जाल और मायाजाल का फेर क्या है?….

यह जबाब कुछ व्यंग्यात्मक शैली में।

जिंदगी शातिर है जाल बुनने में।

माल आने से पहले ही हलाल कर देती है।।

जाल के अलावा एक सांसारिक मायाजाल और है, जिसमें सब जलचर, थलचर आदि से सभी प्राणी परेशान हैं। मायाजाल के बारे में इस लेख के सबसे अंत में पढ़ें। अभी इस व्यंग्य का आनद लेकर मूड ठीक करें।

ध्यानार्थ….

इस ब्लॉग में माल का अर्थ लड़की और धन-संपदा, प्रसिद्धि भी माने, जहाँ जैसी बुद्धि काम करे।

हर कोई विचारों के जाल में खुद फंसा है,

या फांस रहा है- विचारों को जाल में।

पहले स्वेटर बुनते थे…

अब जाल बुनते हैं।

मेरे अनुभव के आधार पर…

सन्सार में सबसे खतरनाक हैं- जवान लड़कियों के बाल, ख्याल एवं गाल जिसके चक्रव्यूह में फंसकर काबिल प्रेमी कहता है कि-

तेरी जुल्फों के साये में शाम कर दूंगा।

कोई कहता है-

न झटकों जुल्फ से पानी ये मोती टूट जाएंगे।

शराबी लोग इसे इस तरह कहते हैं-

न झटको जुल्फ से वाटर, ये क्वाटर टूट जाएंगे।

ट्यूमर कुछ न बिगडेगा, हमारे 300 जाएंगे।

बाल के जाल में फंसने वाला कितना भी मालामाल हो, वह दाल खाने लायक भी नहीं बचता। यह ऐसा ताल है, जो इसमें उतरा वो फिर, उबर नहीं पाया।

कितने परिंदे के जाल खोलकर आई थी।

जिस दिन वो अपने बाल खोलकर आई थी।।

बाल से बचे, तो बाप-दादा का माल (दौलत) भी सुरक्षित रहता है। बलखाती चाल ने बड़े-बड़े बलशालियों को पाताल पहुंच दिया।

बाल का ख्याल, जब कभी रात को आ जाये, तो पूरा माल (वीर्य) निकल सकता है।

बाल के चक्कर में फंसने वाला प्रेमी कभी ताल से ताल नहीं मिला पाता।

वह कई बार सोचता जरूर है कि-

कल मिला वक्त, तो तेरी जुल्फें, सुलझाऊंगा।

आज उलझा हूँ, जरा वक्त को सुलझाने।

अगर मामला गाल तक पहुंच जाए, तो आये दिन नाईट फॉल की शिकायत शुरू होने लगती है। यह किस इक्कीस वाला नहीं हैं, जिसमे 21 के बाद 22 आएगा। यह किस का असर किस्मत पर होता है।

हमारी सलाह बस इतनी है कि हर हाल में बाल के जाल से बचो, नहीं, तो जीवन भर बेहाल हो जाओगे। ध्यान रखना इश्क का जाल, सन्सार का सबसे बड़ा जाल है।

समस्या लव मैरिज का बाद और बढ़ जाती है,

जब पत्नी नस-नस में होती है, परन्तु वश में नहीं।

कभी आपस झगड़ा हुआ, तो वह एक बात कहती है कि-

जीना चाहते हो या जीतना। अंत में छाती पीटना ही एक काम रह जाता है।

आजकल के प्यार में नाल यानि मांग का ज्यादा चलन हो गया है। पुराने समय में चालचलन पर ध्यान देते थे।

दुनिया में अब अच्छे मित्र, इत्र, चित्र और चरित्र मिलना मुश्किल है।

उसे आये दिन प्रेमिका से यानि जाल से मिलने के बाद मलाल रहता है कि- आज यह बात नहीं बता पाए या पूछ नहीं पाया।

आशिक-शराबी में समानता….

शराबी और आशिकी दोनों में समानता यही है कि- शराब ज्यादा हो तो लड़का उल्टी करता है और अगर आशिकी ज्यादा हो जाती है, तो लड़की उल्टी करता है।

अतः सृष्टि में बाल से कोई जाल नहीं है।

इससे बचकर मस्त रहो, स्वस्थ्य रहो।

मौज करो, रोज करो, नहीं मिले, तो खोज करो।

इणक जिस्म एक खूबसूरत जाल है,

फिर भी हर प्रेमी इस जाल में उलझन चाहता है।

लेख बहुत बड़ा होने के डर से इसे यहीं इति कर रहे हैं।

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ध्यान देंवें… आयुर्वेद माँ की तरह है, इसे रोज नहीं बदलना पड़ता और एलोपैथी प्रेमिका की तरह। इसमें बस दवा बदलते रहो, मरीज कभी ठीक नहीं होता।

जाल और मायाजाल में क्या फर्क है…
मायाजाल सप्तविकर हैं जैसे-लोभ, मोह, आलस्य, मत्सर, लालच आदि।

सृष्टि में इन सात विकारों पर केवल भगवान विष्णु का अंकुश है।
श्रीमद भागवत गीता में लिखा है कि-

दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।

मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।। ७:१४

अर्थात:- इस त्रिगुणात्मिका वैष्णवी माया से मनुष्य कैसे तर सकते हैं। क्योंकि इससे पार होना बड़ा कठिन है

माया सब भूतों यानी पंचमहाभूतों को मोहित करनेवाली है। महादेव की कठोर साधना से इस मायासे तर सकते हैं वे इसके पार हो जाते हैं अर्थात् संसार बन्धनसे मुक्त हो जाते हैं।

मायाजाल में इंसान स्वयं फसता चला जाता है। इससे मुक्ति का एक मात्र उपाय है-महादेव की भक्ति।
!!ॐ नमःशिवाय!! या ! नमःशिवाय च शिवाय नमः!!

मन्त्र का निरंतर जाप।
माया सबको मोहकर वश में कर लेती है।
शास्त्रों में सरल तरीके से समझदारी की बातें लिखी हैं-

न विश्चसेदविश्चस्ते विश्चस्ते नातिविश्चसेत्। विश्चासाद् भयमुत्पन्न मुलान्यपि निकृन्तति ॥

अर्थात…..जो व्यक्ति भरोसे के लायक नहीं है ,उस पर तो भरोसा कतई न ही करें ,लेकिन जो बहुत भरोसेमंद है, उस पर भी अंधे होकर भरोसा न करें , क्योंकि जब ऐसे लोग भरोसा तोड़ते हैं तो बड़ा अनर्थ होता है।

यह प्राचीन ज्ञान अगर आपके काम का हो पढ़े. .

अप्रशस्तानि कार्याणि यो मोहादनुतिष्ठति।
स तेषां विपरिभ्रंशाद् भ्रंश्यते जीवितादपि ॥

भावार्थ :
जो मोह -माया में पड़कर अन्याय का साथ देता है, वह अपने जीवन को नरक-तुल्य बना लेता है।

ब्राह्मणं ब्राह्मणो वेद भर्ता वेद स्त्रियं तथा।
अमात्यं नृपतिर्वेद राजा राजानमेव च॥

भावार्थ :
समतुल्य लोग ही एक दूसरे को ठीक प्रकार से जान समझ पाते हैं, जैसे ज्ञानी को ज्ञानी, पति को पत्नी, मंत्री को राजा तथा राजा को प्रजा। अतः अपनी बराबरी वाले के साथ ही संबध रखना चाहिए।

येऽर्थाः स्त्रीषु समायुक्ताः प्रमत्तपतितेषु च।
ये चानार्ये समासक्ताः सर्वे ते संशयं गताः ॥

भावार्थ :
आलसी ,अधम ,दुर्जन तथा स्त्री के हाथों सौंपी संपत्ति बरबाद हो जाती है। इनसे सावधान रहना चाहिए।

प्रियो भवति दानेन प्रियवादेन चापरः।
मन्त्रमूलबलेनान्यो यः प्रियः प्रिय एव सः ॥

भावार्थ :
कोई पुरुष दान देकर प्रिय होता है, कोई मीठा बोलकर प्रिय होता है, कोई अपनी बुद्धिमानी से प्रिय होता है; लेकिन जो वास्तव में प्रिय होता है ,वह बिना प्रयास के प्रिय होता है।

असम्यगुपयुक्तं हि ज्ञानं सुकुशलैरपि।
उपलभ्यं चाविदितं विदितं चाननुष्ठितम्॥

भावार्थ :
वह ज्ञान बेकार है जिससे कर्तव्य का बोध न हो और वह कर्तव्य भी बेकार है जिसकी कोई सार्थकता न हों।

ययोश्चित्तेन वा चित्तं निभृतं निभृतेन वा।
समेति प्रज्ञया प्रज्ञा तयोमैत्री न जीवर्यति ॥

भावार्थ :
दो व्यक्तियों की मित्रता तभी स्थायी रह सकती है जब उनके मन से मन, गूढ़ बातों से गूढ़ बातें तथा बुद्धि से बुद्धि मिल जाती है।

कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्षणं निषेवते।
तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत् ॥

अर्थ :
मन, वचन, और कर्म से हम लगातार जिस वस्तु के बारे में सोचते हैं, वही हमें अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।

अतः हमे सदा शुभ चीजों का चिंतन करना चाहिए।

माया की महामाया…

माया का काया से सीधा सम्बन्ध है।

क्योंकि काया को चलायमान रखने के लिए माया बहुत जरूरी है।

इसके जाल में उलझ व्यक्ति अंत में कंगाल और कंकाल बन जाता है।

देह कंकाल न हो इसके लिए एक सन्त को कामाख्या माँ ने कंकाली के रूप में दर्शन दिए थे।

कंकाली माता का यह तांत्रिक मंदिर मप्र के शहडोल जिले

से 15 km दूर घने जंगल में आज भी है। महाकाली की यह प्र

तिमा नग्न अवस्था में और मां का शरीर कंकाल की तरह लगभग

7 फुट ऊंचा है।

माँ महामाया के देश में करीब 11 स्वयम्भू

मन्दिर हैं।

■ 36 गढ़ में बिलासपुर के पासबंगाल में महामाया

रतनपुर ग्राम में महामाया देवी का एक प्राचीन मंदिर है।

■ बंगाल में माँ महामाया का एक तांत्रिक मन्दिर वीरपुर में है।
जाल के बारे में आपको ऊपर बता दिया है।

जाल और मायाजाल का फेर क्या है?…..eml

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