- मखाने खाने से मानसिक अशांति दूर होती है। क्योंकि यह सूर्य की मेवा है।
- स्त्री यदि एक माह तक रोज 10 ग्राम मखाने सेंककर खाएं, तो गुप्त रोग, लिकोरिया, पीसीओडी आदि विकार दूर होते हैं और खूबसूरती में 4 चांद लग जाते हैं।
- वृत के दौरान मखाने इसीलिए खाए जाते हैं ताकि शरीर त्रिदोष रहित हो जाए।
- मखाने गर्म दूध के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन से छुटकारा मिलता है।
- बच्चों को रोज 10 से 15 मखाने खिलाकर दूध पिलाएं, तो स्मरण शक्ति तेज होती है और बुढ़ापे तक गेंदों में संक्रमण, सर्दी, खांसी, जुकाम, निमोनिया नहीं होता।
- अधेड़ अवस्था में चेहरे पर आई झुर्रियां मिटाने के लिए रोज 20 मखाने देशी घी में भूनकर कालीमिर्च, सेंधा नमक भूर्खकर खाने से ढीली त्वचा टाइट होने लगती है।
- ढीली, शिथिल योनि को कोर या सिकुड़ी, कठोर बनाने के लिए में 3 से 5 मखाने एक कपड़े की पोटली में बंधकर योनि में 15 दिन तक रखने से योनि की शिथिलता मिट जाती है।
- केशर के पानी में 5 मखाने गलाकर उसे थोड़ी सी मुल्तानी मिट्टी में मिलाएं और पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से सारी गंदगी, काले निशान, कील, मुंहासे दूर होते हैं।
- ध्यान रहे कि चूहों को बेहद पसंद हैं क्योंकि ये दांतों को मजबूत बनाते हैं। इसलिए मखाने कभी खुले स्थान पर न रखें।
- घर में चूहे ज्यादा हों, तो पिंजरे में मखाने रखकर एक दो चूहे को पकड़ कर उसे नील से रंगकर छोड़ने से घर के सभी चूहे भाग जाएंगे।
- ज्यादा गंदे सपने आते हो और मन में मैला विचार आता हो, नींद नहीं आती हो या डर, भय, भ्रम रहता हो, तो रोज रात को 5 मखाने तकिए के नीचे रखकर सोने से गहरी नींद आती है। इससे मन शांत रहता है। दूसरे दिन मखानों को किसी गंदी नाली, नाले में फेंककर हाथ धोएं या तुरंत स्नान करें।
- मखाना भारत में मयखाने भी बहुत खाते हैं। इससे रखना बांधकर आता है। देश के कई हिस्सों में इसे लावा भी कहते हैं।
- दलदली क्षेत्र, तलब, नहर, झील के शांत पानी में उगने वाला मखाना पोषक तत्वों से भरपूर एक जलीय उत्पाद है।
- मखाने के बीज को भूनकर इसका उपयोग मिठाई, नमकीन, खीर आदि बनाने में होता है।
मखाने के औषधीय गुण
- मखाने में 9.7% आसानी से पचनेवाला प्रोटीन, 76% कार्बोहाईड्रेट, 12.8% नमी, 0.1% वसा, 0.5% खनिज लवण, 0.9% फॉस्फोरस एवं प्रति १०० ग्राम 1.4 मिलीग्राम लौह पदार्थ मौजूद होता है। इसमें औषधीय गुण भी होता है।
- मखाने का बीज एक तालाब के भीतर स्थिर पानी में पत्ती पर उगते हैं। एकत्रित बीजों को धोकर कुछ घंटों के लिए धूप में सुखाया जाता है।
- सूखने के बाद इन्हें कड़ाही में तेज आंच पर भूनते हैं और फिर तुरंत मारते हैं जिससे काले गोले टूट जाते हैं और सफेद कश बाहर निकल आता है।
- भारत के कुछ हिस्सों में इसे वृत में खाते हैं और सुपाच्य होने से इसे मरीजों को खिलाते हैं।
- पूजा अनुष्ठान में मखाना बहुत शुभ माना जाता है और अक्सर विशेष अवसरों और त्योहारों पर देवताओं को चढ़ाया जाता है।
- 27 मखाने की माला बनाकर रविवार को दुपहर ११.३५ से १२.२० के मध्य शिवलिंग पर अर्पित करने से आंखों के विकार शांत होते हैं और मानसिक विकार दूर हो जाते हैं।
अमृतम पत्रिका, ग्वालियर से साभार
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