सोते समय पत्नी का मुख या सिर किस दिशा की तरफ़ होना चाहिए ?

  • बिस्तर पर बिना नशा किए सोने का दिशा रहस्य ये है कि पत्नी को हमेशा पति के उल्टे हाथ यानी लेफ्ट की तरफ़ सोना उचित रहता है! इससे परस्पर स्नेह की वृद्धि होती है! किस दिशा में सिर रखकर सोना चाहिए? इसमें वास्तु, आयुर्वेद और रोमांस तीनों दृष्टियों से समझाया जा सकता है!

अमृतम पत्रिका, ग्वालियर के नारी रहस्य अंक से साभार

शुरुआत सोने से, पर कहानी है जागने की!

बामे पतिव्रता नारी, दक्षिणे स्वामि सदा सुखी।

यदा दोनों समशयने, तदा प्रेमो न जाय क्षयी॥

(गृहसुख रहस्य शयन अध्याय)

  • कहते हैं- Successful marriage starts from successful sleeping position! अब यह मज़ाक नहीं — विज्ञान, धर्म और रोमांस, तीनों यही कहते हैं कि बीवी को हमेशा पति के बाएं ओर सोना चाहिए।
  • जोड़े में प्रेम, स्वास्थ्य और ऊर्जा बनाए रखने के लिए बीवी को बाईं लेफ्ट ओर और पति को दाईं राइट सेड सोना श्रेष्ठकर रहता है!

सह शयने न वैरं तिष्ठति, प्रेमः पुष्यति, दोषः नश्यति।

  • अर्थात-जो दंपति प्रेम से एक दिशा में सोते हैं, उनके बीच कभी वैर नहीं रहता।

स्वर विज्ञान रहस्य

  • जब पुरुष बाईं करवट लेता है, तो उसकी दायी नासिका यानि सूर्य स्वर या नाड़ी सक्रिय होती है, जो ऊर्जा, उत्साह और पौरुष बढ़ाती है।
  • और जब पत्नी उसकी तरफ़ मुख करती है, तो उसका बायाँ स्वर (चंद्र स्वर) चलता है, जो शीतलता, शांति और प्रेम का प्रतीक है यानि एक ओर सूर्य की गर्मी, दूसरी ओर चंद्रमा की ठंडक, दोनों मिलकर बनाते हैं- घर का ब्रह्मांडीय संतुलन!
  • शरीर का हृदय बाईं ओर होता है, इसलिए जब आप बाईं करवट लेकर सोते हैं, तो रक्त संचार बेहतर होता है, पाचन सुधरता है, और नींद गहरी आती है।
  • सनातन परंपरा में नारी को बामांगी कहा गया है यानि पुरुष का बायां अंग, उसके जीवन का हृदय भाग! इसीलिए भगवान शिव के बाएं श्रीमहालक्ष्मी श्रीराम के बाएं सीता, और विष्णु के बाएं लक्ष्मी विराजती हैं।

अर्धनारीश्वर रूपेण बामभागे स्थिता शक्ति:

  • अर्थात-शक्ति हमेशा बाईं ओर रहती है, वहीं से संतुलन और स्नेह बहता है। तो जो बात कैलाश पर सत्य है! वह शयनकक्ष में भी लागू होती है!

उत्तरं शिरसि निद्रा न, दक्षिणं सर्वसुखप्रदम्।

पूर्वे यशो, पश्चिमे रोगः, वास्तु वेदं नमाम्यहम्॥

सिर उत्तर रखो तो झगड़ा, दक्षिण रखो तो प्यार बढ़े! शुरुआत बिस्तर से, अंत सुख-शांति से! शादी के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है! रिश्ता किस दिशा में जा रहा है? पर वास्तु कहता है! पहले यह तय करो कि सिर किस दिशा में जा रहा है!

वास्तु की विज्ञान क्लास (कॉमेडी संस्करण)

  1. सिर दक्षिण, पैर उत्तर- यह दिशा सुख, सेहत और संतान तीनों देती है!
  2. सिर पूर्व, पैर पश्चिम- बुद्धि तेज़, बातों में रस, और रोमांस में विश्वास! दोनों सुबह जल्दी उठते हैं!
  3. सिर पश्चिम, पैर पूर्व -सालभर नींद, पर जीवन में स्पीड नहीं। यह दिशा अलसापन और बहानेबाज़ी बढ़ाती है।
  4. सिर दक्षिण में रखने से शरीर की नॉर्थ-साउथ मैग्नेटिक अलाइनमेंट सही रहती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन, नींद और मूड तीनों ठीक! और अगर मूड ठीक तो घर में भी म्यूजिक ऑन, मिसअंडरस्टैंडिंग ऑफ!

प्राचीन शयन रहस्य से लेकर आधुनिक विज्ञान तक

  • नींद सिर्फ़ आराम नहीं ऊर्जा पुनर्संचयन (Energy Recharge) की प्रक्रिया है। अगर दिशा, मुद्रा और मानसिक स्थिति ठीक हो, तो नींद सिर्फ़ शरीर नहीं, रिश्ते को भी स्वस्थ बनाती है।
  • सनातन धर्म में दिशा केवल स्थान नहीं, ऊर्जा प्रवाह का मार्ग मानी जाती है। वास्तु शास्त्र और गरुड़ पुराण के अनुसार

नैवोत्तरे शिरो दद्याद्, दक्षिणे सर्वसौख्यम्।

(गरुड़ पुराण, अध्याय ८०)

  • सिर उत्तर दिशा में न रखें; दक्षिण दिशा में शयन सर्वाधिक सुखदायक है।पत्नी को सदेव दक्षिण दिशा की ओर सिर रखकर सोना चाहिए! क्योंकि दक्षिण दिशा यम दिशा मानी गई है, जहाँ चुंबकीय प्रवाह दक्षिण से उत्तर की ओर चलता है।
  • जब सिर दक्षिण में होता है, तो शरीर का रक्त प्रवाह और चुम्बकीय ऊर्जा संतुलित रहती है। इससे नींद गहरी, मन शांत, और संबंध मधुर रहते हैं।

मैग्नेटिक अलाइनमेंट और रक्त का संचार

  • पृथ्वी का उत्तर-दक्षिण चुंबकीय क्षेत्र हमारे शरीर को सीधे प्रभावित करता है। मानव शरीर में भी लौह तत्व (Iron) होता है, जो इस क्षेत्र से रिएक्ट करता है।
  • सिर दक्षिण दिशा में रक्त प्रवाह स्वाभाविक रहता है। हृदय और मस्तिष्क पर दबाव नहीं पड़ता।
    नींद सुकूनभरी होती है। तनाव, हार्मोनल असंतुलन और माइग्रेन जैसी समस्याएँ घटती हैं।
    • सिर उत्तर दिशा में मस्तिष्क की ओर रक्त प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे सिरदर्द, बेचैनी, डरावने सपने या झगड़े तक हो सकते हैं!

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