अघोरी की तिजोरी से
स्वांस व हिचकी का घरेलू इलाज
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जब तक सांस है, तब तक जीवन में आस
है, लेकिन जब स्वांस चलती है, तो
शरीर में फांस सी चुभती है।
स्वांस या श्वांस का केवल आयुर्वेद में
शर्तिया इलाज है।
क्या करें–
श्वांस के मरीजों को 50 ग्राम सूखी मूली के टुकड़ों को 200 कर पानी में, उबाालकर
100 ml रहने सुबह-सुबह पिलाने से विशेष लाभ होता है।
सुबह खाली पेट लगभग 15 से 20 ग्राम भुने हुए चने एक-एक करके, बहुत ही आराम से
चबा-चबाकर खावें और दो घण्टे तक
पानी, चाय न पिएं।
यह प्रयोग 10 से 15 दिन तक करके देखें
100 फीसदी फायदा हो जाता है।
हिचकी में मूली से लाभ
पानी की कमी, पानी कम पीने से एवं पित्त की वृद्धि से हिचकी, हिक्का रोग उत्पन्न होता है। जिससे शरीर में गर्मी व्याप्त जाती है। चिड़चिड़ापन व क्रोध आने लगता है।
उपाय
मूली के 5 ml स्वरस में
मयूर पिच्छ भस्म 100 mg
मुलेठी पावडर 1 ग्राम
अनार का जूस 100 ml
में मिलाकर दिन में दो से तीन बार
10 दिन तक देने से
पित्त की गर्मी शांत व चिड़चिड़ा पन व क्रोध का नाश होता है।
हिचकी के मरीजों को रोज सुबह उठते ही
1 लीटर से अधिक पानी पीना अत्यंत हितकारी रहता है।
अमृतम
Zeo MALT
जिओ माल्ट
हिचकी दूर करने वाली एवं
गैस व पित्तनाशक
सर्वश्रेष्ठ औषधि है।
ऑनलाइन उपलब्ध




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