अभ्यङ्ग के संग-जीवन के रंग
हमारे महान मुनि-महर्षि दिव्यद्रष्टा होने के नाते उन्होंने बच्चों को स्वस्थ्य बनाये रखने के लिए यह सब दिनचर्या (डेलीरूटीन) को व्यवस्थित बनाने के लिए प्राचीन शास्त्रों में लिख गए
कुछ विशेष उपाय ताकि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सके।
इस आर्टिकल में जानिए
बच्चों की मालिश के फायदे
घृतादष्ट गुणं तैलं मर्दने न तुभक्षणे।
तेल में घृत (घी) से आठ गुणा शक्ति है,
अंतर केवल इतना है कि घृत खाने पर गुणकारी है और तेल मालिश करने पर।
मालिश करने की विधि–
आयुर्वेदिक ग्रन्थ भैषज्य रत्नावली में इस प्रकार बताई गई है। सबसे पहले तेल नाभि में लगाना चाहिए। उसके बाद हाथों और पैरों के नाखूनों में। मालिश पैरों के तलवों की करने के बाद दोनों पैरों की पिंडलियों, जंघाओं, फिर दोनों भुजाओं, गर्दन, पीठ, पेट और बाद में सीने कि मालिश करनी चाहिए। पैरों, भुजाओं और पीठ की मालिश नीचे से ऊपर की ओर और पेट तथा छाती की मालिश हृदय से ऊपर की ओर करनी चाहिए। गर्दन की मालिश ऊपर से नीचे की ओर करने से लाभ होता है।
किस मौसम में कैसे करें मालिश–
ग्रीष्मकाल में शीतल छाया में तथा शीतकाल में धूप उपलब्ध हो सके, तो धूप में ही करनी चाहिए। शीतकाल में मालिश करते समय तेज शीतल वायु का ध्यान रखकर उक्त स्थिति में कमरे के अंदर मालिश करनी चाहिए। कानों में तेल डालने से वायु के रोग नहीं होते। पैर के तलुओं की मालिश करने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है। प्रतिदिन न हो सके, तो अवकाश के दिन अवश्य ही कायाकी तेल मालिश करनी चाहिए। वैसे मालिश करने में अधिक समय नहीं लगता। नहाने से कुछ समय पहले करके फिर और क्षौरकर्म के पश्चात स्नान किया जा सकता है।
कब नहीं करना चाहिए मालिश–
ज्वर-कास आदि रुग्णावस्था में मालिश नहीं करनी चाहिए तथा भोजन के बाद कम-से-कम तीन घंटे पूरे होने तक मालिश नहीं करनी चाहिए।
बच्चों की मालिश क्यों जरूरी है–
कायाकी (KAYAKEY) तेल से करें बच्चे की मालिश, हड्डियां रहेंगी मजबूत-
बचपन के शुरूआती दिनों में छोटे बच्चे की मालिश हर कोई करता है, ताकि इससे बच्चों की हड्डियां मजबूत बने और उनका तेजी से विकास हो।
लम्बी उम्र तक कोई रोग न सतावे।
बच्चों को अभ्यङ्ग करना बहुत लाभकारी होता है। इसी के साथ मालिश से बच्चे को आराम मिलता है, जिससे उसे अच्छी नींद आती है, जिसर दिमाग तेज होता है। अगर बच्चा सही समय और अच्छी नींद लेता है, तो सारा दिन खुश,क्रियाशील और चंचल रहता है।
जो मां अपने बच्चे की अच्छे से मालिश करती हैं, इससे उनकी त्वचा (स्किन) को पोषण मिलता है।
बाजारू तेलों से मालिश न करें–
अधिकांश माताएं कोई भी तेल से बच्चे की मालिश करना शुरू कर देती है। इतना ही नहीं बाजार से मिलने वाले तरह-तरह के सिंथेटिक बेबी ऑयल खरीद लेती है, जिनमें कई तरह के कैमिकल्स होते है, जो बच्चे की त्वचा (स्किन) को नुकसान पहुंचा सकते है। बच्चे की स्किन काफी नाजूक और सॉफ्ट होती है। उसके लिए सही तेल का चुनाव करना जरूरी है। ऐसे में नैचुरल ऑयल प्राकृतिक जड़ीबूटियों से निर्मित कायाकी तेल का इस्तेमाल करें। आज हम आपको कुछ ऑयल्स के बारे में बताएंगे, जो बच्चे को दिनभर एक्टिव रखेंगे।
कायाकी तेल का फार्मूला-
【1】जैतून का तेल
जैतून तेल त्वचा में जल्दी समाहित हो जाता है।
यह रंग साफ करने में सहायक होता है। इसकी मालिश से बच्चे की मालिश करने से उसकी स्किन को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता।
कायाकी तेल में इसे मिलाया गया है।
आजकल जैतून का उपयोग खाना बनाने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
【2】बादाम का तेल
हड्डियों को मजबूत बनाने में सजा कोई सानी नहीं है। बादाम तेल में विटामिन ई भरपूर होता है।
बच्चों को फुर्तीला बनाता है। ब्रेन को शार्प बनाता है। इसलिए बच्चे की मालिश के लिए इस तेल से निर्मित कायाकी तेल को ही चुने क्योंकि यह काफी फायदेमंद साबित होता है।
【3】केशर युक्त कायाकी तेल
कायाकी में मिलायम गया केशर इत्र बच्चों के फेफड़ों की रक्षा करता है। सर्दी-खाँसी से बचाता है। बच्चे की मालिश के लिए कायाकी तेल बहुत ही उम्दा हर्बल आयल है। यह तेल शऱीर को गर्म रखने का काम करता है। सर्दी, निमोनिया में बचाव के लिए इस तेल को ही इस्तेमाल करें।
क्या कहना है ग्रंथों का-
अभ्यंग-तेल मालिश के मन्त्र
अथ जातान्न पानेच्छो मरुतध्नैः सुगन्धिभिः। यथर्तुसंर्स्पश सुखैस्तैलैरभ्यंग माचरेत।।
सार्षपं गन्धतैलं यत्तैलं पुष्पवासितं।
अन्यद्रव्ययुतं तैलं न दुष्यति कदाचन॥
सरसों का तेल, सुगन्धित तेल, पुष्पवासित और अन्य द्रव्यों से युक्त तेल कभी वर्जित नहीं होता। तेलों में तिल का या सरसों का तेल मालिश करने के लिए भी अच्छा माना गया है।
स्नेहभ्यन्गा।था कुम्भ्श्चर्म स्नेह्विदर्मनात।
भाव्त्युपाँगो दक्षश्च दृढः क्लेशसहो यथा॥
तथा शरीर मभ्यन्गादृढं सुत्वक प्रजायते। प्रशान्तमारुताबाधं क्लेशव्यायामसंग्रहम॥
र्स्पशने चाधिको वायुः र्स्पशनंच त्वमाश्र तिम। त्वच्यश्च परमोभ्यंगस्तस्मात्तं शिल्येन्नरः॥
न चाभिघाताभिहतं गात्रमाभ्यंगसेविनः।
विकारं भजतेर्त्यथ बलकर्मणि व क्वचित॥
सुर्स्पशोपचितान्गाश्च बलवान प्रियदर्शनः। भवत्यभ्यंग नित्यत्वान्नरोल्पोजर एव च।
अर्थात्- जिस प्रकार स्नेह की मालिश से घड़ा, स्नेह की मालिश से चमड़ा, स्नेह तिक्तियो से युक्त गाड़ी का पहिया मजबूत आपत्ति सहने वाला है, उसी प्रकार शरीर में तेल अभ्यंग करने से वह सुन्दर चमड़ी वाला और मजबूत बनता है, वायुविकार शाँत रहते है तथा श्रम और क्लेश को सहने की क्षमता बनी रहती है।
मालिश के फायदे-
नित्य मालिश करने से मनुष्य कोमल स्पर्श, पुष्ट अंग वाला और बुढ़ापे में उसके लक्षणों की कमी होकर शरीर सुन्दर हो जाता है। तेल मालिश से आयु बढ़ती है तथा शरीर की काँति बढ़ती है। तेल का महत्व घृत से कम किसी भी स्थिति में नहीं है।
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