दुर्गोपासना और दुर्गा पाठ किस प्रकार करना चाहिए

 

दुर्गापाठ के समय रखें “७” बातों का ख्याल, तो हो जाएंगे मालामाल….
यत्रैतत्पठ्यते सम्यङ्
 नित्यमायतने मम।
सदा न तद्विमोक्ष्यामि 
सान्निध्यं तत्र में स्थितम
!!८!!
अर्थात-दुर्गा पाठ करते समय सही तरीके यानि सम्यक से अर्थ समझकर शुद्ध
उच्चारणपूर्वक पढ़ना चाहिए। पाठ करते
समय ब्राह्मण या साधक से त्रुटि न हो,
उच्चारण में अशुद्धि न हो। पाठ में प्रत्येक मन्त्र का यतार्थ समझकर पढ़ना प्रमुख
पूजा है।
आगे कहा गया है कि….
साधक या पाठक को दुर्गा पाठ करते
समय साधक या ब्राह्मण को इन छः
दोषों से भी रहितं होना चाहिए–
गीती शीघ्री शिर: कम्पी 
तथा लिखितपाठक:!
अनर्थज्ञाओsल्पकण्ठश्च 
षडेते पाठकाधमा:!
 
अर्थात-
दुर्गोपासना सप्तशती रहस्य में कहा है कि 【१】दुर्गा पाठ कभी गाकर न करें।
【२】पाठ करते समय शीघ्रता न करें।
【३】पाठ के समय भली प्रकार मेरुदण्ड यानि कमर को सीधा करके बैठे।
【४】अंग संचालन, बिल्कुल न करें।
【५】शिर का कम्पाना वर्जित है।
【६】मक्षिका स्थान मक्षिका की भांति दुर्गापाठ न पढ़े।
【७】गले में खराबी न हो।
महर्षि मार्केंडेय लिखते हैं कि यदि दुर्गा पाठ कंठस्थ हो, तो इसके फल तत्क्षण मिलते हैं।
पदाक्षर का उच्चारण बहुत ही स्पष्ट हो।
पाठ करते समय जल्दीबाजी न करें।
“शारदातिलकतन्त्रम”
में बहुत स्पष्ट लिखा है कि दुर्गा सप्तशती
का एक पाठ कम से कम एक पहर अर्थात तीन घण्टे में पूर्ण हो, इतनी तसल्ली से यह
पाठ होना सर्वफलदायक है। 
केवल 3 घण्टे का समय पाठ करने में लगाना चाहिए, तभी यह फलीभूत होता है।
जल्दबाजी में किया गया पाठ लाभ के स्थान पर हानि पहुंचाता है।
दुर्गासप्तशती का पाठ करने वाला विद्वान या ब्राह्मण मन्त्रो के रहस्यों का ज्ञाता हो।
 
जानताsजानता वापि… कृतम
देवी महाकाली का कथन है कि कोई विधि-विधान का ज्ञाता ही मेरी पूजा करें। बलि प्रदान और हवन करें अथवा जो कोई इस पूजा हवन के विधान को न भी जानता हो,
तो केवल मेरा ध्यान करे।
 नवरात्रि में प्रतिदिन 27 नक्षत्रों के
27 दीपक राहुकी तेल के जलाएं, तो भी मैं प्रेमपूर्वक उस पूजा को स्वीकारती हूँ।
दुर्गापाठ समापन के पश्चात कन्यायों को भोजन-मिष्ठान, फल आदि देवें तथा कन्यायों को देवी रूप मानकर टीका-तिलक कर पैर छूकर विदा करें।
अभी दुर्गा के रहस्य और भी शेष हैं
पढ़ते रहें अमृतम पत्रिका
 
 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अमृतम पत्रिका से जुड़ने के लिए अपना ईमेल  और व्हाट्सएप नंबर शेयर करे