चोबीस घंटे गरम पानी पीना सेहत के लिए अच्छा होता है ?

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■ क्यों पीना चाहिए सुबह सादा जल-

आयुर्वेद के कुछ प्राचीन नियमों पर
गौर करें। हमारे पूर्वजों की भी यही
परम्परा थी, तभी सौ वर्ष जीते थे-

क्या करें तन्दरुस्त रहने के लिए 16 खास जानकारी-

आयुर्वेद के अनेक ग्रंथो में जल
चिकित्सा का वर्णन आया है।
औषधि शास्त्र, रस रत्नाकर, शरीर शास्त्र, रक्ताभिसरण शास्त्र, रसेन्द्र मंगल,
कक्षपुटतंत्र एवं आरोग्य मंजरी आदि
आयुर्वेदिक पुस्तकों में उल्लेख है कि-
सुबह जब व्यक्ति सोकर उठता है, तो
उसकी जठराग्नि अर्थात पेट की गर्मी
तेज रहती है, इसलिए उठकर सदैव
सादा पानी पीने से उदर तथा शरीर
की गर्माहट शान्त हो जाती है,
जिससे शरीर में कभी अकड़न-
जकड़न नहीं होती। थायरॉइड
जैसे वात रोग नहीं सताते। इसलिए सुबह उठते ही सादा जल पीना ही श्रेष्ठ रहता है।

रात के भोजन पर विशेष ध्यान देवें—

■ रात को अरहर यानि तुअर
की पीली दाल न खाएं। यदि खावें, तो
दाल में देशी घी या मख्खन पर्याप्त मात्रा
में मिलाएं और भोजन के 2 घण्टे
उपरांत पानी अधिक पियें।

थोड़ी सी सावधानी बरतने से
आपकी जवानी बरकरार रहेगी।
बुढ़ापे में भी रोग-विकार आपसे
आने की इजाजत मांगेगा।

स्वस्थ्य वतन के लिए स्वच्छ तन,
प्रसन्न मन का होना आवश्यक है।

【१】प्रातःकाल सूर्योदय के समय
बिस्तर त्यागने की आदत डालें।
【२】सुबह उठते ही खाली पेट
कम से कम आधा से 1 लीटर सादा
पानी आराम से जरूर पियें।
【३】प्रतिदिन नहाने से पहले अभ्यंग
अवश्य करें। रोज अमॄतम ”

काया की तेल”
की मालिश कर स्न्नान से नाड़ियाँ शिथिल
नहीं होती। हमेशा फुर्ती बनी रहती है।
【४】बिना स्नान के बिस्कुट आदि
अन्न ग्रहण न करें।
【५】किचन में किच-किच (क्लेश)
और कीच यानि गन्दगी न करें।
【६】भोजन बनाते समय पंचतत्व
की शक्ति से परिपूर्ण पंचाक्षर
मन्त्र !!ॐ नमःशिवाय!! गुनगुनाते हुए
धीरे-धीरे मंदी आंच पर पकाएं।
【७】 आयुर्वेद की मृदा चिकित्सा
के मुताबिक भोजन यदि मिट्टी के पात्र
में बनाया जाए, तो उदर रोग, पेट की
परेशानी, गैस, वायु-विकार नहीं होते।
【८】 सुबह नाश्ते या खाने में मीठा
दही या लस्सी लेना शक्तिवर्द्धक होता है।
लेकिन रात्रि में दही न लेवें।
【९】आयुर्वेदिक ‘स्वास्थ्य विशेषांक’
के अनुसार-कभी नमकयुक्त दही न लेवें।
यह रक्त दोष या खून की खराबी
उत्पन्न करता है।
【१०】नमकीन दही कभी लेना हो,
तो दही का चार गुना पानी में नमक,
भूंजा जीरा, अजवायन आदि मिलाकर
मट्ठा बनाकर लेवें।
【११】भोजन को अन्न देवता मानकर
माँ अन्नपूर्णा का ध्यान कर,बहुत ही
आराम से बैठकर धीरे-धीरे ग्रहण करें।
【१२】खाना हमेशा बहुत चबा-चबाकर
ऐसे खाएं, जैसे पी रहे हों।
【१३】भोजन के 2 घण्टे बाद पानी
पीने से पाचनतंत्र मजबूत रहता है।
【१४】पानी हमेशा बैठकर ही पियें,
जिससे जोड़ों में दर्द नहीं होगा।
जल कभी जल्दबाजी में नहीं पियें।
【१५】जल को सदैव बड़ी तसल्ली से एक-एक घूंट करके ग्रहण करें। जैसे खा रहे हों।
【१६】दिन में न सोएं। रात को भोजन के बाद टहलते हुए गहरी सांस लेवे। सोते समय एक गिलास गुन-गुना पानी पियें, लेकिन सुबह उठते ही सादा पानी पियें। फिर, दिन भर सादा या गर्म पानी ले सकते हैं।

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