मानसून में क्या सावधानी बरतें…

मानसून और मेहरिया (बीबी) में एक समानता है

कि यह न किसी की मानते हैं और न किसी की सुनते हैं।

मानसून में हल्के गुनगुने जल से स्नान कर पूरे शरीर को अच्छी तरह पोंछकर

पूरे शरीर पर बादाम, जैतून तेल लगाना चाहिए।

अमृतम काया की आयल आपके बदन की रक्षा करेगा।

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तेल लगाने से कोई भी कृमि-कीड़े-मकोड़े काटते नहीं है,

जो बरसात के समय अधिक होते हैं।

बारिश के मौसम में त्वचारोग होने की संभावना ज्यादा होती है,

जब भी कोई कीड़ा कगते, तो उस स्थान पर तुरन्त हल्दीयुक्त चूना लगाएं।

अथवा अमृतम स्किन की ऑयल उपयोग करें।

रात में भोजन करें। सूर्यास्त के नजदीक गर्म गुनगुना भोजन करें।

बाज़ार चटोरेपन से बचें।

बरसात के समय पित्त शांत होता है।

कभी कभी एक या 2 दिन के लिए दस्त लग सकते हैं, तो लगने दें।

पित्त निकलने के बाद दस्त स्वतः ही बन्द हो जाते हैं।

ज्यादा हल्दी, अदरक का उपयोग न करे।

बारिश के समय शरीर निर्दोष एवं त्रिदोष रहित होने की कोशिश करता है,

जिससे साल भर देह तन्दरुस्त रहती है।

किसी भी तरह के कोई भी रोग होने पर कोई रसायनिक मेडिसिन न लेकर घरेलू उपचार अपनाएं।

कोई भी देशी दवा की मात्रा न्यूनतम रखें।

इस वक्त बासी रोटी खाना वर्जनीय है।

दर्द होने पर तिली के तेल को अजवायन, लहसुन मिलाकर गर्म करके दर्द की जगह अभ्यङ्ग करें।

अथवा ऑर्थोकी पैन आयल या ऑर्थोकी पैन बाम भी लगा सकते हैं।

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खांसी होने पर सौंफ-मिश्री कम मात्रा में लेवें।

इस समय पुराना कफ गलकर बाहर निकलने को आतुर रहता है।

ज्यादा भीगने पर जरा सा सर्दी जुकाम हो, तो कोई भी दवा न लें।

चाहें, तो अमृतम द्वारा निर्मित लोजेन्ज माल्ट या फ्लूकी माल्ट का सेवन करें।

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