सूर्य केवल आकाश का तारा नहीं, बल्कि हर जीव के भीतर स्थित अग्नि तत्व का स्रोत है।

सूर्यः सर्वस्य चक्षुः, ज्योतिर्मयः प्रभाकरः। (यजुर्वेद) सूर्य समस्त जगत का नेत्र है, जो सबको प्रकाश देता है। सूर्य का प्रकाश केवल रोशनी नहीं, बल्कि आत्मा की Wi-Fi है! सिग्नल फुल होंगे तो जीवन में नेटवर्क एरर नहीं आएगा!

सूर्य बीज तंत्र जब बीज मंत्र से शरीर में अग्नि तत्व जागता है! जब यह अग्नि भीतर सो जाती है, तो जीवन में आलस्य, भय, रोग और भ्रम पनपते हैं। परंतु जब यह सूर्य बीज मंत्र के द्वारा जागती है, तो मनुष्य जीव से देवत्व की ओर बढ़ता है।

अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्, पाति पृथ्वीम् अपः। ऋग्वेद 1.115.1 अग्नि अर्थात् सूर्य, आकाश का मस्तक है, जो पृथ्वी और जीवन को प्रकाशित करता है।

सूर्य बीज तंत्र क्या है? बीज” का अर्थ है- ऊर्जा का बीज सूत्र। हर देवता, हर ग्रह की ऊर्जा को एक “बीज ध्वनि” में बाँधा गया है। सूर्य का बीज है — ह्रौं (Hraum) यह मात्र ध्वनि नहीं, बल्कि सौर-प्रकाश का सूक्ष्म कम्पन (Solar Frequency) है।

जब साधक “ह्रौं” का जप करता है, तो यह कंपन नाभि और मणिपुर चक्र को स्पंदित कर अग्नि तत्व को जाग्रत करता है। मुख्य सूर्य बीज मंत्र-!!ॐ ह्रौं ह्रीं ह्रः सूर्याय नमः!! इस मंत्र में तीन स्तर की शक्ति समाई है 

ह्रौं (Hraum) सूर्य की ध्वनि है, जो सूर्य तत्व को जाग्रत करता है

ह्रीं (Hreem) मायाशक्ति है, जो मन के विकारों को शुद्ध करता है! ह्रः (Hrah) अग्निशक्ति है, शरीर में जीवन ऊर्जा बढ़ाता है

सूर्य बीज तंत्र का वैदिक राधाष्टमी

ह्रौं” के उच्चारण से नाभि और हृदय के बीच तरंगें बनती हैं! यह सोलर प्लेक्सस (Solar Plexus) को सक्रिय करती हैं।

सूर्य मंत्र जप के दौरान तापमान हल्का बढ़ता है! इससे शरीर में Metabolic Rate और ATP Energy बढ़ती है। बीज ध्वनि “ह्रौं” Pineal Gland को उत्तेजित करती है! जिससे Serotonin और Melatonin का संतुलन बनता है। मन स्थिर, विचार स्पष्ट, नींद गहरी होती है।

साधना विधि से दिन में अनुभव लें

सूर्योदय से 30 मिनट पहले ब्रह्ममुहूर्त काल में पूर्व की ओर मुख करें, आँखें आधी बंद रखें। अग्नि मुद्रा (अंगूठा और अनामिका का मिलन)। नाभि केंद्र पर सुनहरी गोलाकार ऊर्जा की कल्पना करें। हर मंत्र जप के साथ वह प्रकाश विस्तृत होता जाए।

ॐ ह्रौं ह्रीं ह्रः सूर्याय नमः। 108 बार (1 माला) रोज़ाना।

अग्नि तत्व के जागरण के लक्षण

शरीर में सहज ऊष्मा और ऊर्जा की वृद्धि आँखों में तेज़ और आत्मविश्वास वाणी में स्पष्टता और सत्य की शक्ति आलस्य, अवसाद और भय का पूर्ण नाश भोजन पाचन में सुधार, त्वचा में चमक

यः सूर्यं ध्यानयेत् नित्यं, तमो नाशं करोति सः।अर्थात जो प्रतिदिन सूर्य का ध्यान करता है, वह अपने भीतर के अंधकार को नष्ट करता है।

सूर्य बीज तंत्र और मणिपुर चक्र Navel Chakra को “सूर्य केंद्र” भी कहा गया है।जब “ह्रौं” की ध्वनि इस केंद्र से टकराती है, तो शरीर में जमा तामसिक ऊर्जा जलकर प्राणिक अग्नि में बदल जाती है।

नाभिस्थं तेजोमण्डलं तत्र सूर्यं परं विदुः।

नाभि के स्थान पर स्थित तेजमण्डल ही परम सूर्य है।इस स्थिति में साधक के भीतर आत्मदीप जलता है जो बाहर के सूर्य से भी अधिक स्थायी होता है।

सूर्य बीज तंत्र के रहस्यमय श्लोक

नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे, जगत्प्रसूति स् थिति नाश हेतवे। (यजुर्वेद) प्रणाम उस सूर्य को जो समस्त जगत का एक नेत्र है, जो सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और लय का कारण है।

ह्रौं सूर्याय नमः तेजोमयं देहि मे बलम्। (अघोर तंत्र) हे सूर्य, अपने तेज से मुझे बल, स्वास्थ्य और ज्ञान प्रदान करो।

सूर्य बीज तंत्र कोई आस्था नहीं! यह जीव-विज्ञान और चेतना का संगम है। जब “ह्रौं” की ध्वनि भीतर गूँजती है, तो शरीर, मन और आत्मा तीनों एक ही प्रकाश में नहाते हैं।

तमेव भान्तमनुभाति सर्वं, तस्य भासा सर्वमिदं विभाति। (कठोपनिषद) वही सूर्य, जो भीतर प्रकाशित होता है, उसी की आभा से सारा जगत चमकता है।

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