यह जबाब पूरा व्यंग्यात्मक है…
हंसने से मर्द मस्त रहता है। हमेशा हंसते रहें।
क्योंकि दुनिया में इतना गम है कि इसे हंसकर ही कम किया जा सकता है।
हंसने से सम्मान और सामान दोनों में बरकत होती है।
यह सामान किसी दुकान का नहीं, मनुष्य के अपने हमारे अंदर ही है।
नारी के लिए कहते हैं कि-
हंसी….. तो फंसी।
लेकिन ऐसा नहीं है।
बनियों के घर में एक सूक्ति सबको सिखाते हैं-
हंसता बनिया, खसता चौर ।
अर्थात व्यापार करते वक्त बनिया हँसेगा, तो ग्राहक को श्कि होगा कि ये ठग रहा है।
ऐसे ही चोर, चोरी करते समय अगर खांसने लगे, तो वह पकड़ा जाएगा।
वैसे हंसने के फायदे ज्यादा हैं और नुकसान कम।
हमारा मानना है कि…. मौज करें, रोज करें और नहीं मिले, तो खोज करें।
ध्यान रहे कि गमों की फ़ौज इंसान को जिंदा नहीं रहने देती।
बीमारी का सबसे बड़ा कारण आदमी की गम्भीरता है। यही भीरुता है।
अनर्थ ग्रन्थ के अनुसार- महिला हों या मर्द ये तीन तरह के होते हैं-
- चुप चोदे
- मुहँ चोदे
- बद चोदे
अब इनकी व्याख्या पढ़ लीजिए।
चुपचोदे की विशेताएँ….हमेशा चुप रहते हैं। कभी किसी भी कम में टांग नहीं अड़ाते।
सदैव चुप ही रहते हैं। इणक नीचे से गंगा भी सूख जाए, तब भी इन्हें फर्क नहीं पड़ता।
देश में कब क्या हो रहा है, कितना भ्रष्टाचार मचा है, इन्हें इससे कोई मतलब नहीं होता। चु
पचोदे प्रवृति के इंसान किसी एक के प्रति समर्पित रहते हैं- उदाहरण के लिए-
भारत के पूर्व प्रधान मंत्री तथा उनकी लता
मुहँचोदे की खासियत….इस तरह के इंसानों की फितरत सबसे अलग होती है।
ये, वे लोग होते हैं, जिन्हें कोई ज्ञान या अनुभव नहीं होता। फिर, भी बोलते हैं।
ये लोग कब-क्या बोलेंगे कुछ कह नहीं सकते।
जैसे-राहुल गांधी
https://youtu.be/4fXarBOzWPcइन पुरुष की महानता यही है कि ये.. 98 गुणों के जानकार होते हैं।
बस इनमें दो ही अवगुण होते हैं। भविष्य में कभी 98 गुण और 2 अवगुणों के बारे में बताएंगे।
ज्यादा जल्दी हो अगर जानने की, तो
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बदचोदे की बेहतरीन कलाकारी… इस तरह के आदमी या स्त्री बहुत ज्ञानी और सपने दिखाने वाले होते हैं।
इन लोगों को हर क्षेत्र में भारी ज्ञान होता है। ये सदैव कुछ न कुछ नया करने पर विश्वास करते हैं।
दुनिया की नब्ज के जानकार होते हैं।
इनसे जुड़ा हुआ आदमी की हालत-
100–100 जूते खाएं, तमाशा घुसकर देखें!!!
जैसी होती है। बदचोदा आदमी कभी किसी से सम्बन्ध खराब नहीं करता।
यह दुश्मन को भी सम्मान देने की कला में निपुण होता है।
इनसे जीत पाता मुश्किल होता है। ये प्राणी अपनी मर्जी से चलते हैं।
किसी की नहीं मानते। न कभी किसी को बांधकर रखते हैं और न बन्धन में रहते हैं।
अगर मान लें, तो यह गुण नरेंद्र चाय वाले के अंदर काफी मिलते हैं।
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक आदमी तीन तरह के होते हैं-इनके व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा है-
1.अंतर्मुखी, (चुपचोदे)
2. बहिर्मुखी (बड़चोदे)
3. उभयमुखी (मुहँचोदे)
अंतर्मुखी आदमी के साथ नारी जीवन कुछ कष्टदायक हो जाता है।
बाकी को, तो वे झेल लेती हैं। ये अंतर्मुखी लोगों का कभी कोई लत नहीं लगती।
दारू, सिगरेट आदि के नशे से दूर ही रहते हैं। ये कुछ मितव्ययी भी होते हैं।
महिलाओं के तन की मलिनता साफ नहीं कर पाते।
पति यदि गम्भीर, सीरियस या अंतर्मुखी स्वभाव का हो
और महिला हसीं-मजाक करने वाले नेचर की हो, तब महिलाएं क्या करें?…
अमृतमपत्रिका, ग्वालियर से साभार-
पति का स्वभाव अंर्तमुखी होना अच्छी बात नहीं है। यह पति की अति है।
ऐसे मन्दमति …पति से रतिसुख का भी आनंद ठीक ढंग से नहीं ले पाती।
…बेहतरीन सामंजस्य के लिए पति को कुछ मजाकिया मूड का होना जरूरी है।
गम्भीर या सीरियस होने से पत्नी को बहुत चिढ़न होने लगती है।
ये वो लोग होते हैं कि कभी प्यार करना नहीं जानते।
अंतर्मुखी मर्द …सहवास या सेक्स प्रक्रिया के दौरान भी खाना खाया, काढ़ा पिया, नाड़ा खोला,
गुनताड़ा लगाया और काम निपटाकर यानि सम्भोग करके सो जाते हैं।
ये सीरियस लोग स्वयं को बहुत महान समझते हैं। ज्ञान का पुलन्दा होते हैं।
ये पढ़े-लिखे जरूर होते हैं, लेकिन गुणी नहीं होते। मर्द होकर भी किसी का दर्द नहीं समझते।
अपनी इच्छाएं भी इन्हें बतानी पड़ती हैं।
। विशेषताएं…. अंतर्मुखी लोगों में कम बोलना एवं किसी बात को समझने,
सुनने की बहुत अद्भुत कला इनके ज्ञान और समझने की क्षमता को बढ़ाता है।
यही कारण है कि जब इन्हें किसी को कोई बात समझानी हो, तो ये बड़े सटीक और सरल तरीके से समझा पाते हैं।
- पति जब अंतर्मुखी हो तो क्या करें…
पति-पत्नी आपस में कुछ इस तरह सामन्जय बैठा ले, तो जीवन बिना परेशानी के गुजर-बसर हो सकता है
की… ■ पति गम्भीर प्रवृति का हो, तो उन्हें किसी के मरने पर, उठावनी जैसे गमगीन या दुख कार्यों के
अलावा सत्संग, भजन, कीर्तन, भागवत कथा आदि में जाए और
■ पत्नी को मीटिंग, शादी-विवाह, मङ्गल कार्य, किट्टी पार्टी, होटल, क्लब, महिला संगीत आदि
आनंददायक कार्यक्रम का लुफ्त उठाना चाहिए।
बहिर्मुखी लोग मानते हैं कि… जोड़ी ऊपर वाला बनाता है।
लेकिन पुरुष घोड़ी बनाकर अपना काम निकालकर अन्य जिम्मेदारी भूल जाता है।




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