ढोंग करने वाले लौंग का उपयोग ज़्यादा क्यों करते है?

  • लौंग एक संक्रमण नाशक मसाला है! आयुर्वेद में कफ़नाशक औषधि के रूप में इसका उल्लेख कर्ण फूल के नाम से आता है!
  • अमृतम पत्रिका की प्रस्तुति !! जहाँ देसी हास्य, आयुर्वेदिक बुद्धि और वैज्ञानिक सत्य सब कुछ एक ही लौंग में मिल जाते हैं!

कर्ण ने न छोड़ा धनुष्य, और लौंग ने न छोड़ा कर्णरोग

  • महाभारत के रणवीर कर्ण ने इसकी खोज की और संसार में फैलाया! उनके कान की एलर्जी तथा बहरेपन की समस्या लौंग से ही ठीक हुई थी!
  • पुरानी लोककथाओं में आता है कि महाभारत के योद्धा कर्ण को कान की एलर्जी और हल्का बहरापन था। उनकी समस्या जिस औषधि से ठीक हुई! वह थी कर्णफूल यानी लौंग। यही कारण है कि लौंग को ग्रामीण संस्कृति में “कर्ण-औषधि” कहा जाता है।

लौंग का महाभारत–साइंस कनेक्शन!

  • कर्णफूल से लेकर कर्ण तक, और Wrong साइड वालों तक—लौंग का अनोखा सफ़र! लौंग सिर्फ़ एक मसाला नहीं, यह वो कर्णफूल है, जिसका वर्णन आयुर्वेद में संक्रमण-नाशक और कफ-भेदक औषधि के रूप में आता है। गाँव में कहते हैं
  • जिस घर में रोज़ लौंग जलती है, वहाँ रोग दूर भागते हैं और तंत्र-मंत्र काम करते हैं! पर इसके पीछे विज्ञान, धर्म, इतिहास और थोड़ा देसी ह्यूमर भी छुपा है!
  1. लौंग बहुत गर्म होती है! एक दिन में दो से तीन लौंग खाने का निर्देश आयुर्वेदिक ग्रंथ द्रव्यगुण विज्ञान में मिलता है! ज़्यदा लौंग के सेवन से लिंग ढीला और छोटा हो सकता है!
  • Song सुनते हुए, Wrong साइड चलने वाले और ढोंग करने वाले लोग, लोंग का बहुत उपयोग करते हैं! तंत्र-मंत्र और पूजा के प्रसाद में लौंग जरूरी घटक है!

लौंग यानि कर्णफूल नाम क्यों? आयुर्वेद का रहस्य!

  • आयुर्वेद इसे कर्णफूल कहता है क्योंकि यह कान, गला और कफ-संबंधी रोगों की अचूक दवा है। इसके एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल गुण संक्रमण को शुरुआत में ही रोक देते हैं। श्भैषज्य रत्नावली के अनुसार 

कर्णरोगेषु हितं तिक्तं, वातकफप्रशमनम्।

लवंगं रोगहर्ता च, दीपनीयं सुखप्रदम्॥

  • अर्थात -कान-गले के रोग, कफ, संक्रमण और अपच—सबमें लौंग अत्यंत लाभकारी है।

लौंग दिन में कितनी खाएं?—आयुर्वेदिक ज्ञान 

  • लौंग बहुत गर्म है। द्रव्यगुण विज्ञान कहता है! एक दिन में 2–3 लौंग उचित है। अत्यधिक सेवन के दुष्प्रभाव-
  • पित्त बढ़ना
  • मुंह में जलन
  • लिंग-धातु में कमजोरी
  • ढीलापन
  • शुक्र क्षय आदि! इसलिए कहते हैं कि 

लौंग ज़्यादा खाई, उसकी भागी लुगाई! 

  • गाँव में कहावत मशहूर है Song सुनते, Wrong साइड चलने वाले, और ढोंग दिखाने वाले, जेब में दो लौंग जरूर रखते हैं!”
  • 3 प्रकार के लोग लौंग बहुत इस्तेमाल करते हैं! Song सुनते हुए चलने वाले क्योंकि मुँह में लौंग रखते हैं और समझते हैं कि वो हीरो इंट्री कर रहे हैं!Wrong भी, Strong भी… बस लौंग चाहिए!
  • Wrong साइड चलने वाले उन्हें लगता है कि लौंग चबाने से फोकस बढ़ जाता है। असल में एड्रेनालिन बढ़ता है! फोकस नहीं।
  • ढोंग और बिलोंग करने वाले -जिनके पास कोई सिद्धि नहीं होती, वो हर मंत्र में दो लौंग डालकर उसे शक्तिशाली बता देते हैं! आयुर्वेद कहता है-दिन में 2–3 लौंग से अधिक नहीं।क्योंकि लौंग शरीर में अत्यधिक ऊष्णता पैदा करती है।

अधिक लौंग के नुकसान:

  • शरीर में जलन! नींद में कमी! पाचन में गर्मी और पुरुषों में शुक्रक्षय जिससे लिंग ढीला, वीर्य पतला, कामेच्छा में कमी हो सकती है। यही कारण है कि द्रव्यगुण विज्ञान में स्पष्ट लिखा गया है कि अतिमात्रा लौंग वीर्य-हनन करती है।
  • लौंग वास्तव में तंत्र-ऊर्जा का संवाहक मानी जाती है। पूजा, हवन, तंत्र-साधना और प्रसाद में लौंग का होना आवश्यक माना गया है।

धार्मिक दृष्टि से लौंग का आध्यात्मिक महत्व

लौंग को अग्नि-तत्त्व का प्रतीक कहा गया है। यह नकारात्मक ऊर्जा दूर कर मन को तेज और वातावरण को शुद्ध करती है।

अग्न्यात्मकं कर्णफूलं सर्वदोष-प्रशमनम्।

गृहं शुद्धिकरं नित्यं, पापघ्नं तंत्र-साधने।

अर्थात्- लौंग अग्नि-तत्त्व से युक्त है, दोषों को शांत करती है और घर व साधना को शुद्ध बनाती है।

लौंग क्यों है सुपरफूड?

आधुनिक शोध सिद्ध करता है कि लौंग में है—

  • Eugenol, Vitamin K, Fiber, Anti-oxidants, Natural antiseptics ये सब मिलकर इसे infection killer, throat healer, digestion booster, tooth pain reliever बनाते हैं।
  • लौंग छोटी है लेकिन इतिहास, औषधि, विज्ञान और तंत्र सब समाए हुए हैं! 
    • पर याद रखें-लौंग कम खाएँ, वरना ताकत की जगह ‘गर्मी का आतंक’ शुरू हो जाता है।
  • आयुर्वेद में लौंग को कर्ण-फूल बताया है! महाभारत में कर्ण का उपचार किया! विज्ञान में Clove को एंटीसेप्टिक बताया है! तंत्र में ऊर्जा-वर्धक है! घर में मसाला! 

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