जात जज्बात हक शक दूर पास पराया खास बहू सास प्रारब्ध पहले रचा…
पीछे रचा शरीर श्री रावण के अनुसार प्रारंभ 3 तरह के होते हैं !
मन्द – ओम नमः शिवाय के जाप से कट जाते हैं!
तीर्व – किसी सच्चे शिव उपासक संत का संघ करने से कट जाते हैं!
तीर्वतम – यह प्रारब्ध महापाप होता है !
इसे भुगतना ही पड़ता है!
लेकिन नियम श्रद्धा विश्वास से केवल एक ही इष्ट महादेव को मानते हुए ..
निरंतर गुरु मंत्र का जाप करते हुए काम में तल्लीन रहते हैं!
उनके प्रारब्ध स्वयं भोलेनाथ साथ रहकर कटवाते हैं !
घोर कष्ट का एहसास नहीं होने देते…
संसार में बहरे अंधे लोग ज्यादा सुखी होंगे क्योंकि ना वह सुन सकते हैं!
ना देख सकते हैं संसार के समस्त झगड़ों का कारण आंख और कान ही है!




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