आम स्वास्थ्य वर्धक फल, तो है ही। साथ ही दुर्भाग्य भी मिटाता है। बस वैशाख मास में पंचमी को 11 आम शिवलिंग पर अर्पित करें और चमत्कार देखें। अमृतम

आम पेट में लगे जम यानि कब्ज को खोलता है। आम खाने से पेट पूरी तरह साफ हो जाता है।

  • amrutam अमृतम पत्रिका का फल विशेषांक में आम के बारे में बहुत विस्तार से बताया गया था। ये अमृतम फल अंक 2007 में प्रकाशित हुआ था।

@ आम संसार में आम आदमी से लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं को भी पसंद है। आम की फेमिली में भी विवाद है, तभी आम की भी राजनीतिक पार्टियों जेसी अनेक वेरायटी होती हैं।

@ आम को आम दुनिया के हर देश में खाते हैं इसलिए आम फलों का राजा कहलाता है।
आम के बारे में और भी ज्यादा जानने के लिए amrutam सर्च करें।

@ हरड़, आंवला, एलोवेरा, नीम, मीठा नीम, चंदन का टीका, क्या आप जानते हैं तिलक और त्रिपुंड लगाने से केसे डिप्रेशन मिट जाता है।

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अथ पक्वाम्रफलम् (पका आम) । तस्य गुणानाह

पक्वं तु मधुरं वृष्यं स्निग्धं बलसुखप्रदम्।

गुरु वातहरं हृद्यं वर्ण्य शीतमपित्तलम्॥

कषायानुरसं वह्निश्लेश्मशुक्रविवर्द्धनम्।।

  • अर्थात पका आम का फल – घर में पकाया गया आम आरम्भ में मधुर तथा अन्त में कषाय रसयुक्त, वृष्य (वीर्यवर्धक), स्निग्ध, बल तथा सुख को देने वाला, गुरु, वात नाशक, हृदय को हितकर, वर्ण को उत्तम करने वाला, शीतल, थोड़ा पित्तजनक एवं जठराग्नि, कफ तथा शुक्र को बढ़ाने वाला होता है।
    • अथ कृत्रिमपक्वचूषिताम्रफलगुणानाह

आम्रं कृत्रिमपक्वञ्च तद्भवेत्पित्तनाशनम्।

रसस्याम्लस्य हीनस्तु माधुर्याच्च विशेषतः।।

चूषितं तत्परं रुच्यं बलवीर्यकरं लघु।

शीतलं शीघ्रपाकि स्याद्वातपित्तहरं सरम्॥

कृत्रिम रीति से पकाये हुए (पाल के) आम के फल –

यदि आम का फल कृत्रिम रीति से पकाया गया हो तो वह पित्तनाशक होता है क्योंकि उसमें का अम्ल रस निकल जाता है तथा मधुर रस की विशेषता हो जाती है। वह यदि चूसा जाय तो अत्यन्त रुचिजनक, बल वीर्यकारक, लघु, शीतल, शीघ्र हजम होने वाला, सारक एवं वात-पित्त नाशक है।

    • अथ वृक्षपक्वाम्रफलगुणानाह

तदेव वृक्षसम्पक्वं गुरु वातहरं परम्।

मधुराम्लरर्स किञ्चिद्भवेत्पित्तप्रकोपणम्॥

  • वृक्ष ही में पका हुआ आम का फल – वृक्ष में यदि आम पका हो तो वह मधुर तथा अम्ल रस युक्त, गुरु, अत्यन्त वातनाशक तथा किञ्चित् पित्त को प्रकुपित करने वाला होता है।
  1. आम, तो सभी बहुत खाते हैं लेकिन जानते कुछ भी नहीं हैं आम के बारे में।
  2. आम शरीर के सभी जाम यानि रुकावट खोलने की क्षमता रखता है।
  3. आयुर्वेदिक ग्रंथ भवप्रकाश निघंटू के अनुसार आम खाने से मस्तिष्क की कठोर नाड़ियां मुलायम होने लगती है। जिससे मानसिक विकार, चिंता, डर, भय और डिप्रेशन दूर होता है।
  4. पेट की अनेक परेशानियां, बीमारियां आम खाने से मिट जाती हैं।
  5. आम की तासीर गर्म होने से यह शरीर के वात विकारों से मुक्ति दिलाता है।
  6. आम के बारे में पर्ची हस्तलिखित पांडुलिपियों से लिया गया ये आर्टिकल 8000 आठ हजार शब्दों का है, जो आपकी आंखें खोल देगा।
  7. कलमी आम सब प्रकार के कलमी आमों में लंगड़ा आम प्रसिद्ध है। हाजीपुर और बनारस का लंगड़ा आम सबसे अच्छा होता है, बम्बई का लंगड़ा मध्यम प्रकार का समझा जाता है किन्तु हापुस (अल्फांजो) बहुत उच्चकोटि का माना जाता है। (भावप्रकाशनिघण्टुः ग्रंथ अथ आम्रादिफलवर्गः)
  8. आम के अनेक नाम और पहचान पूरब का गोला, लखनऊ का दशहरी एवं सुफेदा, रामपुर का फजरी, मुरादाबाद का कलमी आदि आम अच्छे होते हैं। जिस आम में रेशा बहुत कम और गूदा अधिक रहता है तथा जो स्वाद में खूब मीठा सर्वप्रिय होता है उसी को उत्तम समझना चाहिये।
  9. आम जितना मीठा होता है उतने ही उसमें गुण भी अधिक होते हैं। वही शरीर के लिए लाभकारी होता है।
  10. आम में जो पुष्टिकारक, बलकारी, वीर्य को उत्पन्न करना इत्यादि गुण हैं वे सब भली प्रकार से पके हुए और मीठे ही आम में होते हैं। अन्य वर्णन आम के साथ लिखा गया है।

तत्रादावाम्रः (आम) । तस्य नामान्याह

आम्रश्चूतो रसालश्च सहकारोऽतिसौरभः।

कामाङ्गो मधुदूतश्च माकन्दः पिकवल्लभः॥१॥

  • अर्थात आम के संस्कृत नाम—आम्र, चूत, रसाल, सहकार, अतिसौरभ, कामाङ्ग, मधुदूत, माकन्द और पिकवल्लभ ये सब हैं।

अथामांम्रपुष्पगुणानाह

    • आम्रपुष्पमतीसारकफपित्तप्रमेहनुत् असृग्दुष्टिहरं शीतं रुचिकृद् ग्राहि वातलम्।।
  • आम का फूल – शीतल, रुचिकारक, ग्राही, वातजनक, एवं – अतीसार, कफ, पित्त, प्रमेह तथा रक्तदोष को दूर करने वाला होता है।

अथामाम्रफलम् (अमिया) कच्चा आम तस्या गुणानाह

आमं बालं कषायाम्लं रुच्यं मारुतपित्तकृत्।

तरुणं तु तदत्यम्लं रूक्षं दोषत्रयास्त्रकृत्॥

  • अर्थात इच्छा आम या अमिया ज्यादा न खाएं अन्यथा रक्त विकार हो सकता है। अमिया (आम के कच्चे फल) कषाय तथा अम्लरसयुक्त, रुचिकारक एवं वात और पित्त को उत्पन्न करने वाला होता है। प्रौढ़ आम का कच्चा फल – तो अत्यन्त अम्ल रस युक्त तथा रूक्ष एवं त्रिदोष तथा रक्त विकार को उत्पन्न करने वाला होता है।

अथ शुष्कामाम्रफलम् (आम का अमचूर) तस्य लक्षणगुणानाह

आम्रमामं त्वचाहीनमातपेऽतिविशोषितम्।

अम्लं स्वादु कषायं स्याद्भेदनं कफवातजित्॥

  • अमचूर के लक्षण – कच्चे आम के ऊपर का छिलका उतारकर यदि उसे धूप में डाल दिया जाय तो अत्यन्त सूख जाने पर उसे अमचूर कहते हैं।
  • अमचूर के नुकसान फायदे – अम्ल तथा कषाय रस युक्त, स्वादिष्ट, मल का भेदन करने वाला एवं कफ तथा वात को दूर करने वाला होता है।
    • अथ गालिताम्ररसगुणानाह

तद्रसो गालितो बल्यो गुरुर्वातहरः सरः।

अहृद्यस्तर्पणोऽतीव बृंहणः कफवर्द्धनः॥

  • निचोड़े आम का रस–बलकारक, गुरु, वातनाशक, सारक, हृदय के लिये अहितकर, अत्यन्त सन्तर्पण करने वाला, बृंहण – रस रक्तादि वर्धक एवं कफ की वृद्धि करने वाला होता है।
    • अथाम्रखण्डगुणानाह

तस्य खण्डं गुरु परं रोचनं चिरपाकि च।

मधुरं बृंहणं बल्यं शीतलं वातनाशनम्॥

  • पके आम के टुकड़े—गुरु, अत्यन्त रोचक, देर में हजम होने वाले, मधुर रस युक्त, बृंहण (रस रक्तादि वर्धक), बलकारक, शीतल एवं वातनाशक होते हैं।

अथ दुग्धयुक्ताम्रगुणानाह

वातपित्तहरं रुच्यं बृंहणं बलवर्द्धनम्।

वृष्यं वर्णकरं स्वादु दुग्धानं गुरु शीतलम्॥

अर्थात पका आम का फल दुग्धाम्र यानि आम को दूध के साथ खाने पर–स्वादिष्ट, वातपित्त नाशक, रोचक, बृंहण, बलवर्धक, वृष्य (वीर्यवर्धक), वर्ण को उत्तम करने वाला, गुरु तथा शीतल होता है।

  • अथाम्रातियोगः (आम बहुत खाना) । तस्य दोषानाह यानि अधिक एम खाने से नुकसान

मन्दानलत्वं विषमज्वरं च रक्तामयं बद्धगुदोदरं च।

आम्रातियोगो नयनामयं वा करोति तस्मादति तानि नाद्यात्॥ एतदम्लाम्म्रविषयं मधुराम्लपरं न तु।

मधुरस्य परं नेत्रहितत्वाद्या गुणा यतः॥

  • आम्रातियोग (अधिक आम खाने) के दोष – जठराग्नि की मन्दता, विषमज्वर, रक्तसम्बन्धी रोग, अत्यन्त मल का अवरोध और नेत्र सम्बन्धी रोग उत्पन्न करता है। इसलिये अधिक आम नहीं खाना चाहिये।
  • यह निषेध अम्ल (खट्टे) आम के विषय में है न कि मधुर तथा अम्ल रस युक्त आम के विषय में है, क्योंकि मधुर रस में नेत्रों को हित पहुँचाना आदि गुण वर्तमान यानि ताजी आम में होते हैं
  • अथाम्रातियोगदोषनिवृत्त्युपायमा

शुण्ठ्यम्भसोऽनुपानं स्यादाम्राणामतिभक्षणे।

जीरकं वा प्रयोक्तव्यं सह सौवर्चलेन च॥

  • आम्रातियोग से उत्पन्न हुए दोषों की निवृत्ति का उपाय – आम अधिक खा लेने पर सोंठ के साथ जल पीना चाहिये अथवा सोंचल नोन के साथ जीरा खाना चाहिये।
  • अथाम्रावर्त्तः (अमावट) तस्य लक्षणं गुणाँश्चाह

पक्वस्य सहकारस्य पटे विस्तारितो रसः।

घर्मशुष्को मुहुर्दत्त आम्रावर्त्त इति स्मृतः।।

आम्रावर्त्तस्तृषाच्छर्दिवातपित्तहरः सरः।

रुच्यः सूर्यांशुभिः पाकाल्लघुश्च स हि कीर्तितः॥

  • अमावट के लक्षण—पके आम के रस को निकालकर, कपड़े पर पसारकर धूप में सुखायें, सूख जाय,तब उसी पर पुनः आमरस डालकर द्वारा सुखायें। इसी भाँति सुखाकर, जो मोटी परत तैयार होती है उसी को ‘अमावट‘ कहते हैं। (द्रव्यगुणविज्ञान शास्त्र)
  • अमावट—प्यास, वमन, वात तथा पित्त का नाशक, सारक तथा रोचक होता है एवं सूर्य की किरणों से सूखकर परिपक्व होने से लघु होता है।

अथाम्रबीजम् (कोइलिया)। तस्य गुणानाह

आम्रबीजं कषायं स्याच्छर्द्यतीसारनाशनम्।

ईषदम्लञ्च मधुरं तथा हृदयदाहनुत्॥

  • अर्थात आम्रबीज (आम की गुठली की मींगी) – कषाय, मधुर एवं किंचित् अम्ल रस युक्त तथा वमन, अतिसार एवं हृदय के दाह को दूर करने वाला होता है।
  • अथाम्रनवपल्लवः । तस्य गुणानाह

आम्रस्य पल्लवो रुच्यः कफपित्तविनाशनः॥

  • आम के नवीन पल्लव – रुचिकारक तथा कफ और पित्त के नाशक होते हैं।
  • आम के पत्ते की झालर के चमत्कार प्रत्येक पूर्णमा, पंचमी और अमावस्या को घर के द्वार पर लगाने से जीवन की सभी बढ़ाए, रुकावट, कारोबार और विवाह संबंधित समस्या दूर होती है।

आम्रः आम का वैदिक विधान, विज्ञान और अन्य नाम

अम्यते प्राप्यते आरोग्यं बलं च अनेन; अम गत्यादौ।

अर्थात आम से आरोग्य एवं बल प्राप्त होता है।

    • हिंदी, बंगला भाषा में-आम । मराठी में०- आम्बा । गुजराती में० – आम्बो। तेलगु ० – मामिडिचेट्टु। ता०-मांगाय, मामरं। कन्नड़ में अंब, अंभ । फारसी ० – अम्बः । अरबी में – अम्बज । अंग्रेजी में० – Mango Tree (मैंगो ट्री) | ले० – Mangifera indica Linn. (मंगीफेरा इण्डिका लिन ) | Fam. Anacardiaceae (अॅनेकार्डिएसी)।

आम सर्वप्रिय और सर्वप्रसिद्ध फल है

  • इस देश में कोई ऐसा मनुष्य न होगा जो आम को न जानता हो । इसका वृक्ष — बड़ा होता है और छोटी-छोटी टहनियों के अन्त में पत्ते सघन लगते हैं।
  • माघ फागुन में आम का बौर होता है और ग्रीष्म ऋतु में फल पकते हैं।
  • फल – किंचित् लम्बाई लिये गोल होता है और उसके भीतर गुद्दी होती है जो गुठली से लिपटी हुई रहती है।
  • आम का वृक्ष इस देश में प्राय: सर्वत्र लगाया हुआ पाया जाता है। संभवतः वन्य अवस्था में यह सिक्किम, आसाम के जंगल, खासीया पहाड़, सत्पुरा पर्वतश्रेणी के नदियों के उद्गम स्थान तथा पश्चिम घाट में पाया जाता है।
  • आम की दो जाति होती है— बीजू और कलमी। बीजू-बीज से उत्पन्न होता है और कलमी – डालियों में जोड़ कलम कर के उत्पन्न किया जाता है।
  • आम के बीजूवृक्ष – बड़े-बड़े होते हैं और कलमी के वृक्ष अधिक ऊँचे नहीं होते। ये दोनों ही स्वाद के भेद से अनेक प्रकार के होते हैं।
  • किसी का खट्टा, किसी का खट्टा-मीठा और किसी का मीठा होता।
  • कलमी आम प्रायः सुस्वादु होते का हैं और इसी को लोग पसन्द करते हैं। इसके फल भी छोटे और बड़े के भेद से कई प्रकार के होते हैं तथा इनके रंग भी मिश्रित हरे, पीले, गुलाबी अनेक प्रकार के होते हैं।
  • संसार के सब फलों में उत्तम और अधिक गुणकारी आम का ही फल है इसलिये इसको फलों का राजा कहते हैं।
  • कवियों की कल्पना है कि जिस प्रकार स्वर्ग में अमृत है उसी प्रकार पृथ्वी में आम का फल है।

आम के फल, मज्जा, पत्ते एवं छाल का उपयोग किया जाता है ।

  • आम का रासायनिक संगठन – इसके फल में विटामिन ए, बी, डी एवं अधिक मात्रा में सी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त साइट्रिक एसिड एवं अल्प मात्रा में गॅलिक् एसिड होता है।
  • आम के गुण और प्रयोग फायदे– कायदे से खाएं, तो आम के अनेक फायदे हैं।
  1. आम की छाल उत्तम रक्तसंग्राहक है तथा इसका क्वाथ फुफ्फुस, आंत्र एवं गर्भाशय से रक्तस्राव होने पर दिया जाता है।
  2. खूनी बवासीर मिटाता है आम रक्तार्श तथा अत्यार्तव में मज्जा १ से १.५ प्रा. को में देते हैं ।
  3. मात्रा छिलके के साथ कच्चा फल पीसकर आमाशय एवं गले की शिथिलता तथा गले के अर्बुद में।देते हैं।
  4. आम के कच्चे फल का शरबत (पन्ना) लू लगने पर पिलाते हैं । गुठली के अन्दर की मज्जा अतिसार तथा प्रवाहिका में दी जाती है। मात्रा- — मज्जा १ से १.५ ग्रा. ; छाल ३-६ ग्रा.

अथाम्रातकः (अम्बाडा )। तन्नामानि तत्पक्वापक्वफलगुणोँश्चाह

आम्रातकः पीतनश्च मर्कटाम्रः कपीतनः।

आम्रातमम्लं वातघ्नं गुरूष्णं रुचिकृत्सरम्॥

पक्वन्तु तुवरं स्वादु रसे पाके हिमं स्मृतम्।

तर्पणं श्लेष्मलं स्निग्धं वृष्यं विष्टम्भि बृंहणम्॥

गुरु बल्यं मरुत्पित्तक्षतदाहक्षयास्त्रजित्॥

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