ज्योतिष के नियमानुसार सम्वत 2076
में इस ब्रह्मांड/सृष्टि के प्रधानमंत्री
होंगे भगवान सूर्य
नव संवत्सर २०७६ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
६ अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है,यही सनातन धर्म का नया वर्ष है, जिसे ग्रंथों में
नवसंवत्सर के नाम से सम्बोधित किया
जाता है।
यह नया सम्वत्सर, नववर्ष 100 सालों में पहली बार बहुत ही अधिक न्यायकारक सिद्ध होगा।
बेईमानों, भ्रष्टाचारियों और देशद्रोहियों
का होगा सूफड़ा साफ-
छल-कपट, धोखे,बेईमानी,
भ्रष्टाचार से एकत्रित की गई
सम्पत्तियों वाले एवम चरित्रहीन लोगों
के लिए यह वर्ष अति हानिकारक रहेगा।
आंखों का करें बचाव
भयंकर नेत्र रोग फैलेंगे, हो सकता है कि
ऐसा कोई नेत्र रोग फैले, जिससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा हो जाये।
त्वचारोग फैलेंगे
बेशुमार त्वचा रोग-खुजली, फोड़ा-फुंसी एवं रक्तविकार आदि परेशानी प्रजा को पीड़ित कर सकते हैं।
हृदयघात व मानसिक विकारों में वृद्धि
हृदय रोग, हार्टअटैक में वृद्धि होगी।
अवसाद, डिप्रेशन, चिन्ता, भय-भ्रम,
डर, भयंकर मानसिक रोग व्याप्त हो सकते हैं।
बेईमानों का काम खत्म
बेईमान, चरित्रहीन, छल-कपट,
दगाबाज तथा धोखा देने वालों के
लिए यह वर्ष बहुत ही खतरनाक सिध्द होगा।
पुरानी ग्रामीण कहावत है कि-
दगा किसी सगा नहीं है,
नहीं किया, तो करके देख।
जिसने जग में दगा किया है,
उसके जाके घर को देख।।
इस बात में कितनी सच्चाई है, यह, तो
कोई भुक्तभोगी ही बता सकता है।
इस नववर्ष के राजा न्यायाधीश शनि
और प्रधानमंत्री भगवान सूर्य होने से
सीधे-सच्चे लोगों को न्याय अवश्य
मिलेगा। बेईमान एवं अन्यायियों,
आताताइयों को सजा भोगनी होगी।
यह सृष्टि का नियम, शास्त्रों का सत्य
और सदगुरुओं का वचन है।
भगवान सूर्य हैं प्रधानमंत्री
भगवान भास्कर यानि सूर्य देव इस नवीन सम्वत्सर 2076 के प्रधानमंत्री होंगे। सूर्य आत्मबल, मनोबल तथा आत्मविश्वास वृद्धिकारक ग्रह हैं। संसार को
स्वस्थ्य रखने की जबाबदारी, जिम्मेदारी
सूर्य देव की ही है।
भगवान भास्कर सदा पीड़ित प्रजा की भलाई करते हैं। सूर्य नवग्रहों के भी राजा हैं ।
भविष्यपुराण में भगवान शिव सहित सभी
देवी-देवताओं ने भगवान भास्कर की इसप्रकार स्तुति की है-
शांत्यर्थ सर्वलोकानां
ततः शान्ति कमाचरेत ।
सिंदुरासनरक्ताभ:
रक्तपद्माभलोचना: !!१!!
सहस्तरकिरणों देवा:
सप्ताशवरथवाहन: ।
गभस्तिमाली भगवान
सर्वदेवनमस्कृत: !!२!!
करोतु मे महाशांति
ग्रहपीडानिवार्णिम !!३!!
अर्थात-
हे, भगवान सूर्य सभी ग्रहों की पीड़ा दूर करने
वाले, हमें भी महाशांति प्रदान करें । इस सूर्य शांतिकल्प में 200 करीब श्लोक है । इसमें सृष्टि-संसार की प्रत्येक शक्ति, नागों, पितरों तथा सभी देवगणों से शांति की पुरजोर प्रार्थना की गई है।
कैसे करे सूर्य नमस्कार
प्रातः




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