राहु की शान्ति और धन की वृद्धि के लिए चन्दन लाजबाब है। निम्नांकित समान एकत्रित करके घर में बनाएं चन्दन तिलक
- (१) चन्दन मलया गिरी
- (२) चन्दन इत्र
- (३) केसर
- (४) रक्त चंदन पाउडर
- (५) अगर
- (६) हरिद्रा ब्राह्मी
- (७) शंखपुष्पी
- (८) गुलाब इत्र
- (९) जटामांसी
- (१०) बहु सुगन्धि
- (११) कपूर।
आप चाहें, तो उपरोक्त फार्मूले से बना amrutam Chandan ऑनलाइन मंगवा सकते है। काफी अच्छा है। हम भी काफी समय से उपयोग कर रहे हैं।
- गुगल या मीडिया पर दी गई कोई भी जानकारी में सन्दर्भ या पुस्तक, ग्रन्थ का नाम न हो उस बात पर बिल्कुल भी भरोसा न करें। गूगल पर बहुत सारा ज्ञान मनगढ़त पड़ा हुआ है।
- एक बात विशेष ध्यान देवें….बहुत पुरानी कहावत है…बिना विचार, जो करे-वह पीछे पछताय…
- चन्दन का त्रिपुंड माथे पर लगाने से मन शुद्ध ओर डिप्रेशन दूर होता है।
- अमृतम पत्रिका, ग्वालियर के अनुसार चन्दन लगाने से मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार ये चहरो बन्धन खुल जाते हैं। बुद्धि का क्रंदन दाँत होता है।
- चंदन तेल शरीर पर लगाने से काया कंचन सी हो जाती है।
- जैन धर्म सिद्धान्त के अनुसार यदि शुद्ध चन्दन का तिलक माथे पर लगाने के एक घण्टे बाद तक नहीं सूखे, तो काल नजदीक है यानि व्यक्ति की आयु कम बची है।
- शिवलिंग पर त्रिपुण्ड लगाने से आध्यात्मिक, आदि दैविक ओर आदि भौतिक तीनों परेशानियों से राहत मिलती है।
- कौटलीय अर्थशास्त्र:अधिकरण-२, प्रकरण-२७, अध्याय-११ में
- मलयागिरि चन्दन के एकादश गुण बताए गए हैं-
- लघु स्निग्ध अश्यान अर्थात चन्दन काफी समय तक सूखता नहीं है। चन्दन शरीर को घी की तरह चमका देता है
- चन्दन के चमत्कारी रोचक रहस्य जानने के लिए अमृतम कालसर्प विशेषांक का अध्ययन अवश्य करें। ये किताब 2004 ओर 2005 में ग्वालियर से छपी थी।
- चन्दन के सरल प्रयोग से राहु की अपार कृपा मिलती है। ये बिल्कुल सत्य बात है हमने आजमाया है।
- चन्दन राहु को बहुत भी ज्यादा प्रिय है।
चन्दन के बारे में २१ बातें दुर्भाग्य दूर करेंगी
- भगवान शिव का प्रतीक शिवलिंग पर चन्दन का त्रिपुण्ड लगाने का विधान शिवतन्त्र आदि अनेक ग्रन्थों में मिलता है।
- त्रिपुण्ड में तीन लकीरें होती हैं, जो त्रिदोष का सन्तुलित रखकर वात-पित्त-कफ विकारों को पनपने नहीं देती।
- हमारे तीनों काल शिवलिंग पर चंदन का त्रिपुण्ड लगाने से शुभकारी होते हैं।
- चन्दन गन्धसुख (सुगन्धयुक्त) होता है।
- ईश्वर प्रेरक भगवान से जोड़कर मन्त्र जाप में सहायक।
- चन्दन राहु ग्रह को अतिप्रिय है। यदि कालसर्प से पीड़ित कोई जातक रोज माथे पर चन्दन का त्रिपुंड लगाए, तो उस पर राहुदेव की कुदृष्टि हटने लगती है। ऐसा व्यक्ति कालसर्प दोष से मुक्त हो जाता है।
- रावण, राहु, हिरण्यकश्यप, हिरण्याक्ष, महर्षि अगस्त्य, पुलस्त्य, द्रोणाचार्य, गुरु परशुराम, ऋषि मार्केंडेय ये सब परम् शिव उपासक थे और सदैव चन्दन का त्रिपुंड धारण किया
- दक्षिण भारत में कालसर्प दोष की शांति के लिए प्रतिदिन राहुकाल में शिंवलिंगपर चन्दन का लेप किया जाता है।
- राहु को बारे में ज्यादा जानने के लिए
- अमृतम पत्रिका के पुराने ब्लॉग quora या गूगल पर पढ़ें.. ये सभी पढ़ने योग्य हैं।
- शिवरहस्योउपनिषद ग्रन्थ एवं शिवपुराण, अग्निपुराण, मसत्य पुराण के अनुसार 11 रुद्रों को अलग-अलग सुगन्ध प्रिय होने से भोलेनाथ की प्रसन्नता हेतु अमृतम चन्दन में मिश्रित की गये द्रव्य-घटक निम्नांकित हैं।
- केसर के फायदे….धार्मिक अनुष्ठानो में केसर का सर्वाधिक उपयोग करने की परम्परा वैदिक काल से चली आ रही है।
- माथे पर केसर का तिलक लगाने के होते हैं इतने फायदे….वैसे तो गुरु ग्रह की शांति, कृपा के लिए
- केसर का टीका माथे पर लगाना लाभकारी होता है। साथ ही धन वृद्धि के लिए
- माँ महालक्ष्मीजी का ध्यान कर केसर युक्त चन्दन का तिलक लगाने से सफलता शीघ्र मिलने लगती है। शुभ समाचार मिलते है।
- मुख्यद्वार पर शुद्ध केसर युक्त अमृतम चन्दन से स्वास्तिक बनाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- मात्र माथे पर केसर तिलक करने से पूरे तन में निखार आने लगता है। शिथिल नाड़ियों में ऊर्जा का संचार करने से यह यह स्वास्थ्यवर्धक भी है।
- ग्रह-नक्षत्र शांति हेतु भी चमत्कारी है।
- जटामांसी से लाभ…आयुर्वेद के एक प्राचीन शास्त्र भावप्रकाश में जटामांसी की बहुत ही ज्यादा प्रशंसा की गई है। मानसिक विकारों को मिटाने में जटामांसी के बराबर अन्य कोई द्रव्य दुनिया में दूसरा नहीं है।
- इसे त्रिकालद्रष्टा ऋषि चन्दन, केसर कपूर में मिलाकर उपयोग करते थे। यह सम्मोहन प्राप्ति में सहायक है।
- अभी और भी द्रव्य-घटक की जानकारी शेष है, जिसे अगले लेख में दी जाएगी
- फिलहाल तो कुछ समय मानसिक शांति के लिए स्नान के बाद अपने माथे पर तिलक या त्रिपुण्ड के रूप में 7 दिन लगाकर के चमत्कारों का अनुभव एवं एहसास करें।
चन्दन के रहस्य
- त्वगनुसारी से आशय है-त्वचा के भीतर शीतलता प्रदायक अनुल्बण अर्थात बिना फटा ओर फटी त्वचा को चमकाने वाला अविरागी यानि स्थायी गन्ध एवं वर्ण का गौर करने वाला। उष्णसह: मतलब- देह की अग्नि शांत कर ठंडक देने वाला दाहग्राही अर्थात- तनबकी गर्माहट शांत करने में सहायक सुखस्पर्श अर्थात- तन मन को सुखद अनुभव देकर मन हल्का करता है। मानसिक संताप नाशक।
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