काल अर्थात समय तीन तरह का होता है, इसमें एक भूतकाल भी होता है।
कुछ लोग भूत यानि पुरानी बातें करके वक्त को बर्बाद करते हैं।
यही सबसे बड़ा भूत है।
दूसरे वे लोग हैं जो भभूत अर्थात धर्म की बातें करते है।
धर्म की कथा का उन्हें लता तक नहीं मालूम होती।
मोह-माया में फंसे व्यक्ति केवल अपने पूत मतलब बच्चों की चर्चा करके ही समय व्यतीत कर लेते हैं।
नई पीढ़ी के युवाओं को चूत यानी लड़कियों की बाते करने में बहुत रस आता है
और ये नवयुवक जवानी में ही सोमरस (वीर्य) निकालकर बाद में पछताते हैं।
आज भारत में बहुत बड़ा वर्ग मूत के मारे परेशान है।
मूत की चर्चा मतलब मधुमेह के बारे में बढ़-चढ़कर करते हैं।
महिलाएं अक्सर सूत यानि कपड़ा, सूट, साड़ी की चर्चा करके घण्टों बतियाते देखा गया है।
अदालत में सबूत कई बात होती है।
दुनिया में कोई भी इंसान न सपूत से सुखी है और न ही कपूत से सुखी हैं।
सपूत माता-पिता को छोड़कर काम-धंधे के लिए विदेश चला गया।
कपूत अगर साथ में है भी है, तो वह कोई काम, रोजगार न होने से रोता रहता है।
भूत हमने प्रवास के दौरान जरूर देखें हैं।
अभी तक हर्बल प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए लगभग 22–22 लाख किलोमीटर की यात्रा हो चुकी है,
जिसमें 4 चक्र वाहन से 70 फीसदी यात्राएँ हुईं हैं।
आप अंदाज लगा सकते हैं की हमने क्या नहीं देखा होगा।
हमारा आग्रह इतना ही है कि भूत की पुरानी बातों को भूलकर आगे के कार्य पर अपना मन-मस्तिष्क फोकस करें।
कहा गया है कि-
बीती ताहिं बिसार दे, आगे की सुधि लेय।
यह सूत्र आगे बढ़ाने में सहायक होगा। सफलता मिलने लगेगी।
भूत-प्रेत क्या होते हैं?…
भूत-प्रेत, प्रेतात्मा, पिशाच, जिन आदि का उल्लेख हिन्दू धर्म के गरुड़ पुराण में मिलता है।
मान्यता है कि-जिन लोगों की हिंसक मृत्यु होती है।
उनका अंतिम संस्कार या अंत्येष्टि उचित तरीके से नहीं की गई होती हैं, वे अक्सर भूत योनि में भटकते रहते हैं।
भूत-प्रेत भारतीय लोककथाओं, धर्मग्रंथों तथा संस्कृति में देह हीन अलौकिक प्राणी होते हैं जो किसी अतृप्त मृतक की आत्मा से बनते हैं।
ऐसा माना जाता है कि जिस किसी की मृत्यु से पहले कोई इच्छा पूर्ण नहीं हो पाती और वो पुनर्जन्म के लिये भटकते रहते हैं।
जिस मृतात्मा को मुक्ति नहीं मिल पाती अथवा स्वर्ग या नरक नहीं जा पाते वो भूत बन जाते हैं।
भूत-प्रेत में विश्वास प्राचीनकाल से पीढ़ी दर पीढ़ी से भारतीय संस्कृति की जनमानस के दिमाग में
गहराई से जुड़ा हुआ है और यह आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विकास के युग में अभी भी भूत का भय बना हुआ है।
भूत होते हैं यह 100% सही है।
भूत के बारे में कुछ कहावतें, मुहावरे भी भारी प्रसिद्ध हैं।
जैसे- भिण्ड मुरैना के गाँव में कहते हैं कि- जै मोड़ा तो गयो काम से, जाए तो चूत को भूत सवार है।
लड़ाई के समय यह शब्द सरेआम बोला जाता है कि- मार मार के भूत बना देंगे।
कहावत है – भागते भूत की लँगोटी ही भली।
मार के मारे बड़े बड़े भूत भाग जाते हैं।
भोजपुरी में कहा गया कि-
भाग वाला के भूत हर जोतेला–
भाग्यवान का काम बन जाना




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