मेनोपॉज से मुक्ति का आसान उपाय..

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  • मेनोपॉज महिलाओं की सुंदरता बर्बाद करने वाली समस्या है।
  • अतः 40 साल की उम्र से ही अमृतम नारिसौन्दर्य माल्ट और
  • Narisoundry Capsule का हमेशा सेवन करें, तो इस खतरनाक परेशानी से राहत पा सकती हैं।
    • क्या आयुर्वेदक औषधियों द्वारा रजोनिवृत्ति अर्थात मेनोपॉज को रोका जा सकता है?
    • यह समस्या 40 से 45 साल की उम्र वाली महिलाओं को होती है।

रजोनिवृत्ति का अर्थ है- मासिकधर्म या माहवारी के बन्द होना।

लेकिन किसी किसी स्त्री को यह समस्या बहुत कम उम्र ही होने लगती है।

  • रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज काल का प्रारंभ होने पर स्त्री के चित्त-मन में निरुत्साह, शरीर की शिथिलता,
  • निद्रा न आना, शिर में तथा शरीर के भिन्न भिन्न भागों में पीड़ा रहना,
  • अनेक प्रकार की असुविधाएँ, या बेचैनी होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

रजोनिवृत्ति अर्थात मेनोपॉज के 13 खास लक्षण…और उपचार क्या हैं-

 

    • रजोनिवृत्ति को अंग्रेजी में मेनोपॉज़ कहते हैं, जिसका अर्थ ‘जीवन में परिवर्तन’ है।
    • यह वास्तव में स्त्री के जीवन का पविर्तनकाल होता है
  1. शारीरिक कमजोरी अधिक होना।
  2. पेट से संबंधित समस्या होना।
  3. पाचनशक्ति कमजोर हो जाना।
  4. बहुत अधिक पसीना आकर, घबराहट होना।
  5. खूबसूरती नष्ट होना
  6. चेहरे पर दाग-धब्बे, काले निशान, झुर्रियां पड़ना।
  7. बुढापे के लक्षण दिखना
  8. सेक्स, सम्भोग से अरुचि होना।
  9. सिर में दर्द, चक्कर आना।
  10. स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाना।
  11. जी मिचलाना और उल्टियां आना।
  12. लगातार कब्ज की समस्या होना हो सकती है।
  13. इस समय में बहुत सी स्त्रियों को मानसिक तनाव, क्लेश, क्रोध होने लगता है।

एक प्राचीन ग्रन्थ भैषज्य रत्नावली में कुछ खास योगों का उल्लेख है-

  • कटिभाग क्षीणकर क्वाथ…नीचे चित्र देखें-यह महिलाओं की कमर की चर्बी दूर करने में असरदायक है।
  • इसके कुछ घटक नारिसौन्दर्य कैप्सूल में मिलाया गया है।

  • जो महिलाएं इस क्वाथ को घर में न बना सकें, वो कैप्सूल सुबह-शाम सादाजल से लेवें।

https://bit.ly/3vccY1Y

https://bit.ly/2Xd1tKY

चित्र में लिखे– आर्तव प्रवर्तक योग इसे घर पर भी बना सकते हैं।

यह 40 या 45 वर्ष की आयु में भी मासिक धर्म खुलकर एवं साफ लाने में सहायक है।

मेनोपॉज रोकने में सहायक है। जो नारियां अपनी माहवारी 55 वर्ष की उम्र तक लाना चाहती हैं, वे इसका योग का उपयोग करें।

अगर घर में बनान्त आसान न हो, तो हमेशा नारिसौन्दर्य माल्ट का सेवन करें।

आर्तव प्रवर्तक योग की बहुत सी ओषधियाँ नारी सौंदर्य माल्ट में मिश्रित की गई हैं।

एक प्राचीन दुर्लभ ग्रन्थ में रजोनिवृत्ति रोकने का एक अन्य उपाय लिखा है।

जिन महिलाओं को यदि अपनी माहवारी पुनः शुरू करने का मन हो, वे नीचे लिखे घरेलू प्रयोग कर सकती हैं

अथवा एक साल तक नारिसौन्दर्य माल्ट एवं कैप्सूल दोनों दवाओं का नियमित सेवन कर सकती हैं।

http://amrutampatrika.com

क्या है रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज…

आयुर्वेद के अनेकों ग्रन्थों में रजोनिवृत्ति को ही मेनोपॉज बताया है।

इसमें माहवारी आना बन्द हो जाती है।

मेनोपॉज के बाद महिलाओं की खूबसूरती खत्म हो जाती है।

इसके आगमन से चेहरे पर 4 चांद नहीं लगते, बल्कि चांद खाली दिखने लगती है।

सम्पूर्ण सन्सार में हर साल 18 अक्टूबर को मेनोपॉज डे मनाया जाता है। सन 2021 की थीम है-बोन हेल्थ….

स्त्रियों की सुंदरता को स्वाहा करने वाला यह मेनोपॉज विकार में 45 से 50 वर्ष की

महिलाओं में मासिक धर्म आना बंद हो जाता है, जिसे मेनोपॉज कहते हैं।

मेनोपॉज के बाद महिलाओं में अनेक समस्याएं होने लगती हैं उनमें से एक है

ओस्टियोपोरोसिस वात विकार यह हड्डियों को कमजोर करने वाली बीमारी है।

मेनोपॉज के बाद महिलाओं में महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के लेवल में कमी हो जाती है

जिससे हड्डियां कमजोर पड़ने लगती है।

मेनोपॉज में कई अन्य लक्षण भी आते हैं जैसे घबराहट बेचैनी और ज्यादा पसीना आना, संक्रमण होना,

शरीर में बैक्टीरिया का फैलना ऐसे में कोई भी हर्बल नारी सौंदर्य औषधि लेना बहुत जरूरी रहता है।

नारिसौन्दर्य माल्ट एवं कैप्सूल

एस्ट्रोजन कैल्सीटोनिन हार्मोन का उत्पादन बढ़ाता है

और पैराथायराइड ग्रंथियों के प्रति बॉन मास की सेंसिटिविटी को कम कर ऑस्टियोजेनेसिस को बनाए रखने में मदद करता है।

नारी सुंदर मार्ट में मिलाया गया गाजर का मुरब्बा मैनोपोज के लिए सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि बताई गई है

इसका भाव प्रकाश निघंटु नामक ग्रंथ में काफी अच्छा वर्णन है।

 जाने नारिसौन्दर्य माल्ट & कैप्सूल के 6 जबरदस्त फायदे..

https://bit.ly/2Xd1tKY

  1. नवयुवतियों को होने वाले लिकोरिया, श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर, अनियमित माहवारी की परेशानियों को दूर करने में कारगर है।
  2. सोमरोग यानि पीसीओडी जैसा खतरनाक रोगों से राहत दिलाता है।
  3. रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज से बचने के लिए इसे 40 के पार की स्त्रियों को तुरन्त लेना शुरू कर देना चाहिए।
  4. नारिसौन्दर्य माल्ट और कैप्सूल सुंदरता वृद्धि में एक चमत्कारी आयुर्वेदक ओषधि है।
  5. अगर मासिक धर्म की खराबी से बजयनकर बाल झड़ रहे हों या कोई केशविकार हो, तो नारिसौन्दर्य माल्ट एवं कैप्सूल के सेवन से बहुत लाभ होता है।
  6. नारिसौन्दर्य शरीर की चर्बी भी जलाता है यदि इसे गर्म पानी से लगातार लिया जाए, तो यह मोटापा घटाकर गजब की खूबसूरती बढ़ाता है।
  7. रजोनिवृत्ति होने पर स्त्री के शरीर में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के पविर्तन होने लगते हैं।
  8. बहुधा ये परिवर्तन इतनी धीमी गति से तथा अल्प होते हैं कि स्त्री को कोई असुविधा नहीं होती, किंतु कुछ स्त्रियों को विशेष कष्ट होता है।
  9. बहुतों के शरीर में स्थूलता आ जाती है। आनुवंशिक या वैयक्तिक उन्माद की प्रवृत्तिवाले व्यक्तियों को उन्माद, या पागलपन होने की आशंका रहती है। अन्य प्रकार के मानस विकास भी हो सकते हैं।
  10. प्रजनन क्रिया समाप्त होने के पश्चात्‌, प्रजनन अंगों में अर्बुद होने का भय रहता है।
  11. डिंबग्रंथि और गर्भाशय दोनों में अर्बुद उत्पन्न हो सकते हैं।
  12. गर्भाशय में घातक और प्रघातक दोनों प्रकार के अर्बुदों की प्रवृत्ति होती है।
  13. मासिकधर्म की गड़बड़ी कैंसर का सर्वप्रथम लक्षण है। अधिक मात्रा में स्राव होना, सौत्रार्बुद (fibroid) का द्योतक है।
  14. उदर के आकार की वृद्धि का कारण अर्बुद हो सकता है। इस समय गलगंड, या घेंघा या goitre उत्पन्न होने की संभावना रहती है।
  15. भिन्न-भिन्न स्त्रियों में रजोनिवृत्ति भिन्न भिन्न प्रकार से होती है। किस में मासिकधर्म अकस्मात्‌ बंद हो जाता है। कुछ में धीरे धीरे, एक या दो वर्ष में बंद होता है।

आयुर्वेद के अनुसार क्या है मेनोपॉज

      • साधारणतः लड़की या कन्याओं को 13 या 15 की उम्र में आने लगता है।
      • गर्म जलवायु जिस जगह होती है, उन ऊष्ण प्रदेशों में 10 से 12 वर्ष की आयु में भी मासिकधर्म प्रारम्भ हो जाता है। जिसका अर्थ है कि कन्या गर्भधारण के योग्य हो गई है।
      • मासिकधर्म चालू होने से लेकर 45 से 50 वर्ष की आयु तक साधारणतया हर नारी को प्रत्येक 28वें दिन माहवारी होती रहती है।
      • प्रत्येक मास में एक बार डिबग्रन्थि से एक डिंब परिपक्व होकर बाहर निकलता है और डिंबवाहिका नली में शूक्राणु द्वारा संसेचित होकर गर्भाशय में आकर गर्भ बन जाता है।
      • जब डिंबग्रंथि में परिपक्व डिंबों का क्षरण बंद हो जाता है, तब मासिकधर्म भी बन्द हो जाता है।
      • डिंबग्रंथि में जो अन्तःस्राव बनते हैं, वे ही डिंब के परिपक्व होने के बाद अण्डोत्सर्ग यानि ovulation गर्भस्थापना और गर्भवृद्धि के कारण होते हैं।
      • डिंबग्रंथि के सक्रिय जीवन के समाप्त होने पर इन स्रावों का बनना निसर्गतः बंद हो जाता है।
      • रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज इसी का सूचक तथा परिणाम है।
      • ओनली ऑनलाईन उपलब्ध

http://amrutam.co.in

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