झड़ते/टूटते/कमजोर/पतले बालों का आयुर्वेदिक चिकित्सा द्वारा स्थाई समाधान
लोग कहते हैं झड़ते हुए बालों का कोई इलाज नहीं है फिर, धीरे-धीरे ऐसी मानसिकता बन जाती है कि अब किसी ना किसी दिन पूरी तरह गंजा हो ही जाऊंगा। रोज बाल झड़ने-टूटने की वजह से स्त्री हो या पुरुष को 24 घंटे तनाव बना रहता है। रोज सुबह उठते ही शीशा देखकर निराश होना एक आदत बन जाती है।
आखिर में थक-हार कर हर तरह के तेल और केमिकल उपयोग करते हैं, लेकिन इतना कुछ करने के बाद भी जब बालों पर कंघी करते हैं, तो पूरी कंघी झड़े हुए बालों से भर जाती है और काफी ज्यादा परेशान हो जाते हैं।
बालों का विज्ञान— बाल झड़तेे समय
करीब 100 हेयर फॉलिकल्स (जहां से बाल बनते हैं) रोज मर जाते हैं। आंकड़ा भले ही आपको कम लगे, लेकिन इस गति से अगर ये झड़ते रहैं, तो अपने करीब 90 हज़ार फॉलिकल्स के साथ सिर्फ एक या दो साल में ही व्यक्ति पूरी तरह से गंजा हो जाता है। हर नए दिन के साथ बाल कम होते जाते हैं। हेयरलाइन रोज कम होती जाती है।
फिर, एक समय ऐसा आ जाता है कि
सुबह जब सोकर उठो, तो
बालों में हाथ फेरते ही , तो तकिया बालों से भरा हुआ हुआ मिलता है नहाने के समय
भी कई अनगिनत बाल पानी के साथ बह जाते हैं। लोग अपने बालों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या ठट-कर्म नहीं करते । फिर, भी बाल सवंर नहीं पाते।
जब कभी जिस किसी नये तेल या शेम्पो के बारे में पता चलता है, तो वही अपना लेते हैं। किसी ने कुछ लगाने या खाने को कहा, भी वो करके/आजमाकर देखते हैं।
धनिया का रस,प्याज का रस,त्रिफला,शिकाकाई
आदि के तरह की जड़ीबूटियों के प्रयोग/ उपाय/ सब काम करके अंत में केवल निराश ही हाथ लगती है।
आयुर्वेदिक उपचार–
उन लाखों नवयौवनाओं/नवयुवकों/नई व पुरानी पीढ़ी के लोगों के लिये जरूरी है जो कि बाल झड़ने और बाल टूटने के डर को हर दिन सहते हैं।
बालों का प्रतिदिन कम होते जाना और गंजापन तेजी से आना आदि 27 तरह के खतरनाक केशरोगों की शुद्ध आयुर्वेदिक ओषधि है।
बालों का झड़ना/टूटना/पतलाहोना/रूसी/
खुजली/जुएं/खालित्य-पालित्य आदि बहुत सी बालों की समस्याओं का प्राकृतिक समाधान है।
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