सांप काटने का इलाज क्या है?

  • आयुर्वेद में नाग काटने का इलाज अनेक ग्रन्थों में अपने अनुभव के आधार पर आयुर्वेदाचायों ने बताए हैं। ऐसा ही एक साधारण सरल उपाय से नाग, बिच्छू कभही घर में घुसते ही नही हैं।
    नागभय निवारण का आयुर्वेदिक रहस्य!
    • ऋषि आस्तिक का अमोघ मन्त्र!
      भारतीय आयुर्वेद और पुराणों में नाग-भय को केवल विष नहीं, बल्कि वात-दोष और भय-दोष से भी जोड़ा गया है।
      प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, कुछ विशिष्ट मन्त्र, औषधि और सुगंधों से ऐसा कंपन-क्षेत्र बनता है जो सर्प, बिच्छू और हानिकारक जीवों को दूर रखता है।
  • !!ॐ आस्तिक मुनिश्वराय नमःशिवाय!! यह मन्त्र किसी कागज या कपड़े पर केशर युक्त हल्दी से लिखकर अपने मुख्य दरवाजे पर टांग देंवें। जीवन में कभी भी नाग द्वार पर दस्तक देने नही आएंगे।
  • ऋषि आस्तिक नाग वंश के भांजे हैं…. इन्होंने महाभारत काल में नाग यज्ञ में नागों की रक्षा की थी। इसलिए इबके नाम का स्मरण या उपरोक्त मन्त्र के जाप से नागों का भय मिट जाता है।
  • माँ मनसा देवी के ये पुत्र हैं। इनकी मां मनसा शिव की मानस पुत्री है।
    • नाग धूप घर में बनाकर जलाएं…विषधर नागों को भगाने का यह सरल सा उपाय बताया गया है

गुडश्रीवासभल्लातं विडंगत्रिफलायुतम्। लाक्षार्कपुष्पप्रयुतश्च धूपोवृश्चिकसर्पह्रत्॥

  • अर्थात-गुड़, चंदन, वायविडंग, त्रिफला, लाख और मदार (अकौड़ा या अकौआ) के फूलों को (समान भाग में) मिलाकर धूप देने से (धुआँ करने से) सर्प और बिच्छू भाग जाते हैं।
  • विशेष – यह कोई तंत्र, मंत्र या पूजापाठ नहीं है। इन वस्तुओं के सम्मिलित धुएँ से घर से सर्प-बिच्छू तो भाग ही जाते हैं, अन्य प्रकार के भी जहरीले कीड़े-मकोड़े भी नहीं आते और यदि घर में होते भी हैं, तो मर जाते हैं।
  • ऋषि आस्तिक — नागों के रक्षक

    महाभारत काल में जब राजा जनमेजय ने सर्प-यज्ञ आरंभ किया, तब ऋषि आस्तिक ने अपनी प्रार्थना से नागों की रक्षा की।
    आस्तिक जी, माता मनसा देवी के पुत्र और नाग वंश के भांजे माने गए।
    इस कारण, इनका नाम स्मरण या मन्त्र-जाप आज भी “नाग-द्वेष निवारक” माना गया है।
    मन्त्र रहस्य -घर में नाग न आएं

    मन्त्र:
    ॐ आस्तिक मुनिश्वराय नमः शिवाय।

    यह मन्त्र केसर-युक्त हल्दी (केशर व हरिद्रा) से
    कपड़े या भोजपत्र पर लिखकर
    अपने मुख्य द्वार के ऊपर टांग दें।


    ऐसा करने से कहा गया है कि घर में न तो सर्प-प्रवेश होता है, न बिच्छू-दंश का भय रहता है।
    यह मन्त्र अग्नि-तत्व और नाग-तत्व के बीच सामंजस्य बनाता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें, तो
    हल्दी और केसर दोनों में कर्क्यूमिन और सैफ्रानल नामक जैव-सुगंधित तत्व होते हैं — जिनकी तीव्र गंध कई कीट-सरीसृपों को अप्रिय लगती है।
    सकारात्मक कम्पन – मन्त्र-जाप से उत्पन्न ध्वनि-तरंगें सरीसृपों की संवेदना को विचलित कर देती हैं।
    आयुर्वेदिक दृष्टि से, आस्तिक मन्त्र सर्प-भय से उत्पन्न आधिभौतिक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा-असंतुलन को शान्त करता है।

    श्रद्धा और मनोबल का चमत्कार

    जब व्यक्ति विश्वासपूर्वक मन्त्र-जाप करता है, तो मस्तिष्क में सेरोटोनिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन बढ़ते हैं,जो भय को घटाकर आत्म-विश्वास बढ़ाते हैं यही असली रक्षण-बल है।

    नागा न नश्यन्ति यत्र आस्तिकनामस्मरणं भवेत्।
    तत्र विषं न करालं स्यात्, शुभं भवति सर्वदा॥

    जहाँ आस्तिक नाम का स्मरण होता है, वहाँ नाग हानि नहीं करते, विष निष्क्रिय हो जाता है और शुभता फैलती है।

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