झड़ते-टूटते, पतले बालों का शर्तिया इलाज
बेहाल, बिखरे बालों के बारे में
“अमृतम आयुर्वेद” के प्राचीन ग्रन्थ
【】भाव प्रकाश निघण्टु
【】आयुर्वेदिक निघण्टु
【】चरक सहिंता
【】सुश्रुत संहिनता
【】केशविकारम
【】केशधारणं
【】विपाक वा शक्ति
【】धन्वन्तरि निघण्टु आदि में
बालों को लम्बा , काला , घना , मुलायम
चमकदार तथा नए बाल उगाने वाली जड़ीबूटियों के काढ़े से बने हर्बल स्पा द्वारा अनेक देशी व घरेलू इलाज बताये गए हैं ।
कैसे आना शुरू होता है – गंजापन
अचानक बालों का झड़ना जो गंजेपन के एक या एक से ज़्यादा गोल चकत्तों से शुरू होता है और बढ़ता जाता है।
विज्ञान की भाषा में इसे
“एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया” भी कहा जाता हैं | इसके शुरूआती लक्षण दिखने पर लोग इसे नजरंदाज कर देते हैं लेकिन 30 की उम्र के बाद यह बहुत अधिक प्रभावी हो जाता हैं और धीरे-धीरे बाल झड़ने, टूटने लगते हैं जिससे खोपड़ी या सिर में गंजापन आना प्रारम्भ हो जाता हैं | शरुआत में यह गंजापन बगलों (सिर की साइड)से शुरू होता हैं जो कि खोपड़ी के पूरे बाल खत्म कर , चेहरा बिगाड़ देता हैं। जिससे खूबसूरती नष्ट हो जाती है।
वैज्ञानिकों का अनुसंधान –
गंजापन (Baldness) की स्थिति में सिर के बाल बहुत कम रह जाते हैं। गंजापन की मात्रा कम या अधिक हो सकती है। गंजापन को एलोपेसिया भी कहते हैं। जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से बाल झड़ने लगते हैं तो नये बाल उतनी तेजी से नहीं उग पाते या फिर वे पहले के बाल से अधिक पतले या कमजोर उगते हैं। इसके चलते बालों का कम होना या कम घना होना शुरू हो जाता है और ऐसी हालत में सचेत हो जाना चाहिए क्योंकि यह स्थिति गंजेपन की ओर जाती है।
क्या कहता है आयुर्वेद –
गंजापन से बचाव के लिए आयुर्वेद में कई प्रकार की ओषधियों का उल्लेख है।
आयुर्वेद की आधुनिक पुस्तकें
[] ओषधि चन्द्रोदय
[] आयुर्वेद सार संग्रह
[] वनोषधि विशेषांक,
[] जंगल की दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ
[] आयुर्वेदिक केशउपचार
[] बालों की प्राकृतिक चिकित्सा
आदि आधुनिक चिकित्सा पुस्तकों में भी बालों को झड़ने , टूटने ,पतले रूसी-खुजली
से बचाने के लिए ऐसी चमत्कारी आयुर्वेदिक चिकित्सा हैं जो आपके बालों की सभी बीमारियों को सिर की जड़ों से हमेशा-हमेशा के लिए मिटा देती हैं
देशी घरेलू आयुर्वेदिक उपाय-
घरेलू नुस्खों , देशी दवाइयों और घर में बनाये गये काढ़े (हर्बल हेयर स्पा) से बालों का झड़ना,टूटना
हमेशा के लिए बन्द हो जाता है ।
यह सब शुद्ध ओषधियां जँगलो
में पाई जाती हैं ।
भारत के बीहड़ों , घने वन में वास करने वाले
वनवासी ,आदिवासी , शहरिया जाति के लोग इन ओषधियों के बारे में बहुत ज्ञान रखते हैं।
पुराने समय में हमारी माँ एवं बुजुर्ग महिलाएं दादी ,नानी , बुआ , मौसी , ताई , चाची ,
के पास बालों की रक्षा करने वाली दवाओं की जानकारी उपलब्ध थी और आज भी है ।
जाने क्या है बालों का देशी इलाज –
प्राचीनकाल में परम्परा थी कि महिलाएं
◆ त्रिफला, ◆ विभितकी, {बहेड़ा}
◆ पान का रस, ◆ भृङ्गराज, ◆ शिकाकाई,
◆ मेहंदी, ◆ नारिकेल गरी, ◆ बादाम
◆ नागरमोथा, ◆ बालछड़ ◆ आँवला
◆ हरश्रृंगार के बीज, ◆ सीताफल के पत्ते,
◆ सागौन के बीज, ◆ हराधनिया,
◆ हरड़, ◆ नीम ◆ तुलसी ◆ रीठा ◆ मालकांगनी। ◆ गुड़हल के फूल ◆
◆ मैथीदाना, ◆ लोंकी के बीज,
◆ शमी के पत्ते एवं ◆ निम्बू छिलका
आदि अनेक रुखड़ियों को इकट्ठा करके
इन्हें कूटकर किसी मिट्टी के पात्र ( वर्तन) में
16 गुना पानी में 24 घण्टे के लिए
पहले अच्छी तरह गलाया जाता था।
अब जाने आगे की प्रक्रिया-
तत्पश्चात दूसरे दिन मंदी आँच अर्थात
मन्द-मन्द अग्नि में इसे 3 या 4 दिन
तक इसे उबाला जाता था।
हर्बल स्पा निर्माण का प्राचीन तरीका-
पक-पक कर जब पानी एक चौथाई रह जाता,एवं बहुत गाद जैसा गाढ़ा,काढ़ा
होने पर उसे 2 या 3 दिन तक ठंडा कर,
छानकर काँच की शीशी में भरकर रख
लेती थी ।
पुराने समय का यह देशी काढ़ा
ही आज के समय का
हर्बल हेयर स्पा है,
जिसे दुनिया में पहली बार अमृतम द्वारा
कुन्तल केयर हर्बल हेयर स्पा
के नाम से झड़ते – टूटते बालों को बचाने
के लिए तैयार किया गया है ।
उपयोग करने की विधि
1 – “कुन्तल केयर हर्बल हेयर स्पा“
रोज नहाने से पहले या बाद तथा
रात्रि में इस केशवर्द्धक आयुर्वेदिक
काढ़े (स्पा) को बालों की जड़ों में हल्के-हल्के हाथ से,उंगलियों के पोरों से लगाकर 2 से 4 घंटे के लिए बालों में लगा हुआ छोड़ देवें।
2 – कुन्तल केयर हर्बल शेम्पो
से बाल धोकर फिर, सुखायें। बाल जब अच्छी तरह सूख जावें, तो उसके बाद बालों को उंगलियों से सुलझाते हुए धीरे-धीरे कंघी करना चाहिए ।
यह थी प्राचीन भारत की पुराने समय में केश चिकित्सा एवं केश-विन्यास ।
बालों को बचाने वाली आयुर्वेदिक जैम (माल्ट)
इस जैम या चटनी को अमृतम आयुर्वेद की भाषा में अवलेह या माल्ट कहते हैं । ।
महिलाओं की मेहनत–
पुराने समय में महिलाएं केशवर्द्धक
ओषधि के रूप में जैम की तरह एक हर्बल चटनी बनाती थी , जिसे आयुर्वेदिक अवलेह कहा जाता था जिसमें-:
■ सेव फल का मुरब्बा,
■ आँवला का मुरब्बा
■ हरीतकी हलुआ , ■ छुआरा,
■ गुलाब के फूलों से बना गुलकन्द
■ बादाम की मिंगी ■ अखरोट
आदि को अच्छी तरह पीसकर
7 से 10 दिन तक देसी घी में सिकाई कर, कुछ उपरोक्त जड़ीबूटियों के काढ़े एवं गुड़ को मिलाकर 10 दिन तक हल्की आग में गाढ़ा होने तक पकाते थे, उसके बाद ठंडा होने पर
■ सोंठ, ■ कलिमिर्ची ,
■ इलायची, ■ तेजपत्र, ■ त्रिसुगन्ध,
■ कढ़ी पत्ते का पावडर ■ दालचीनी
पौष्टिक, प्रोटीन तथा विटामिन युक्त मसालों का मिश्रण कर रख लेते थे ।
हर्बल चटनी के रूप में यह प्राकृतिक दवा बालों की पेट के रोग , पाचन तंत्र (मेटाबॉलिज्म) की खराबी एवं अंदर से रोगों को उत्पन्न करने वाली तकलीफों को मिटाकर बालों की जड़ों में अंदरूनी ताकत प्रदान करने में बहुत ही विलक्षण है।
अनेक केशविकारों , बालों की बीमारियों जैसे:-
1- बालों का झड़ना-टूटना
2- बालों में जुंए-लीख पड़ना,
3- बालों का दोमुहें होना
4- बालों का झड़ना-
5- बालों का लगातार टूटना,
6- केश पतन,
7- बालों में रूसी होना (पालित्य)
8- गंजापन आना (खालित्य)
9- सिर में दर्द बने रहना दर्द
आदि बाल-व्याधियों , परेशानियों को
दूर करती है।
उपरोक्त देशी तरीके बना यह
कुन्तल केयर हर्बल हेयर माल्ट
बालों की जड़ों को मजबूत
बनाकर बालों को तेजी से बढ़ाता है। यह
आयुर्वेदिक ओषधि केशवृद्धि में सहायक है तथा तनाव रहित,मानसिक सुकून दायक है।
अमृतम का अमृत-
कुन्तल केयर हर्बल हेयर माल्ट
के नाम से निर्मित आयुर्वेद का यह प्राचीन योग
जैम की तरह हर्बल चटनी है जो बिखरे , रूखे-सूखे बेहाल बालों के लिए बेहतरीन है। -माल्ट का सेवन यह हजारों साल पुरानी पद्धति है ।
आदिकालीन केश चिकित्सा-
हर घर,हर गाँव में इस आयुर्वेदिक चटनी का सेवन प्रबुद्ध या अनपढ़ स्त्री,नवयौवना,महिलाएं,
रानी-महारानी,पटरानी व पुरुष
सभी किया करते थे ।
इस वजह से केरल अथवा साउथ की महिलाओं के बाल बहुत ही सुंदर,चमकीले तथा खूबसूरत व घने,काले,लम्बे होते हैं। आज भी इन बुजुर्ग महिलाओं को देखा जा सकता है ।
कुन्तल केयर हर्बल हेयर माल्ट
चटनी(अवलेह) की सेवन विधि–
सुबह खाली पेट रात्रि में सोते वक्त 2 से 3 चम्मच गुनगुने दूध या पानी से लेवें।
पेट की तकलीफें भी दूर हो जाएंगी।
क्या वर्षा जब कृषि सुखाने-
अर्थात- यह कहावत तो सबने सुनी होगी कि जब खेत में उपज या खेती सूखने के बाद बरसात हुई, तो “किसान” के किस काम की है।
हम समय पर सतर्क होकर अपने बालों का देशी इलाज कुन्तल केयर के साथ चालू कर दें, तो हमें भरोसा है कि
★ बालों को पुनः उगाया जा सकता है।
★ बालों का झड़ना-टूटना तत्काल रोका जा सकता है।
इसके 2 या 3 बार के उपयोग से रूसी-खुजली नष्ट हो जाती है।
हमारी नासमझी व लगातार लापरवाही की वजह से ही हम परेशान रहते हैं । वर्तमान युग में प्राकृतिक चिकित्सा हर्बल दवाओं को छोड़कर खुशबूदार केमिकल युक्त तेल, साबुन, शेम्पो का उपयोग कर रहे हैं जिससे
हमारे बालों की जड़े कमजोर हो जाती हैं।
बाल तेजी से झड़ने लगते हैं।
दुष्प्रभाव यह होता की प्रतिदिन गुच्छों के रूप में बेशुमार बाल टूटने लगते हैं।
बालों का शर्तिया देशी इलाज-
पूर्णतः केमिकल मुक्त,हानिरहित
एक शुद्ध हर्बल उत्पाद
“हेयर केयर वास्केट” जिसमें 4 तरह की
“केशवर्द्धक” दवा हैं।
【】कुन्तल केयर हर्बल हेयर माल्ट
(हर्बल चटनी),
【】कुन्तल केयर हर्बल हेयर ऑयल
【】कुन्तल केयर हर्बल हेयर स्पा,
No Chip-Chip हर्बल फार्मूला
(चिप-चिपाहट रहित आयुर्वेदिक काढ़ा)
【】कुन्तल केयरहर्बल शेम्पो
उपलब्ध हैं ।
यह योग बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है ।
कहते हैं कि-
जब मजबूत हों जड़े,
तो काहे को बाल झड़ें ।
कुन्तल केयर 5 से 7 दिनों में प्रभावी परिणाम दे देता है। फिर जीवन भर बालों के झड़ने-,टूटने की समस्या से मुक्ति पा सकते हैं ।
कुन्तल केयर के बारे में और भी जानने के लिए लॉगिन करें-
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आयुर्वेद अर्थात “No Side Effects”
बल्कि बहुत Side Benefits हैं।
कुन्तल केयर हर्बल हेयर
बालों की जड़ों को मजबूत
बनाने वाला हर्बल सप्लीमेंट है।
इसका कोई भी हानिकारक दुष्प्रभाव या
साइड इफ़ेक्ट नहीं है।
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