जाने माल्ट क्या है?…
माल्ट या अवलेह मूल रूप से तरल औषधियों से निर्मित एक आयुर्वेदिक चटनी है
माल्ट निर्माण की प्रक्रिया भी बहुत जटिल है। इसमें डाले गए सभी मुरब्बे, गुलकन्द को पीसकर 15 से 20 दिन तक देशी घी मिलाकर पकाते हैं।
नारी सौन्दर्य माल्ट में सोमरोग यानि पीसीओडी नाशक ओषधियाँ जैसे – शतावर, मुलेठी अशोक छाल, त्रिफला, दशमूल आदि 20 जड़ीबूटियों का काढ़ा मिलाकर 10 से 15 दिन तक पुनः कम आंच में सिकाई की जाती है।
जब माल्ट पूरी तरह पक जाता है, तब इसमें त्रिकटु, चतुरजात, कालीमिर्च, सौंठ, पिप्पली, नागकेशर, हरिद्रा आदि मसालों के पॉवडर का मिश्रण कर, 10 से 12 के लिए ठंडा होने हेतु छोड़ देते है। माल्ट जब पूर्णतः तैयार हो जाता है, तो छानकर पैक किया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार वात-पित्त-कफ को सन्तुलित करने या त्रिदोष को सम करने के लिए अनेकों मुरब्बों का उल्लेख है। जैसे- आँवला मुरब्बा,
कुष्मांडअवलेह, हरीतकी मुरब्बा, गुलकन्द, गाजर मुरब्बा, गीला एलोवेरा पद्मकाष्ट, इत्यादि तरल-गीले पदार्थों या औषधियों को कैप्सूल में समावेश करना सम्भव नहीं है।
यह सब तरल पदार्थ शरीर में अनेक मलादि विकार को फुलाकर लैट्रिन के माध्यम से बाहर निकाल फेंकते हैं। और कैप्सूल इन बीमारियों को जड़ से ठीक करने में उपयोगी है।
कैप्सूल क्यों जरूरी है और उससे लाभ…
नारिसौन्दर्य माल्ट एवं कैप्सूल दोनों का ही अपना अलग महत्व है। पुराने समय में वैद्य गण आयुर्वेदिक अवलेह (माल्ट) तथा हाथ की बनी हुई चूर्ण या पॉवडर की पूड़ियाँ मरीजों को देकर इलाज करते थे।
यह दवाएं कम से कम एक से 2 महीने तक खानी पड़ती थीं, ताकि मरीज पूर्णतः निरोगी हो सके।
वर्तमान में उन्हीं ओषधि पुड़ियों को आयुर्वेद सारः सहिंता, भावप्रकाश निघण्टु, रस-तन्त्र सार, आयुर्वेद चंद्रोदय, द्रव्यगुण विज्ञान आदि 5000 साल प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार कैप्सूल के रूप में प्रस्तुत किया है।
नारिसौन्दर्य कैप्सूल आयुर्वेद की जड़ीबूटियों के घनसत्व अर्क, एक्सट्रेक्ट, रस भस्म आदि दवाओं को महीन होने तक खरल कर, रसादि औषधियों की भावना देकर मुख्य रूप से बनाया जाता है।
अतः नारिसौन्दर्य माल्ट एवं कैप्सूल दोनों को एक साथ लिया जावे, तो तत्काल अपना शुभपरिणाम दिखाती हैं। जिन्हें अलग-अलग भी लिया जा सकता है। रिजल्ट एकल ओषधि यानि माल्ट या कैप्सूल दोनों में से कोई एक लेकर भी पा सकते हैं। लेकिन कुछ अधिक समय तक धैर्य रखना पड़ता है।
आजकल जिन महिलाओं को तुरन्त असरकारी दवाएं वे दोनों भी एक साथ ले सकती हैं। अन्यथा माल्ट या कैप्सूल इनमें से कोई भी एक लंबे समय तक उपयोग करें।
कैप्सूल या माल्ट दोनों में से बेहतर क्या है?…
कुछ स्त्रियों को देशी दवाओं, माल्ट आदि के खाने से हीक आती है। किसी के पास दूध आदि का साधन नहीं है। कई तरल या गीली वाली दवाएं पसंद नहीं करती। किसी को माल्ट के वजन की वजह से लाने-ले जाने में दिक्कत होती है।
कहीं बेग चिपचिपा खराब न हो जाये इस भय के कारण भी मॉल्ट उन्हें नापसंद है अथवा जो महिलाएं कामगर या नोकरी करती हैं, वे अकेला नारिसौन्दर्य कैप्सूल का सेवन कर सकती हैं।
पेट की खराबी तथा गन्दगी को बाहर करने में मॉल्ट ज्यादा मुफीद है। पेट साफ रहने से शरीर का नदियां मुलायम बनी रहती हैं।
अगर आप माल्ट या कैप्सूल दोनों में पहले कुछ लेना चाहती हैं, तो शुरुआत कैप्सूल से करें।
हमारी सलाह यही है नारियां दोनों दवाओं का सेवन करें। देखरेख, नियम और लेने की दृष्टि से कैप्सूल आमतौर पर खुराक लेने में थोड़ी आसान एवं अधिक सटीक होती हैं।
अगर स्थाई रूप से स्वस्थ्य-सुन्दर बने रहना चाहते हैं, तो नारी सौंदर्य माल्ट और कैप्सूल को जीवन भर लेते रहें। यह रोगप्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्युनिटी बढ़ाने में बेजोड़ है।
नारिसौन्दर्य माल्ट व कैप्सूल अकेले दवा ही नहीं, यह हर्बल सप्लीमेंट भी है।



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