नामर्दी, नपुंसकता, शीघ्रपतन जड़ से मिटाने वाली भयंकर चमत्कारी ओषधि मिल गई। 26 फायदे जानकर हो जायेंगे हैरान!

अश्वगंधा, शतावर, सफेद मूसली, शिलाजीत, कोंच के बीज, ताल मखाना, मधुयाष्टि आदि वाजीकरण जड़ी बूटियां हैं, जो जड़ से पुरुषों के सभी गुप्तरोग हमेशा के लिए खत्म कर देती हैं।  मात्र तीन माह सेवन कर, 70 में बिस्तर तर कर सकते हैं।

पुरुषार्थ वर्धक इस ओषधि का नाम अश्वगंधा है।

  • विशेष इस लेख में केवल अश्वगंधा और उसके पत्तों के गुण के बारे में 12 प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार बता रहे हैं। सेक्स के रोचक रहस्य भी जाने
  • आयुर्वेद के सर्वाधिक प्राचीन ग्रन्थ भावप्रकाश निघण्टु एवं द्रव्यगुण विज्ञान में अश्वगंधा के पत्ते, जड़, तन कादि पञ्चाङ्ग के गुण, उपयोग तथा फायदे के विषय में बहुत विस्तार से बताया गया है।

संस्कृत श्लोकनुसार अश्वगंधा के कार्य

गन्धाता वाजिनामादिरश्वगन्धा हयाह्वया।

वराहकर्णी वरदा बलदा कुष्ठगन्धनी।।

अश्वगन्धाsनिलश्लेष्मश्वित्रशोथज्ञयापहा।

बल्या रसायनी तिक्ता कषायोष्णाsतिशुक्रला।।

  • अर्थात- अश्वगन्धा की जड़ पत्ते देह के लिए बाबा वैद्यनाथ का वरदान हैं। यह स्त्री पुरुष दोनों के लिए बलदायी बूटी है।

अश्वगंधा का अर्थ

  • अश्व यानी घोड़े के खुर जैसी गन्ध के के कारण इसे अश्वगन्धा कहते हैं। यह वीर्यवधक तथा बाजीकारक होता है।

श्लोक के मुताबिक अश्वगंधा के गुण-लाभ

  • उष्णवीर्य यानी वीर्य में गर्मी लेकर सहवास समय में वृद्धि करता है। यह अत्यंत शुक्रवर्धक अर्थात वीर्य का निर्माण करता है। यह एक बेहतरीन रसायन है। वात-पित्त तथा श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) की समस्या से राहत देता है।
  • ध्यान रखें आयुर्वेद की कोई भी ओषधि कम से कम तीन महीने तक लेना जरूरी है अन्यथा स्पष्ट लाभ समझ नहीं आता!

अश्वगंधा की विशेषताएं और चमत्कारी २६ गुण फायदे-

  1. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर शारीर की सभी दुर्बलता, कमजोरी, मानसिक बैचेनी दूर करता है।
  2. जवानी बरकरार रखने मे अश्वगंधा बेजोड़ है। इसके नियमित सेवन से झुर्रियां, कम्पन्नता मिट जाती हैं।यह प्राकृतिक उम्ररोधी अर्थात एंटीएजिंग, शक्तिदाता, ऊर्जा, एनर्जी दायक बूटी है। बुढापा जल्दी नहीं आने देता।
  3. अश्वगन्धा पुरुषों की 50 तरह की बीमारी, गुप्तरोग नाशक और अंदरूनी कमजोरियों को दूर करने में सहायक है। यह वीर्य-शुक्राणु-शक्तिवर्धक चूर्ण है।
  4. अश्वगंधा मर्दाना ताकत, यौन क्षमता, रतिक्रिया की समय सीमा को बढ़ाने में जबरदस्त ओषधि है।
  5. नवीन वीर्य का निर्माण कर शुक्र को गाढ़ा करता है, जिससे शुक्राणुओं की गुणवत्ता, मात्रा, संख्या में इजाफा होता है।
  6. सेक्स पावर पुरुषत्व बढ़ाने का कारगर तरीका यदि आप वीर्य वृद्धि, मर्दाना ताकत बढ़ाने एवं शिश्न/लिंग/पेनिस को कठोर, लम्बा करना चाहते हैं, तो अमृतम अश्वगन्धा चूर्ण 2 ग्राम एवं एक चम्मच अमृतम बी फेराल गोल्ड माल्ट दोनों को मिलाकर BFERAL GOLD CAPSULE सहित सुबह-शाम दूध के साथ 1से 3 महीने लगातार लेने से व्यक्ति सेक्स के मामले में फौलादी मर्द बन जाता है। शीघ्रपतन, नपुंसकता, नामर्दी, लिंग की शिथिलता जड़ से मिट जाती है।
  7. इस बूटी में से अश्व यानि घोड़े की गंध आने के कारण इसे अश्वगंधा कहा जाता है। इसके सेवन से व्यक्ति में अश्व शक्ति का संचार होने लगता है।
  8. आयुर्वेद की ताकतवर, बाजीकरण दवाओं में इसका विशेष उपयोग किया जाता है। इसे ‘इंडियन जिनसेंग’ या विंटर चेरी भी कहा जाता है।
  9. अश्वगंधा प्राचीन काल से आयुर्वेद में उपचार होने वाली एक कारगर औषधि है। सतयुग से इसका उपयोग कई गंभीर बीमारियों के लिए किया जाता रहा है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार अश्वगंधा चूर्ण से कई शारीरिक समस्या दूर हो जाती हैं। इसके सेवन से वीर्य गाढ़ा होता है। अश्वगंधा उन वैवाहिक पुरुषों के लिए रामबाण है।
  10. अश्वगंधा के अनेक फायदे हैं। कमजोरी, हीनता, नपुंसकता, शीघ्रपतन, शुक्राणु अर्थात वीर्य की कमी या न कम बनने में इसे मिश्री के साथ मिलाकर खिलाते हैं। इसका प्रयोग कई प्रकार के रोगों के उपचार में किया जाता है। अश्वगंधा का सेवन मुख्यत इसके चूर्ण के रूप में किया जाता है।
  11. बुद्धि की शुद्धि के लिए असरकारी- अश्वगंधा को दिमाग के लिए फायदेमंद कहा जाता है।मनुष्य के शरीर की बहुत सारी परेशानियों को दूर करने के लिए अश्वगंधा एक चमत्कारी औषधि के रुप में इसकी जड़ का उपयोग किया जाता है।
  12. अश्वगंधा भारत की बेहतरीन खोज है। यह मर्दाना शक्ति दायक एक चमत्कारी हर्ब होने के कारण इसे आयुर्वेद में अहम् सम्मान प्राप्त है- क्योंकि अश्वगंधा प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर है।
  13. मानसिक क्लेश, स्नायु मंडल की कमजोरी, तनाव को खत्म कर दिमाग की शिथिल और कमजोर नसों को ताकत देता है।
  14. मस्तिष्क की रक्त नाड़ियों में खून का संचार नियमित बुद्धि को तेज करने में कारगर है।
  15. शारीरिक थकावट, आलस्य, सुस्ती, अनिद्रा यानि नींद ना आने की समस्या, सिरदर्द, माइग्रेन मिटाता है।
  16. तनाव, चिंता, डर, भ्रम, थकावट, नींद की कमी जैसी समस्यों का कारगर इलाज है।
  17. अश्‍वगंधा स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल के लेवल को कम करता है, जिससे स्ट्रेस कम होता है।
  18. गंभीर अवसादग्रस्त यानि डिप्रेशन से पीड़ित का इलाज भी अश्वगंधा से संभव है। इसे अल्ज़ाइमर के उपचार के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  19. एंटीइंफ्लामेट्री गुणों की वजह से ये कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड लेवल को कम करता है।
  20. आयुर्वेद में मधुमेह नाशक दवाओं का यह मूल घटक है। डायबिटीज़,ब्लड शुगर को सन्तुलित करता है।
  21. इंसुलिन सेंसिटिविटी को मसल्स सेल्स में सुधार और पुरुषों में मसल्स मास को बढ़ाकर, बॉडी फैट्स कम करता है
  22. अश्वगंधा शरीर की जलन, बेचैनी और सूजन में राहतकारी है।
  23. अश्वगन्धा शरीर की सूजन, ग्रन्थिशोथ, क्षय, टीबी, बालशोथ, सुखण्डी रोग दूर करने वाली ओषधि है।
  24. स्त्रियों के कटिशूल, सोमरोग पीसीओडी श्वेतप्रदर आदि विकारों में इसे घी घृत में गर्म कर दूध, मिश्री के साथ देते हैं।
  25. शोथ, सूजन, थायराइड और वातरोग को कम करने में मददगार है। गठिया और मधुमेह की बीमारियों को कम कर हड्डियों को मजबूती तथा मांसपेशियों को बढ़ाने में लाजवाब है। अश्वगंधा जोड़ों के दर्द और कमरदर्द के लिए फ़ायदेमंद है।
  26. अश्वगंधा नई कैंसर सेल्स को बनने से भी रोकता है। एक शोध के अनुसार अश्‍वगंधा कैंसर के कारण होने वाली कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव को कम करने में सहायक है।

अश्वगंधा के पत्तों से ये होते हैं 5 लाभ-

  1. जख्म, घाव आदि तकलीफ में अश्वगंधा की जड़ों को पीसकर घाव पर लगाने से जल्दी भरता है।
  2. अश्वगंधा के पत्तों का लेप एग्जिमा, खाज, खुजली, फुंसी एवं त्वचा, चर्म/स्किन के रोगों दूर करता है।
  3. अश्वगन्धा के पत्ते दूध में अच्छी तरह उबालकर ही लेना हितकारी है। इसके जड़, पत्ते व पंचांग के उपयोग किया जाता है।
  4. फोड़ा, सूजन, गांठों के ऊपर अशगन्ध के पत्तो का लेप करने से लाभ होता है।
  5. आमवात में इसके ताजे पत्ते बंधने से तुरन्त राहत मिलती है।
  6. अश्वगंधा पत्तों की सेवन विधि-
  • एक से 2 अश्वगन्धा पत्ते साफ धोकर पीसकर सुबह खाली पेट मीठे दूध के साथ 3 से 5 माह तक नियमित लेवें।
  • अश्वगंधा के पत्तों का काढ़ा शरीर को बीमारियों से बचाने के अलावा दिमाग और मन को भी स्वस्थ रखती है।
  • आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि अश्वगंधा के पत्तों का इस्तेमाल कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। यह बहुत सी गुप्त रोगों एवं दैहिक, दैविक बीमारियों के लिए रामबाण है। किसी चिकित्सक की सलाह लेवें।

अश्वगंधा के विभिन्न नाम और प्रकार

  • अश्वगंधा को हिंदी में इसे असगंध, अश्वगन्धा नागोरी, बंगाल में आस्कन्द, ढोरगुंज, गुजराती में आसन्ध, कन्नड़ में अंगरवेरु, तेलगु में पैन्नेरुगड्ड, फ़ारसी में बेहमनबरी और अंग्रेजी में अश्वगंधा को विन्टरचेरी और विथेनिया सामनिफेरा कहते हैं।
  • असगंध दो तरह का होता है-जंगली अशगन्ध अवसादक, मूत्रजनक, पसीना बढ़ाने वाला होता है। जंगली असगंध का प्रभाव ह्रदय पर न होकर मात्र वात नाड़ियों पर होता है और कामोत्तेजना बढ़ती है। इसके सेवन से धतूरे जैसा नशा का आभास होता है।
  • दूसरा है नागोरी असगंध। खाने हेतु नागोरी ही लेना चाहिए।

अश्वगंधा के रसायनिक संगठन-

  • अशगन्ध की जड़ में उड़नशील तेल रवेदार विथेनियाल c२५, h३५, 0५ नामक पदार्थ, हेन्ट्रीयाकान्टेन, फाइटोस्टेरॉल तथा तेल ये घटक मुख्य होते हैं।
  • अमृतम की एकल ओषधि श्रंखला का यह ब्रांडेड उत्पाद है, जो अमृतम अश्वगंधा चूर्ण के नाम से ओनली ऑनलाइन उपलब्ध है।
  • नीचे अश्वगन्धा के बारे में दिया चित्र एक अति प्राचीन ग्रन्थ से लिया गया है।

घोड़े जैसी मर्दाना ताकत पाने का सरल उपाय-

  • अश्वगन्धा, श्तावार, सफेद मूसली, शिलाजीत, कोंच के बीज से निर्मित एक प्राचीन योग बी फेराल गोल्ड माल्ट और कैप्सूल जिसे सेक्सुअल पॉवर बढाने हेतु प्राचीनकाल में राजा महाराजा लिया करते है।

B Feral Gold Malt & Ashwagandha

MRP ₹ 2,218 (Inclusive of all taxes)

  • This combo pack contains B. Feral Gold Malt and Ashwagandha Churna
  • B. Feral Gold Malt can boosts men’s stamina, improves immunity. This malt contains Safed Musali, Ashwagandha, Trikatu, Rajat Bhasma and Vanga Bhasma. This herbal immunity booster for men can help in increasing testosterone levels and also is helpful in preventing premature ejaculation.
  • Additionally, it is helpful in preventing nightfalls and boosts libido.
  • Ashwagandha Churna is a 100% natural Ayurvedic churna that can help boost stamina. ‘Ashwa’ in Ashwagandha means ‘horse’ and as per the book, Bhav Prakash Nighantu, which contains the age-old Ayurvedic formulations, the churna gives ‘stamina of that of a horse.’ Amrutam’s single herb churna is a rejuvenating herb that boosts vigor, vitality and endurance.
  • मर्दाना शक्ति, ताकत तथा पुरुषार्थ वृद्धि के लिए केवल अश्वगन्धादि चूर्ण घर में ही बनाकर 2 से 3 ग्राम पाउडर, एक चम्मच अमृतम बी फेराल गोल्ड माल्ट 200 ml दूध के साथ दो बार 3 महीने तक नियमित लेवें।

कामसूत्र’ की कुछ अनजानी बातें

अन्योन्य अनुबद्धं परस्परस्य

अनुपघातकं त्रिवर्गं सेवेत। (कामसूत्र १.२.१)

बाल्ये विद्याग्रहणादीन् अर्थान् (कामसूत्र १.२.२)

कामं च यौवने (१.२.३)

स्थाविरे धर्मं मोक्षं च (१.२.४)

  • संस्कृत के पुराणोक्त इन श्लोकों का सार अर्थ यही है कि पुरुष को सौ वर्ष की आयु को तीन भागों में बाँटकर बाल्यकाल (बचपन) में विद्या. युवावस्था में अर्थ (धन-सम्पदा) का अर्जन अर्थात कमाई या संग्रह करना चाहिये,
  • काम (सेक्स) की पूर्ति या तृप्ति यौवनकाल में तथा बुढ़ापे में धर्म और मोक्ष का अर्जन करना चाहिये।
  • अश्वगंधा चूर्ण, बी फेराल गोल्ड माल्ट और B Feral Gold कैप्सूल तीनों दवाएं खाएं, तो देंगे दुआएं।
  • तेरह 13 फायदे जानकार हो जायेंगे हैरान
  1. पुरुषों में सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन में कमी,
  2. शीघ्रपतन होना बहुत कम या बिना वीर्य के स्खलन (Retrograde ejaculation) होने की समस्या,
  3. यौन चरमोत्कर्ष (Orgasmic disorder) तक पहुंचने में अवरोध।
  4. वीर्य का सुखना, पतला होना।
  5. नामर्दी, नपुंसकता, लिंग का ढीला होना
  6. इरेक्टाइल डिसफंक्शन
  7. उत्तेजना संबंधी समस्याएं (Arousal difficulties)
  8. सम्भोग से अरुचि या कामेच्छा में कमी
  9. धीमा या देर से स्खलन की समस्या (Retarded or inhibited ejaculation)
  10. अवांछित, लगातार इरेक्शन (Priapism)
  11. सेक्स के लिए जुनून (Compulsive sexual behaviour)
  12. बांझपन, इनफर्टिलिटी पार्टनर को है यौन समस्या, तो बी फेराल जैसे जबरदस्त बाजीकरण की शक्ति से करें उनकी मदद
  13. परिवार में बांझता इन्फर्टिली के बढ़ते मामलों के चलते, यौन रोग से निपटने के लिए B Feral की बाजीकरण शक्ति के साथ ठीक किया जा सकता है।

सेक्स के समय स्त्रियां क्या चाहती हैं

स्त्रियों को मर्दों के मुकाबले संतुष्ट होने में ज्यादा समय लगता है।

अनुभवी काम शास्त्रियों के अनुसार एक महिला लगभग 25 से 30 मिनट के लगातार सेक्स से संतुष्टि हो पाती है।

अगर कोई मर्द सम्भोग के समय आधा घण्टे का भोग नहीं लगा पा रहा हो, तो तत्काल बी फेराल गोल्ड माल्ट, अश्वगंधा चूर्ण और कैप्सूल 2 से 3 महीने दूध के साथ लेना शुरू करें।

यह आयुर्वेदिक औषधि सेक्स की समय सीमा बढ़ाकर वीर्य को गाढ़ा करने में कारगर है।

शीघ्रपतन की शिकायत का मुख्य कारण है – जल्दबाजी

  • आजकल खुले बाजार इंटरनेट, गुगल आदि में विज्ञापन की दम पर बिकने वाले तथा तत्काल या तुरन्त फायदा पहुंचाने वाले उत्पादों से आंतरिक मर्दाना शक्ति क्षीण होने लगती है। इनसे 1 या 2 दिन के लिए बहुत चमत्कारी फायदा, तो होता है, फिर ये पुरुष किसी लायक नहीं रहते।
  • एलोपैथिक दवाओं के दूरगामी परिणाम मर्द को दर्द देने वाले होते हैं।
    • सेक्स करते समय लम्बे समय तक रुक नहीं पाने अथवा वीर्य शीघ्र गिर जाने को कहते हैं –शीघ्रपतन!

सेक्स के मामले में यह शब्द वीर्य के स्खलन यानि जल्दी डिसचार्ज के लिए प्रयोग किया जाता है। किसी भी आदमी का उसकी इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित (डिस्चार्ज) हो जाता है। एक प्रकार से यह नपुंसकता की शुरुआत है।

शीघ्रपतन का स्थाई इलाज आयुर्वेद में ही मुमकिन है

  • ध्यान रखें कि पुरुषार्थ शक्तिवर्धक एवं बाजीकरण दवाएं केवल आयुर्वेद की काम करती हैं। शेष रसायनिक कैप्सूल आदि कुछ समय के लिए या किसी स्त्री को सेक्स से रिलेक्स दिलाने हेतु ठीक हैं।
  • शीघ्रपतन और नपुंसकता के लक्षण- १६ कारण और सेक्स की 19 रोचक, रहस्यमयी बातें जानना हो, तो amrutampatrika सर्च करें।

परहेज-सावधानी बरतें

  1. कभी भी ठंडे और गर्म पदार्थों के मध्य 2 घंटे का फांसला रखें।सेक्स करने के बाद पानी न पिएं और ना ही स्नान करें।
  2. सुबह खाली पेट नींबू पानी, गर्म पानी, मधु पानी न लेवें। केवल सदा जेल ही ग्रहण करें। सुबह गर्म पानी पीने से शुक्राणु वीर्य पतला होने लगता है।
  3. रात को दही, अरहर की दाल, जूस, फल, सलाद, रायता और खट्टी चीजें भूलकर भी न लेवें।
  • आयुर्वेद के पास है अमृत जड़ी बूटियां सामान्य से लगने वाले वृक्ष, बेल, पेड़-पौधे चमत्कारी रूप अनेक असाध्य और जटिल रोगों को ठीक कर जड़ से मिटा सकते हैं। ये सब चूर्ण विभिन्न रोग नाशक है।
  1. अमृतम मुलेठी चूर्ण,
  2. अमृतम त्रिकटु चूर्ण,
  3. Amrutam shatavari churna,
  4. Amrutam Triphal Churna,
  5. अमृतम मरोड़ फली,
  6. अमृतम जटामांसी चूर्ण,
  7. अमृतम कौंच बीज चूर्ण,
  8. अमृतम भृंगराज चूर्ण,
  9. अमृतम बहेड़ा चूर्ण,
  10. अमृतम आंवला चूर्ण,
  11. अमृतम हरड़ चूर्ण,
  12. अमृतम ब्राह्मी चूर्ण,
  13. अमृतम शंखपुष्पी चूर्ण,

आदि 45 तरह के चूर्ण में कुछ अमृतम वाटिका में उगाई जाती हैं। उच्च कोटि की जड़ी बूटियों ओनली ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

    • सभी चूर्ण के बारे में विस्तार से जानने के लिए amrutam की वेवसाईड देखें।
    • अश्वगंधा चूर्ण, शतावरी चूर्ण, शुद्ध शिलाजीत, सफेद मूसली चूर्ण और कोंच बीज चूर्ण आयुर्वेद की असरदायक एकल एवं वाजीकरण ओषधियां हैं।
    • आयुर्वेद के ये सभी चूर्ण अधिकांश कंपनिया रीपेक करती हैं। अगर किसी को ये चूर्ण लेना हों, तो धूतपापेश्वर, अमृतम, केरला आयुर्वेद, कालेड़ा, श्री नारायण आयुर्वेद इन कंपनियों के चूर्ण सर्वश्रेष्ठ हैं। ये सभी कंपनी आयुर्वेद की 5000 वर्ष पुरानी परंपरा को अपना रही हैं। ज्यादा नामी कंपनी कंपनिया भयंकर प्रतिस्पर्धा के कारण उतनी अच्छी क्वालिटी नहीं दे पाती।

कितना खाना चाहिए चूर्ण-

    • आयुर्वेदिक ग्रंथ द्रव्यगुण विज्ञान के मुताबिक एक दिन में 3 से 5 ग्राम तक ही चूर्ण लेना हितकारी है। इससे अधिक लेने पर यह पचते नहीं हैं क्योंकि ये जड़ी बूटी एक प्रकार से ओषधि लकड़ियां होती हैं। इन्हे अधिक मात्रा में लेने से उदर में अनेक विकार पनपने लगते हैं और पुरुषार्थ वृद्धि होने की जगह कमजोरी आने लगती है।

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से बात करें!

अभी हमारे ऐप को डाउनलोड करें और परामर्श बुक करें!


Posted

in

by

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *