Category: Amrutam Daily Lifestyle

  • त्रिफला चूर्ण के फायदे !!

    त्रिफला चूर्ण के फायदे !!

    त्रिफला चूर्ण पूरी तरह हनिर्षित और निरापद ओषधि है। लेकिन एक बार में 3 gm से अधिक न लेवें। त्रिफला को सादे, गर्म पानी या दूध के साथ भी लिया जा सकता है। त्रिफला चूर्ण 100 से अधिक बीमारी मिटाता है। लिंक क्लिक कर पढ़ें। त्रिफला के बारे में संक्षिप्त में किस आयुर्वेदिक पुस्तक में…

  • लिंग की शिथिलता, ढीलापन दूर करने में चमत्कारी है Kumkumadi oil

    लिंग की शिथिलता, ढीलापन दूर करने में चमत्कारी है Kumkumadi oil

    लिंग पर सरसों का तेल नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि सरसों के तेल की तासीर ठंडी होने से लिंग की नाड़ियां शिथिल और ढीली होकर कमजोर पड़ने लगती हैं। माधव निदान के गुप्त विकार अध्याय के अनुसार लिंग पर केवल गर्म तिलाओं, गर्मी देने वाले द्रव्य घटक युक्त तेल भी लाभकारी रहता है। केशर, मालकांगनी, पदमकाष्ठ,…

  • आयुर्वेद के किस किताब या ग्रंथ में अश्वगंधा की जानकारी है !!

    आयुर्वेद के किस किताब या ग्रंथ में अश्वगंधा की जानकारी है !!

    अश्वगंधा ऊर्जा शक्ति और बुद्धि बल बढ़ाने में उपयोगी है। अश्वगंधा के फूल को पनीर ढोढ़ा कहते हैं, जो मधुमेह यानि डायबिटीज में विशेष कारगर ओषधि है। अश्वगंधा के 108 गुण, लाभ, फायदे जाने शतावरी को संस्कृत में सहस्त्रवीर्या कहते हैं ओर यह पुरुषों में वीर्य बढ़ाता है और प्रसूता स्त्री के स्तनों में दूध…

  • तंत्र, मंत्र, यंत्र की सिद्धि का सरल तरीका !!

    तंत्र, मंत्र, यंत्र की सिद्धि का सरल तरीका !!

    मूर्ख संग ना कीजिए, लोहा जलि ना तिराई। कदली सीप भुजंग मुख, एक बूंद तिहं पाई।। अर्थात मूर्ख की संगत नहीं करनी चाहिए, मूर्खों की संगत से केवल दुख, समस्या और अशांति ही मिलती है, जैसे लोहा जल पर नहीं तैर सकता है वैसे ही मूर्ख की संगत से कोई लाभ नहीं मिल सकता है।…

  • गैस की बीमारी ठीक करने में जल्दबाजी न करें !!

    गैस की बीमारी ठीक करने में जल्दबाजी न करें !!

    पेट में गैस तत्काल बनना शुरू नहीं होती। जब भोजन पचता नहीं है और काफी समय तक वह मल के रूप में एकत्रित होकर आंतों में चिपकने लगता है, तो गैस बनने लगती है। यह समस्या पेट की खराबी, कब्ज और लिवर के क्षतिग्रस्त होने से होती है। इस प्रक्रिया में 8 से 10 महीने…

  • कफ को संतुलित रखें अन्यथा जल्दी बुढ़ापा आ सकता है !!

    कफ को संतुलित रखें अन्यथा जल्दी बुढ़ापा आ सकता है !!

    शरीर में कफ की मात्रा अधिक होने से आलस्य आता है। स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है। किसी काम में मन नहीं लगता। भूख कम हो जाती है। मोटापा बढ़ने लगता है। चरक संहिता में 5 प्रकार के कफ जैसे- क्लेदक अवलम्बक बोधक तर्पक श्लेषक कफ दोष का विवरण मिलता है। कफ के असंतुलन से बुढ़ापा जल्दी…

  • सर्दी, जुकाम खांसी और कफ की समस्या पुरानी होने पर जवानी में ही बुढ़ापा आ जाता है !!

    सर्दी, जुकाम खांसी और कफ की समस्या पुरानी होने पर जवानी में ही बुढ़ापा आ जाता है !!

    खांसी आना स्वास्थ्य के लिए अच्छे संकेत हैं। शरीर में कफ के कारण ही चिकनाहट यानि लुब्रिकेंट बना रहता है। लेकिन कफ के आंतुलन से फेफड़ों में अनेक विकार, व्याधि पैदा हों जाती हैं। चरक सूत्र के एक श्लोक के अनुसार कफ सूखने के कारण ही जोड़ों, कमर, हाथ, पैरों में दर्द और अनेक वात…

  • शिलाजीत के फायदे। यह किस काम आता है ?

    शिलाजीत के फायदे। यह किस काम आता है ?

    शिला का अर्थ पर्वत, फाड़, हिमगिरि और योनि होता है। शिलाजीत को खाने वाले हिमालय जैसे पर्वत और यौन जेसी शिला पर फतह हासिल कर सकते हैं। शिलाजीत का उपयोग स्त्री, पुरुष कोई भी कर सकता है। द्रव्यगुण विज्ञान में शिलाजीत को महा शक्तिदाता द्रव्य बताया है। एक दिन में 100 मिलीग्राम लेना पर्याप्त रहता…

  • आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से बना मंजन गले के केंसर से बचाता है। विटामिन और प्रोटीन की पूर्ति के लिए माल्ट का सेवन करें !!

    आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से बना मंजन गले के केंसर से बचाता है। विटामिन और प्रोटीन की पूर्ति के लिए माल्ट का सेवन करें !!

    आयुर्वेदिक दांत मंजन लगभग सभी कंपनियां बनाती हैं। लेकिन ज्यादातर मंजन चाक, और गेरू में नाम मात्र की जड़ी बूटियां मिलाकर बनाते हैं, जो इतना कारगर नहीं होता। आयुर्वेद की 5000 वर्ष प्राचीन पद्धति से निर्मित मंजन में कम से कम 25 से 35 तरह के घटक द्रव्य मौजूद रहते हैं। मंजन हमेशा गले के…

  • वात रोगों को जड़ से दूर करने के लिए आयुर्वेद में 88 प्रकार की दवाएं हैं, जो ८८ वात विकारों को मिटा देती हैं !!

    वात रोगों को जड़ से दूर करने के लिए आयुर्वेद में 88 प्रकार की दवाएं हैं, जो ८८ वात विकारों को मिटा देती हैं !!

    वात रोग नाशक आयुर्वेदिक दवाइयां निम्नलिखित हैं। आंवला मुरब्बा, हरड़ मुरब्बा, वृहत वात चिंतामणि रस, त्रिलोक्य चिंतामणि रस, रासराज रस, योगेंद्र रस, एकांगवीर, महावात विध्वंसन रस, दशमूल, बला पंचांग, सहजन आदि 88 तरह के द्रव्य घटक ८८ वात रोगों को हमेशा हमेशा के लिए मिटा देते हैं। आयुर्वेदिक औषधियों की सबसे बड़ी खाशियत यह है…