• उन्नति, सफलता हेतु – क्या करें 6 अप्रैल 2019 नव सम्वत्सर के दिन

    6 अप्रैल को करें ये उपाय,  तो हो जाएंगे मालामाल हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नववर्ष या नए सम्वत्सर का आरंभ सूर्योदय से होता है, जबकि अंग्रेजी का नये साल का प्रारंभ रात्रि में 12 बजे के बाद होता है। गुड़ी पड़वा का प्रारंभ   6 अप्रैल 2019 को रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण और अश्वनी नक्षत्र…

  • जाने दुनिया के 18 और भारत के 16 सम्वत्सरों के बारे में

    जाने दुनिया के 18 और भारत के 16 सम्वत्सरों के बारे में

    दुनिया के सभी धर्मों के धर्मशास्त्र में अनेको सम्वत्सरों के प्रचलन का उल्लेख है। 18 विदेशी सम्वत्सरों के नाम 【1】खताहू, 【2】पारसी, 【3】मिस्री, 【4】तुर्की, 【5】आदम, 【6】ईरानी 【7】यहूदी 【8】इब्राहिम 【9】मूसा 【10】यूनानी 【11】रोमन 【12】ब्रह्मा 【13】मलयकेतु 【14】पार्थियन 【15】जावा 【16】हिजरी 【17】चीनी 【18】ईसवी प्राचीन भारत के प्रमुख 16 सम्वत्सर 【१】कल्पाब्द 【२】सृष्टि 【३】वामन 【४】श्रीराम 【५】श्रीकृष्णा 【६】युधिष्ठिर 【७】बौद्ध 【८】महावीर 【९】शंकराचार्य 【१०】कलचुरी 【११】वलभी 【१२】फसली…

  • नववर्ष, नया सवंत्सर शुभ-सुखदायक हो

    नववर्ष, नया सवंत्सर शुभ-सुखदायक हो

    स्वस्थ्य रहने के लिए क्या करें –  नवसंवत्सर में दवा और दुआ से फायदे सनातन धर्म के नववर्ष को नवसंवत्सर कहा गया है। प्राचीन काल से ही ज्योतिष का सम्पूर्ण विधि-विधान नववर्ष से ही शुरू होता है। राशि के अनुसार नववर्ष कैसा व्यतीत होगा, धन कितना आएगा-जाएगा, नया व्यापार, नया भवन, विवाह, जल वर्षा कितनी होगी…

  • अमृतम गोल्ड माल्ट

    अमृतम गोल्ड माल्ट

    गामियों के मौसम में एक विशेष ओषधि एक ऐसी प्राकृतिक अमृतः  जड़ीबूटियों युक्त ओषधि है, जो गर्मियों के दिनों में शरीर में जाते ही अपना कार्य शुरू कर देती है। शारीरिक शक्ति दृढ़ करने में और इम्युनिटी पॉवर बढ़ाने में अमृतम गोल्ड माल्ट रामबाण है। https://www.amrutam.co.in/shop/amrutam-malts-ancient-indian-formulation-ayurveda-medicine-for-all-ages/amrutam-malt/ सुबह नाश्ते के साथ, पराठे या ब्रेड में 2 चम्मच…

  • भगवान शिव के पार्षद हैं – रावण पार्ट 10

    भगवान शिव के पार्षद हैं – रावण पार्ट 10

    बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि दशानन रावण भोलेनाथ के मुख्य पार्षदों में से एक हैं। जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी  आदि शिव के पार्षद हैं। शस्त्रों में लिखा है कि इन पार्षदों के अपमान और आलोचना करने से धन का धीरे-धीरे नाश…

  • शिवपुराण से पार्ट- 9 शिव के गण

    शिवपुराण से पार्ट- 9 शिव के गण

    भगवान शिव के गण शिव के ग्यारह गणों में 【1】भैरव, कपाल भैरवऔर कालभैरव 【2】वीरभद्र, 【3】मणिभद्र, 【4】चंदिस, 【5】नंदी, 【6】श्रृंगी, 【7】भृगिरिटी, 【8】शैल, 【9】गोकर्ण, 【10】घंटाकर्ण, 【11】जय और विजय प्रमुख हैं।  इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग–नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। कामशास्त्र के रचयिता शिवगण नंदी ने ही ‘कामशास्त्र’ की रचना की थी। ‘कामशास्त्र’ के आधार पर…

  • शिवपुराण से शिव की महिमा पार्ट – 8

    शिवपुराण से शिव की महिमा पार्ट – 8

    नाग/सर्पों के भूषणधारी कोई न शिव सा परोपकारी   असितगिरिसमं स्यात् कज्जलं सिन्धुपात्रे सुरतरुवरुशाखा लेखनी पत्रमुर्वी। लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं तदपि तव गुणानामीश पारं न याति॥   अर्थ – हे शिव! यदि आपके अलौकिक गुणों का वर्णन स्वयं शारदा (सरस्वती)- समुद्र को दावात, काले पर्वत की स्याही, सुरतरु (कल्पवृक्ष) की टहनी की लेखनी एवं पृथ्वी…

  • शिवपुराण से न का अर्थ पार्ट 7

    शिवपुराण से न का अर्थ पार्ट 7

    न से नमः नमस्कार देवनगरी वर्णमाला में त वर्ग (त,थ,द,घ और न) का पाँचवा वर्ण है- न। न शब्द का उच्चारण स्थान दंत और नासिका है। बिना दांत के भोजन और बिना नाक के श्वास असंभव है। सभी प्राणी जगत को भोजन और वायु ग्रहण करने की व्यवस्था शिवकृपा से ही संभव है। न से…

  • शिवपुराण से शिवभक्त का सम्मान करें पार्ट – 6

    शिवपुराण से शिवभक्त का सम्मान करें पार्ट – 6

    शिवभक्त भी शिव का अंश है शिव जी के भक्त का सम्मान, करने से शिव जी बहुत प्रसन्न होते है, क्योंकि शिव में और शिव भक्त में कोई अन्तर नहीं होता। शिव भक्त साक्षात् शिव रूप ही है। हरिवंश पुराण एवं स्कन्द पुराण में कहा है कि जो लोग जीवन में शिवभक्तों का मन दुखाते हैं, खिल्ली…

  • पुराणों के मुताबिक भुवन कौन से है पार्ट-5

    पुराणों के मुताबिक भुवन कौन से है पार्ट-5

     सात पातालों के अंदर भी ऐश्वर्य है- अतलं वितलं चैव,  सुतलं च तलातलम्।  महातलं च पातालं,  रसातलमधस्तत:।। ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्मलोक अध्याय ७ पद १३ एवं श्री मद्भागवत में यही सातों लोक बताकर कहा गया है- एषेतु हि बिलस्थलेषु स्वर्गादप्यधिक।। स्कन्ध पुराण ५अ. २४.८।। ये सातों पाताल बिल भूमियाँ हैं, जिनमें स्वर्ग से भी अधिक ऐश्वर्य भोग है। अर्थात् ये…

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