माला सिद्धि का ये गुप्त रहस्य कभी उजागर नहीं किया जाता। केवल गुरु ही इस विधि को बताते हैं। श्री महात्रिपुर सुन्दरी खड्गमाला नामक हस्त लिखित पांडुलिपि में माला सिद्धि का संक्षिप्त में वर्णन है और मंत्र इस प्रकार बताया है। तंत्रसार में उल्लेख है की यदि माला सिद्ध हो जाए, तो सभी भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनी, जिन्न आदि हमेशा साधक की आज्ञा में तत्पर रहते हैं। श्री महालक्ष्मी की कृपा होने लगती हैं। ऐसा साधक जिस पर हाथ रख दे, उसके रोग मिट जाते हैं। कर्ण पिशाश्चिनी कान में यक्षिणि आंखों में निवास कर भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में स्पष्ट जानकारी देने लगती हैं। ऐसे साधक प्रथ्वी में दबे खजाने के बारे में बता सकता है। महामृत्युंजय का एक सहस्राक्षर माला मंत्र के द्वारा अघोरी तांत्रिक माला को सिद्ध कर लेते हैं। ये माला 27 या 33 मानकों की होती है।
अमृतम पत्रिका, ग्वालियर से साभार
- इस ब्रह्म विद्या के मालिक भगवान शिव हैं। यह माला सिद्ध सहस्राक्षर मन्त्र अत्यन्त लाभकारी है। अतः यहां दिया जा रहा है
माला सिद्ध करने का विधि विधान
- रविवार को जिस दिन हस्त नक्षत्र हो, तो दिन के 11.20 से 12.40 के बीच शिवलिंग की पूजा जलधारा, दुग्धादि पञ्चामृत का धारात्मक अभिषेक अथवा बिल्वपत्र, पुष्पादि से करने के बाद मंत्र जाप आरंभ करें।
- नीचे लिखे मंत्र का 11 बार जाप 111 दिन तक निरंतर फिर सुबह सूर्योदय के समय करें।
सहस्त्राक्षर- मालामन्त्र –
- ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्त्वात्मकाय सर्वमन्त्ररूपाय सर्वयन्त्राधिष्ठिताय सर्वतन्त्रस्वरूपाय सर्वतत्त्वविदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकण्ठाय पार्वतोप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूलितविग्रहाय महामणिमुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावता
राय दक्षाध्वरध्वंसकाय महाकालभेदकाय मूलाधारैकनिलयाय तत्त्वातीताय गंगाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदान्तसाराय त्रिवर्गसाधनायानेककोटिब्रह्मा ण्डनायकायान्त’ वासुकितक्षक कर्कोटकशङ खकुलिकपद्ममहापद्नेत्यष्टनागकु लभूषणाय प्रणवस्वरूपाय चिदाकाशायाकाशादिस्वरूपाय ग्रहनक्षत्रमालिने सकलाय कलङ्करहिताय सकललोकैक कर्त्रे सकललोकैकसंहर्त्रे सकललोकैक भर्त्रे सकललोकैकसाक्षिणे सकल निगमगुह्याय सकलवेदान्तपारगाय सकललोकैकवरप्रदाय सकललोकैकशङ्कराय शशाङ्कशेखराय शाश्वतनिजावासाय निराभासाय निरामयाय निर्मलाय निर्लोभाय निर्मोहाय निर्मदाय निश्चिन्ताय निरहङ्काराय निराकुलाय निष्कलङ्काय निर्गुणाय निष्कामाय निरुपप्लवाय निरवद्याय निरन्तराय निष्कारणाय निरातङ्काय निष्प्रपञ्चाय निस्सङ गाय निर्द्वन्द्वाय निराधाराय नीरोगाय निष्क्रोधाय निर्गमाय निष्पापाय निर्भयाय निर्विकल्पाय निर्भेदाय निष्क्रियाय निस्तुलाय नस्संशयाय निरञ्जनाय निरुपमविभवाय नित्यशुद्धबुद्ध परिपूर्णसच्चिदानन्दादृश्याय परमशान्तस्वरूपाय तेजोरूपाय तेजोमयाय जय जय महारौद्रभद्रावतारमहाभैरव कालभैरव कल्पान्तभैरव कपालमालाधर खट्वाङ्गखड्ग- पाशाङ कुशडमरु त्रिशूल-चाप-बाण-गदा-शक्ति- भिन्दिपाल तोमरमुसल- मुद्गर – पट्टिश-परशु-परिघ भुशुण्डी – शतघ्नी- चक्रा द्यायुध-भीषणकर६ सहस्रमुखदंष्ट्राकराल विकटाट्टहासविस्फारित ब्रह्माण्डमण्डलनागेन्द्रकुण्डल नागेन्द्रहारनागेन्द्रवलय नागेन्द्रचर्मधर मृत्युञ्जयत्र्यम्बकत्रिपुरान्त कविरूपाक्षविश्वेश्वर – विश्वरूप वृषवाहन विश्वतोमुख सर्वतो मां रक्ष रक्ष । ज्वल ज्वल महामृत्युभयमपमृत्युभयं नाशय नाशय रोगभयमुत्सादयोत्सादय विषसर्पभयं शमय शमय चौरान् मारय मारय मम शत्रूनुच्चाटयोच्चाटय त्रिशूलेन विदारय विदारय कुठारेण भिन्धि भिन्ध खड्गेन छिन्धि-छिन्धि खट्वाङगेन विपोथय विपोथय मुसलेन निष्पेषय निष्पेषय बाणैः सन्ताडय सन्ताडय रक्षांसि भीषय भीषय भूतानि विद्रावय विद्रावय कूष्माण्ड – वेताल – मारीच- ब्रह्मराक्षसगणान् सन्त्रासय सन्त्रासय मामभयं कुरु कुरु वित्रस्तं मामाश्वासय नरकभयाद् मामुद्धरोद्धर सञ्जीवय सञ्जीवय क्षुत्तृभ्यां मामाप्याययाप्यायय दुःखातुर मामानन्दयानन्दय शिवकवचेन मामाच्छाद। याच्छादय मृत्युञ्जय त्र्यम्बक सदाशिव नमस्ते नमस्ते नमस्ते स्वाहा - उपरोक्त जपने से पहले और के पश्चात एक माला महामृत्युंजय मंत्र की करें। ताकि इसकी शक्ति माला में समाहित हो सके।
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