- उत्तर दिशा और उत्तराखंड में हरेक उलझे हुए प्रश्न का उत्तर है। शिवलिंग की जलहरी भी उत्तर की तरफ होती है। उत्साह और उमंग से हर अंग को लबालब करने के लिए उत्तराखंड का एक एक खंड दर्शनीय और पूज्यनीय हैं।
- पाखंड से दूर प्रकृति और परमात्मा को नजदीक से जानने के लिए उत्तराखंड के चक्र अवश्य जाएं।यह स्थान देहरादून से 100 km दूर और मसूरी मार्ग पर स्थित है।
कैसे पहुंचें?
- दिल्ली से चकराता की दूरी 300 किमी है और देहरादून से 100 किमी है। देहरादून सड़क, रेल व हवाई मार्गों से पूरे देश से जुड़ा है। आप देहरादून आकर यहां से टैक्सी लेकर चकराता जा सकते हैं।
चकराता: प्रकृति प्रदत्त प्रमेश्वर और संस्कृति के दर्शन
- उत्तराखंड में चकराता एक ऐसा स्थान है, जहां दिल्ली से कुछ ही घंटों में पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचते ही गर्मी से राहत तो मिलती ही है, साथ ही अनछुए प्राकृतिक परिवेश और स्थानीय संस्कृति के भी दर्शन होते हैं।
- उत्तराखंड के पश्चिमी हिस्से में स्थित चकराता देहरादून जिँले का भाग है। यहां की संस्कृति और इतिहास उत्तराखंड के बाकी हिस्सों से अलग है।
- चकराता ग्राम के मुख्य देवता महासू हैं। महासू अर्थात महाशिव। यहां के लगभग सभी गांवों में महासू देवता के मंदिर स्थित हैं। बिसोई में स्थित महासू महाशिव मंदिरजरूर जाएं और मानसिक शांति, सुख समृद्धि की प्रार्थना करें। यहां बादाम अर्पित करें।
वाटर फॉल दुखों का काल
- चकराता के दर्शनीय स्थानों में सबसे मुख्य है टाइगर फॉल। इस वॉटरफॉल की ऊंचाई लगभग 100 मीटर है। इसकी गर्जना काफी दूर से सुनाई देती है।
- मानसून में इसमें पानी का प्रवाह इतना तेज हो जाता है कि आप 50 मीटर दूर खड़े होने के बावजूद भी भीग सकते हैं।
- चकराता से 20 किमी दूर लोखंडी नामक स्थान है। यह समुद्र तल से लगभग 2,500 मीटर ऊपर है, इसलिए गर्मियों में भी काफी ठंडा रहता है। यहां सर्दियों में या 12 माह में कभी भी जा सकते हैं।
- सर्दियों में यहां खूब हिमपात होता है। यहां हिमालय की बर्फीली चोटियों के दर्शन होते हैं, जिनमें किन्नौर हिमालय के पर्वत और स्वर्गारोहिणी, बंदरपूंछ आदि शिखर प्रमुख हैं।
मोइला टॉप, दूर भागे खोफ
- लोखंडी से लगभग 4 किमी दूर मोइला टॉप है। 3 किमी तक मोटरेबल रोड बनी है, बाकी एक किमी के लिए ट्रैकिंग करनी होती है।
- देवदार वृक्ष के घने जंगल में ट्रैकिंग के लिए अच्छा रास्ता बना हुआ है। मोइला टॉप पर घास का बहुत बड़ा मैदान है, जिसे मोइला बुग्याल भी कहा जाता है। यहां से एक तरफ हिमालय की बर्फीली चोटियां दिखाई देती हैं, तो दूसरी तरफ उत्तराखंड व हिमाचल के दूर तक फैले अनगिनत गांव दिखाई देते हैं।
देववन करे मन प्रसन्न
- चकराता के पास देवदार व बुरांश का घना जंगल है, जिसे देवबन कहते हैं। 100 वर्ग किमी से भी ज्यादा बड़े भाग में फैला यह जंगल सदाबहार वर्षावन है, जिसमें तेंदुए और काला भालू जैसे जानवर निवास करते हैं।
- जंगल में कई फॉरेस्ट रेस्ट हाउस भी बने हैं, जिनमें आप ठहर भी सकते हैं। रेस्ट हाउसों में ठहरने की जानकारी उपलब्धता और रास्ते की स्थिति आपको चकराता फॉरेस्ट ऑफिस में पता चल जाएगी। ये सभी रेस्ट हाउस ब्रिटिश काल के हैं और इनमें ठहरना अपने आप में अलग ही अनुभव होता है।
चिरमिरी टॉप और रामताल घूमे पूरे साल
- चकराता से अगर मसूरी की तरफ बढ़ें, तो कई दर्शनीय स्थल मिलते हैं, जैसे चिरमिरी टॉप और रामताल आदि। चिरमिरी टॉप से सूर्यास्त का बड़ा ही शानदार नजारा दिखाई देता है।
- थोड़ा और आगे बढ़ते हैं, तो बैराटखाई नामक स्थान आता है। यहां से सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों का आनंद लिया जा सकता है। इससे थोड़ा आगे बिसोई नामक गांव में महासू देवता का बड़ा ही भव्य मंदिर बना है।
- बिसोई के अलावा लखस्याड़ और लखवाड़ गांवों में भी महासू देवता के मंदिर हैं। ये सभी गांव आसपास ही हैं और अपने भव्य मंदिरों के लिए जाने जाते हैं। लखवाड़ के बाद यमुना पार करके मसूरी जाया जा सकता है।
कमंडल लेकर घूमने वाली जगह लाखामंडल –
- लाख का अर्थ है गुफाओं में छुपे लाखों स्वयंभू शिवलिंग और मंडल जिसका अर्थ है मंदिरों या लिंगम मंदिर में दो शिवलिंग अलग-अलग रंगों और आकार के साथ स्थित हैं।
- द डार्क ग्रीन शिवलिंग द्वापर युग से संबंधित है। जब भगवान कृष्ण का अवतार हुआ था और लाल शिव लिंग त्रेता युग से संबंधित हैं।
- लाखामंडल मंदिर में भगवान कार्तिकेय, भगवान गणेश, भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की मूर्तियां मंदिर के अंदर स्थापित हैं ।
- लाखामंडल मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो कि उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसर-बावार क्षेत्र में स्थित है।
- यह मंदिर देवता भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित हैं एवम् समुन्द्रतल से इस मंदिर की ऊँचाई 1372 मीटर है।
- यह मंदिर शक्ति पंथ के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि उनका मानना है कि इस मंदिर की यात्रा उनके दुर्भाग्य को समाप्त कर देगी।
- मंदिर अद्भुत कलात्मक काम से सुशोभित है । लाखामंडल मंदिर का नाम दो शब्दों से मिलता है
- मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टान पर देखे जा सकते हैं।
मोइगड़ झरना, कुछ नहीं करना, बस ध्यान करना
- यह देहरादून से 69 किलोमीटर दूर यमनोत्री मार्ग पर शांत एवं स्वच्छ झरना स्थित हैं| यमनोत्री जाने वाले यात्री इस झरने में स्नान करते है |
कानासर –
- यह चकराता से 26 किलोमीटर दूर ऊँची पहाडियों और घने जंगलो से घिरा यह स्थान पर्यटकों के लिए आदर्श जगह है| यह स्थान पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है।
कब जाएं?.
- पूरे साल जाया जा सकता है। सर्दियों में यहां हिमपात भी होता है। गर्मियों में मौसम ठंडा बना रहता है। मानसून में जबरदस्त हरियाली हो जाती है।
कहां ठहरें?
- चकराता और इसके आसपास के लगभग सभी गांवों में होटल व होम स्टे मिल जाएंगे। इनके अलावा कई रिसॉर्ट भी हैं। अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं, तो देवबन के जंगल में फॉरेस्ट रेस्ट हाउसों में भी ठहर सकते हैं।
- उत्तराखंड में लगभग 10 साल में 50 बार यात्रा कर बहुत बारीकी से घुमा है। अनेक साधु संतों और अघोरियों के दर्शन किए। अनेकों तीर्थों की जानकारी अगले लेख में पढ़ें।
Leave a Reply