- खांसी आना स्वास्थ्य के लिए अच्छे संकेत हैं। शरीर में कफ के कारण ही चिकनाहट यानि लुब्रिकेंट बना रहता है। लेकिन कफ के आंतुलन से फेफड़ों में अनेक विकार, व्याधि पैदा हों जाती हैं।
- चरक सूत्र के एक श्लोक के अनुसार कफ सूखने के कारण ही जोड़ों, कमर, हाथ, पैरों में दर्द और अनेक वात रोग उत्पन्न होने लगते हैं।
- माधव निदान में बताया है कि खासी वायुमार्ग को साफ करने का एक सुरक्षात्मक तंत्र है। हालांकि बार-बार खांसी की समस्या होना या लंबे समय तक खांसी आने से बुढ़ापा जल्दी आ जाता है। पुरानी खांसी सेहत के लिए घातक हो सकती है।
- सर्दी, जुकाम लगातार बने रहने की बड़ी वजह फेफड़ों में जमी गंदगी होती है। फेफड़ों के 6000 छिद्रों में जब 2000 से भी कम छेद बंद हो जाते हैं, तो जुकाम हमेशा बना रहेगा।
- एक बार गुगल पर Lozenge Malt सर्च कर एक माह सेवन करें। यह बहुत ही अच्छी आयुर्वेदिक ओषधि है, जो 17 तरह के कफ को मल शुद्धि कर रखने के द्वारा शरीर की सारी गंदगी साफ कर कफ को संतुलित कर देती है।
- Lozenge Malt is an Ayurvedic medicinal recipe crafted with the goodness of Tulsi, Vasa, Mulethi, Pushkarmool and Tribhuvan Kirti Ras.
- It is an effective remedy for chronic cough, cold, sinusitis, asthma, allergic bronchitis, upper and lower respiratory diseases, whooping cough and allergic rhinitis.
Primary Benefits
- Fights and Prevents Chronic Cough, Seasonal Flu, and Respiratory Concerns like Sinusitis, Asthma, Allergic Bronchitis, and Allergic Rhinitis. Helpful in Fever, Sore Throat and Treating Malaria and Dengue Fever, Regulates Uric Acid Levels
Secondary Benefits
- Reduces the Risk of Kidney Stones, Spleen and Liver Diseases, Aids in Digestion, Helpful in Clearing Respiratory Passage by Loosening Phlegm and Removing Excess Mucus
पोस्ट-वायरल खांसी (Post Viral Cough)
- खांसी के प्रकार में वायरल खांसी, गले की सूजन से ऊपरी श्वसन पथ में संक्रमण होने के कारण होने वाली सबसे आम समस्या होती है।
- आमतौर पर इसके इस खांसी के प्रकार के उपचार के लिए एलोपैथिक चिकित्सक या डॉक्टर ज्यादातर रोगियों के लिए एंटीबायोटिक्स के सेवन की सलाह नहीं देते हैं।
- क्योंकि पोस्ट-वायरल खांसी बैक्टीरिया के कारण नहीं होती है। ध्यान रखें कि खांसी के दौरान एंटीबायोटिक्स का सेवन तभी करना चाहिए, जब खासी के प्रकार का कारण बैक्टीरिया हो।
- इसलिए, संक्रमण से होने वाली खांसी के उपचार के लिए आयुर्वेदिक ओषधि जैसे आंवला मुरब्बा, हरड़ मुरब्बा, हंसराज, मधुयष्टि, बहेड़ा, सुहागा आदि लेने का परामर्श देते हैं। ऐसे में Lozenge Malt एक बेहतरीन विकल्प है।
गीली खांसी (Wet cough)
- गीली खांसी का कारण ठंड, सर्दी, ज्वर, फ्लू होता है। इसके लक्षण धीमी या तेजी से बढ़ सकते हैं और अधिकतर मामलों में यह अपने आप ही कुछ दिनों में ठीक भी हो जाती है।
- गीली खांसी में खांसते वक्त मुंह में बलगम आता है। गीली खांसी होने पर गले, नाक, वायुमार्ग और फेफड़ों से बगलम आता है, जिसे श्वसन तंत्र बाहर निकलता है।
- गीली खांसी के कारण बहती नाक (Running nose), थकान (Fatigue), गले और सीने में दर्द (Neck and chest pain) की समस्या भी हो सकती है।
खांसी के आरंभिक लक्षण
- खांसी आने के धारण शुरूआती संकेत कितने गंभीर या सामांन्य हैं। इसे अपने व्यवहार या अनुभव लगा सकते हैं।
- खांसी रात में ज्यादा आती है। खाने के पहले या बाद आती अथवा किसी तरह के शारीरिक कार्य करने के दौरान आती है?
- यदि खांसते समय आपको गला गीला हो जाता है या सूखा रहता है या गले में कुछ फंसा हुआ महसूस करते हैं, तो भी lozenge malt आपकी मदद करेगा।
खांसी का समय सीमा –
- अगर आपकी खांसी 7 से 15 या 6/8 सप्ताह से अधिक है, तो फेफड़ों में कमजोरी आ सकती है। पुरानी खांसी के कारण ही फुसफुस संक्रमित हो जाते हैं और बाद में यही क्षीणता रोग, टीबी आदि का कारण बनते हैं।
- इसलिए आपको शरीर में दिखने वाले कुछ शुरुआती लक्षणों की जानकारी होना चाहिए।
- क्रॉनिक कफ COPD जैसी बिमारियों का एक खास लक्षण होता है खांसी या फिर कफ का लंबे समय तक रहना।
- कफ का बनना अगर आपको बहुत अधिक कफ बन रहा है, और कफ रंग में पीले या हरे रंग का है।
- सांस लेने में समस्या और वजन कम होना
खांसी का दुष्प्रभाव या साइड इफेक्ट
- खांसी आने के समय पेशाब न रोक पाना, उल्टी होना, नींद न आना, सांस फूलना या सीने में दर्द होने जैसी भी समस्या का अनुभव होता है।
- खांसते समय आपको कोई शारीरिक तकलीफ, जैसे- खांसी लगातार आती है या खांसी के दौरान आप कमजोर महसूस करते हैं, तो उचित नहीं है।
- कभी-कभी, खांसने का समय अधिक हो सकता है। ऐसी स्थिति में दम घुटने की भी समस्या हो सकती है। अगर नीचे बताए गए लक्षणों में से आपको कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आयुर्वेदिक उपचार करें
- त्वचा लाल होना
- बेहोशी
- बोलने या रोने में असमर्थता
- घरघराहट होना
- कानों में सीटी बजने जैसी आवाज सुनाई देना
- जोर-जोर से सांस लेना।
- गले में खराश क्या आपको भी परेशान करती है
- खांसी और खांसी के प्रकार से खुद की सुरक्षा करने के लिए जरूरी है कि फ्लू और वायरल संक्रमण से खुद का बचाव करें।
- गले में खराश या दर्द होने पर घरेलू उपायों जैसे सेंधा नमक, हल्दी पाउडर युक्त गुनगुने पानी से गरारा करना। अधिक मसालेदार भोजन लेना। गुड़ खाना।
- परहेज तैलीय पकवान न खाएं। रात में दही, अरहर की दाल, ठंडी चीजे,आईसक्रीम जैसी परहेज करें।
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