रूस को रसिया क्यों कहते हैं? क्या रूस के लोग भारतीयों जैसे रसिया होते हैं- एक बेहतरीन व्यंग्य ब्लॉग…

भारत के लोगों का हर तरह के रस एवं बनारस से बहुत ही गहरा सम्बन्ध है। रूस को रसिया भी बोलते हैं और हिंदुस्तान की 28 से 35 फीसदी आवादी रसिया प्रवृत्ति की है।

    • भारतीय जनजीवन केवल रसिया प्रवृत्ति के होने के कारण ही प्रसन्न रहता है। जिस दिन यहां रसिया लोग नहीं होंगे, भारत की पहचान खत्म हो जाएगी।
    • देश में इन रसिया लोगों के पास ज्ञान-विज्ञान का खजाना है। हर क्षेत्र का अनुभव है। हंसी- मजाक में इनका कोई सानी नहीं है।
    • रसिया सोच के प्राणी पल भर में कविता, शायरी कर सबका दिल जीत लेते हैं। ये रसिया हसियाने, बतियाने में माहिर होते हैं।
    • ये रसिया लोग स्त्रियों के प्रति तुरन्त आकर्षित हो जाते हैं। एक हिसाब से रूस की आबादी लगभग 15 करोड़ है और भारत की जनसंख्या 150 करोड़।
    • 150 करोड़ का 30 फीसदी के हिसाब से  कुल मिलाकर भारत में करीब 45 करोड़ रसिया हैं।
    • हमारे आंकलन से रूस को भारत में स्वयं को समाहित कर देना उचित होगा। वैसे भी दुनिया के सभी देशों में भारत रूस का सर्वश्रेष्ठ मित्र है।
    • रूस से हमारा गहरा नाता है। रूस कभी भारत का रक्षक, मित्र बेमौसम आपदाओं से बचाने वाला छाता था, आज भी है।
  • रूस को रसिया भी कहते हैं और जितने रसिया भारत में हैं, उतने रूस में भी नहीं होंगे। स्मरण रखें कि जो लोग भारत में रसिया प्रवृत्ति या रसिया विचारधारा वाले हैं, उन्हें कभी वहां जाने की जरूरत नहीं है।

वैसे भी रूस में इतनी ठंड पड़ती है कि उनका सारा रसियापन निकल जाता है। रूस को रसिया नाम देने वाला इंडिया पहला देश है।

  • राजकपूर ने रूस को अपने सिर जगह देकर एक फ़िल्म में गाना भी गया था। आप याद करके बताना।
  • रसिया लोगों की पहचान और विशेषताएं...याद रखें — रसिया आदमी के चर्चे ओर खर्चे बहुत होते हैं।
  • रसिया लोग केवल तीन जगह ही पाए जाते हैं- तन्हाई में, रजाई में और लुगाई के साथ। ये लोग सुंदर बने रहने के लिए नाई के पास भी ज्यादा जाते हैं। लिंग में ढिलाई नहीं आने देते। इनका योनि से कईं योनियों यानी जन्मों का नाता होता है।
  • देश के पहले रसिया थे-नेहरू…भारत में अल्प लोगों को पता होगा कि-नेहरू जी देश के पहले रसिया थे। नेहरू के रसियापन से प्रभावित होकर ही रूस ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया था और तब से आज तक रूस हमारा पक्का मित्र है।
  • नेहरू बचपन से ही इतने रसिया प्रवृत्ति के थे कि महिलाओं को निहारते रहते थे। गाँव में ऐसे व्यक्तियों को निहारु कहते हैं। बाद में यही निहारु दुनिया में नेहरू के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
  • देश को आजाद कराने में नेहरू की भूमिका…देश के लोग बहुत मुगालते में कि गांधी ने अहिंसा की दम पर भारत को स्वतंत्रता दिलवाई। बल्कि सही बात ये कि नेहरू के रसिया होने की वजह से अधिकांश अंग्रेज नेता, अधिकारियों की पत्नियां नेहरू से प्रभावित थी और उनके गहन ताल्लुकात भी थे। अवैध भी हो सकते हैं।
  • अंग्रेजों की अहमियत, अज्ञानता घटी….अंग्रेजों ने जब देखा कि हमारी औरतें नेहरू के चंगुल में फंसती जा रही हैं, तो वे भयभीत हो गए। क्योंकि अंग्रेजों का घर उजड़ जाता। इसी कारण वे देश छोड़कर चले गए और देश आजाद हुआ।
  • गांधी की आंधी एक षडयंत्र…महात्मागांधी भी महान थे, स्त्रियों की जान थे। ये भी बहुत बड़े वाले रसिया थे।
  • 76 की उम्र में 19 साल की आभा वीणा और कंचन नाम की युवतियों को नग्न होने को कहते हैं जिस पर ये लडकियों ने कहा…उन्हें बुड्ढे रसिया में कोई रुचि नहीं है।
  • 80 में भी लस्सी निकालने की उमंग थी…महात्मा का मन नहीं मरा था। 79 के अंतिम क्षणों तक गांधी आभा और मनु नामक महिलाओं के साथ एक साथ बिस्तर पर सोते थे। विश्वास न हो, तो गूगल पर सर्च करें। हमे भी ये ज्ञान गूगल पर मिला।

कैसे किया अर्थ का अनर्थ-!!अहिंसा परमो धर्मः!!श्रीमद्भागवत का एक श्लोक गांधी के कारण अधूरा पढा जाता है, जबकि पूर्ण श्लोक इस तरह से है-

  • !!अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तदैव च!! – अर्थात- अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है, किन्तु धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उससे भी श्रेष्ठ यानी बड़ा धर्म है!!

यह लेख व्यंग्यात्मक दृष्टि से लिखा है। इस पर वाद-विवाद न करें। अच्छी सकारात्मक टिप्पणी ही देंवें।

यूक्रेन की जबरदस्त जानकारी है जिसे आगे देंगे।

फिलहाल इतना समझ लें कि जब किसी के बहकावे में कोई अपना ब्रेन खराब करता है, तो उसकी हालत यूक्रेन जैसी होकर ट्रेन छूट जाती है।

  • 5500 साल पहले हुए महाभारत से एक ही ज्ञान मिलता है-

बुद्धि भ्रष्टम-कष्टम शरीरा,

चाहें खाओ ककड़ी, या खाओ खीरा।

सार यही है अपनी बुद्धि से काम लेवें। किसी की बातों में आकर अपने ब्रेन को यूक्रेन न बनाये अन्यथा उठाने के लिए क्रेन भी नहीं मिलेगी। प्लेन तो दूर की बात है।

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