधार का द्वार खुल जाता है।

तंत्र शास्त्रों में एक दुर्लभ नियम मिलता है
जब चन्द्रमा अश्विन नक्षत्र में विराजमान हो
और उसी दिन राहुकाल के भीतर त्रिकोण
युक्त माटी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर
!!ॐ!! का अंकन किया जाए, तब यह
विशेष पूजा राहु दोष, भय, मानसिक
उलझन और जीवन की रुकावटों को दूर
करने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

क्यों त्रिकोण? (तांत्रिक रहस्य)

त्रिकोण (△) तंत्र और वेदों में अग्नि, ऊर्जा,
परिवर्तन और उत्थान का प्रतीक है।
राहु एक छाया ग्रह है जिसकी ऊर्जा रहस्यमयी, अनदेखी, मनोवैज्ञानिक और कभी-कभी
अवरोधक भी होती है।
त्रिकोण युक्त शिवलिंग इन ऊर्जाओं को—
स्थिर → रूपांतरित → सकारात्मक
करने की क्षमता रखता है।

तंत्र सिद्धांत का मूल नियम:
“ऊर्जा को ऊर्जा द्वारा ही संतुलित किया
जाता है।
यही कारण है कि त्रिकोण + ॐ + शिवलिंग का संयोग राहु की छाया शक्ति को शांत करता है।

अश्विन नक्षत्र में पूजा क्यों की जाती है?

अश्विन नक्षत्र देवताओं के वैद्य
अश्विनी कुमारों से जुड़ा है।
यह नक्षत्र शरीर, मन, ऊर्जा और काया
के हीलिंग (उपचार) का प्रतीक है।

राहु मन पर धुँध, भ्रम और चिंता पैदा करता है।
अश्विन नक्षत्र मानसिक व शारीरिक
रिपेयरिंग मोड सक्रिय करता है।
जब दोनों का संयम होता है, तंत्र बताता है:
सुधार का द्वार खुल जाता है।

तंत्र शास्त्रों में राहु की शांति के लिए माटी से निर्मित त्रिकोण युक्त ॐ शिवलिंग का चमत्कारी रहस्य बतायें हैं जिस दिन गोचर में 

अश्विन नक्षत्र हो! उस दिन राहुकाल में पार्थिव पूजन करने से जीवन की सारी रुकावट दूर होती हैं और भय, चिंता मिटती है! 

सुख- समृद्धि, सफलता के द्वारा खुलने लगते हैं कभी आज़मा कर देखें! 

तंत्र सिद्धांत का मूल नियम ये है कि 

ऊर्जा को ऊर्जा द्वारा ही संतुलित किया 

जाता है।

यही कारण है कि त्रिकोण + ॐ + शिवलिंग 

का संयोग राहु की छाया शक्ति को 

शांत करता है।

राहु शांति से सम्बंधित प्राचीन श्लोक

अर्धनारीश्वरं देवं भुक्तिमुक्ति-प्रदायकम्।

राहु-ग्रस्तं मनो नित्यं शिवलिङ्गं विमोचयेत्॥

जो व्यक्ति शिवलिंग का आराधन करता है, 

उसके मन पर राहु का प्रभाव धीरे-धीरे 

समाप्त होकर मुक्ति प्रदान करता है।

पार्थिव पूजन/शिवलिंग निर्माण का 

तांत्रिक उल्लेख

पार्थिवं शिवलिङ्गं तु सर्वदोषापहारकम्।

भक्त्या निर्माय पूजेथ मानवो वांछितं लभेत्॥

राहु मन पर धुँध, भ्रम और चिंता पैदा 

करता है। अश्विन नक्षत्र— मानसिक व 

शारीरिक रिपेयरिंग मोड सक्रिय करता है।

जब दोनों का संयम होता है कि 

सुधार का द्वार खुल जाता है।

तंत्र शास्त्रों में एक दुर्लभ नियम मिलता है

जब चन्द्रमा अश्विन नक्षत्र में विराजमान हो 

और उसी दिन राहुकाल के भीतर त्रिकोण 

युक्त माटी का पार्थिव शिवलिंग बनाकर 

!!ॐ!! का अंकन किया जाए, तब यह 

विशेष पूजा राहु दोष, भय, मानसिक 

उलझन और जीवन की रुकावटों को दूर 

करने में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

क्यों त्रिकोण? (तांत्रिक रहस्य)

त्रिकोण (△) तंत्र और वेदों में अग्नि, ऊर्जा, 

परिवर्तन और उत्थान का प्रतीक है।

राहु एक छाया ग्रह है जिसकी ऊर्जा रहस्यमयी, अनदेखी, मनोवैज्ञानिक और कभी-कभी 

अवरोधक भी होती है।

त्रिकोण युक्त शिवलिंग इन ऊर्जाओं को—

स्थिर → रूपांतरित → सकारात्मक

करने की क्षमता रखता है।

तंत्र सिद्धांत का मूल नियम:

“ऊर्जा को ऊर्जा द्वारा ही संतुलित किया 

जाता है।

यही कारण है कि त्रिकोण + ॐ + शिवलिंग का संयोग राहु की छाया शक्ति को शांत करता है।

अश्विन नक्षत्र में पूजा क्यों की जाती है?

अश्विन नक्षत्र देवताओं के वैद्य 

अश्विनी कुमारों से जुड़ा है।

यह नक्षत्र शरीर, मन, ऊर्जा और काया 

के हीलिंग (उपचार) का प्रतीक है।

राहु मन पर धुँध, भ्रम और चिंता पैदा करता है।

अश्विन नक्षत्र मानसिक व शारीरिक 

रिपेयरिंग मोड सक्रिय करता है।

जब दोनों का संयम होता है, तंत्र बताता है:

सुधार का द्वार खुल जाता है।

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