भाग्य का खोटापन कैसे दूर करें…

बल-ताकत कसरत करने से आती है।

बुद्धि की शुद्धि एवं ज्ञान वृद्धि के लिए अध्धयन करें।

लेकिन धन की बढ़ोत्तरी केवल किस्मत से ही होती है।

यह अनुभवियों का कहना है।

मेहनत करने से दाल-रोटी चलती है।

महल, वाहन की प्राप्ति भाग्य से ही होती है।

लेकिन इसका मतलब ये नहीं है आप भागना ही बन्द कर दें। भागने में ही भाग्य शब्द गुम्फित है।

आलसी रहकर ही भाग्य खोता होता है।

अगर आप प्याज खाएंगे, तो डकार इलायची की नहीं आएगी।

भाग्य खोटा उन लोगों का ज्यादा बन जाता है, जो केवल बातें करके समय गुजारते हैं।

हमें ये करना चाहिए, सुबह जल्दी उठना चाहिए। ये जो चाहिए शब्द है, यही भाग्य को खोटा बना कर रखता है।

जबकि होना या कहना ये चाहिए कि ये काम कर लें या कर दें।

असफल लोग कभी घर पर एक प्रयोग करके देखें कि एक दीवार पर विश्व के 20 प्रसिद्ध,

सफल लोगों की की तस्वीर लगाएं, उसमें अपनी भी एक फोटो लगाकर बच्चो से पूछे कि इसमें तुम क्या बनना चाहते हो।

बच्चा कभी भी अपाकी तजवीर पर उंगली नहीं रखेगा।

परन्तु जीवन में अपने अपार सफलता पा ली, तो वह आपके चित्र पर ही हाथ रखकर बोलेगा की मुझे पापा की तरह बनना है।

पुरानी कहावत है कि-

छलनी में दूध दो, किस्मत को दोष दो।

अपने जब कुछ नया करने का मन ही नहीं बनाया, न तन को संघर्ष में झोंका, तो भाग्य, तो खोटा बनेगा ही।

देखो!!!…दूध से दही, घी बनने की प्रक्रिया कितनी कठिन है।

दूध को कितनी आग में तपना, उबलना होता है। तब वह निर्मित हो पाता है।

स्वर्ण का भी यही आलम है।

आयुर्वेद में भस्म बनाने की भी इतनी जटिल है।

मेहनत, संघर्ष के बिना भाग्य खोटा ही बनेगा।

दूरदृष्टि का चश्मा पहनने से दूरदृष्टि नहीं आती।

किसी शायर ने लिखा है कि-

खुद को कर बुलंद इतना,

हर तकदीर के पहले कि-

खुदा बन्दे से पूछे, तेरी रजा क्या है।

खुद से जीतने की जिद हो, तो खोटा भाग्य भी जाग जाता है।

जिस दिन अंदर के भय को हरा देंगे, उस दिन उन्नति के पथ पर अग्रसर होने लगोगे।

स्वामी विवेकानंद की किताब पढ़ें। हिम्मत हौसले मिलेंगे।

दो अक्षर का लक,

ढाई अक्षर का भाग्य,

तीन अक्षर का नसीब,

साढ़े तीन अक्षर की किस्मत,

ये सभी चार अक्षर के मेहनत से छोटे ही होते हैं।

भाग्य में बीचोंबीच का अक्षर आधा है, यदि इसे पूरा करेंगे, तो ग हो जाएगा।

इस भा में जोड़ते ही भाग बनता है।

निष्कर्ष यही है कि भागम-भाग ही खुटका ओर भाग्य का खोटापन दूर कर सकता है।

एक पल के लिये मान लेते हैं कि,

किस्मत में लिखे फैसले बदला नहीं करते।

लेकिन आप फैसले तो लीजिये,

क्या पता, किस्मत ही बदल जाए।

किस्मत का अर्थ है कस-मत। हमने भाग्य को कस दिया है।

जानते कुछ नहीं, सीखे बिना अपनी कीमत का आकलन कर रहे हैं।

पहले अनुभव लो, ज्ञान बढ़ाओ, जब जानने लगोगे, तो विश्व मानने लगेगा।

दुनिया में 98 गुण वाले लोग मौजूद हैं।

बस, यही असफल हैं और 2 फीसदी लोग अवगुण प्रवृत्ति के हैं।

ये अवगुण है- एक तो कुछ जानते नहीं, दूसरे किसी की मानते नहीं।

ये ही 2 अवगुण वाले व्यक्ति जीवन में कुछ करके जाते हैं!

क्योंकि इनके पास केवल मेहनत, परिश्रम होता है।

सन्सार में जिन लोगों ने फालतू का ज्ञान बढ़ा लिया है, उनका ही भाग्य खोटा होता है।

भाग्य बनता है अनुभव से, यह दिन रात की मेहनत ततग काम के प्रति समर्पण आता है।

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