हिरण्यकश्यप थे- स्वर्ण के आविष्कारक

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हिरण्यकश्यप और स्वर्ण के बारे में ऐसी जानकारी अमृतमपत्रिका पर पहली बार पढ़ेंगे—

हिरण्यकश्यप परम शिव उपासक हिरण्ययक्ष के भाई महर्षि कश्यप की संतान थे। श्रीमद्भागवत के अनुसार यह पूर्व जन्म में विष्णुजी के द्वारपाल जय और विजय थे।

ये दोनों स्वर्ण वैज्ञानिक होने के कारण पृथ्वीलोक में स्वर्ण की खोज इन्होनें ही की थी।
हिरण्य का अर्थ स्वर्ण यानि सोना है और कश्यप का अर्थ अविष्कारक या खोजी होता है।

रसेन्द्र सार सहिंता ग्रन्थ के अनुसार स्वर्ण को पहनने से लेकर खाने तक के अनेक प्रयोग श्री हिरण्यकश्यप की ही दुनिया को देन है। यह बहुत मुलायम धातु होने से यन्त्रो में इसका विशेष प्रयोग किया जाता रहा है।

हिरण्यकश्यप की बहिन होलिका तथा सिंहिका थीं सिंहिका राहु की माँ हैं। जिन्हें माँ धुमेश्वरी भी कहते हैं। मप्र के दतिया में इनका मन्दिर है, जो केवल शनिवार को ही खुलता है।

सिरदर्द, पागलपन, मिर्गी, डिप्रेशन एवं मनोरोगों की चिकित्सा करें होली की भस्म से—

होली जलने के दूसरे दिन स्नान कर होली जलने वाले स्थान पर एक दीपक अमृतम राहु की तेल का पान के पत्ते पर रखकर जलाएं और मानसिक स्वास्थ्य की प्रार्थना करते ह होली की राख/,भस्म किसी चांदी या मिट्टी के पात्र में भरकर घर लेकर आएं।

अघोरी की तिजोरी से—

इस भस्म को कपड़छन कर इसमें थोड़ी सी केशर, चांदी भस्म या चांदी का बर्क पीसकर मिलाएं।

इसमें से थोड़ी भस्म लेकर गंगाजल मिलाकर किसी शिवलिंग पर त्रिपुण्ड बनाएं और एक दीपक देशी घी का जलाकर अवसाद से मुक्ति की प्रार्थना कर अपने या पीड़ित के माथे पर लगाएं।

रात को नींद नहीं आती हो, तब भी होली की भस्म लगाकर लेटते ही नींद आ जाती है।

नाम पर मतभेद—

विष्णुपुराण, नारद स्मृति, श्रीमद्भागवत आदि शास्त्रों में हिरण्यकश्यप के कई किस्से मौजूद हैं। यह परम भक्त थे। ये स्वर्ण का आविष्कारक थे। हिरण्य का अर्थ श्रीसूक्त में स्वर्ण बताया है और कश्यप का मतलब अविष्कार करने वाला। इसी कारण इन्हें हिरण्यकश्यप कहा जाता है।

हिरण्यकश्यप के नाम के विषय में मतभेद है। कुछ स्थानों पर उसे हिरण्यकश्यप कहा गया है और कुछ स्थानों पर हिरण्यकिशुप, शुद्ध हिरण्यकिशुप है जिसका अर्थ होता है अग्नि (हिरण्य) के रंग के केश वाला।

ऐसा माना जाता है कि संभवतः जन्म के समय उसका नाम हिरण्यकिशुप रखा गया किंतु सबको प्रताड़ित करने के कारण संस्कृत में कषि का अर्थ है हानिकारक, अनिष्टकर, पीड़ाकारक होता है।

यह सुदर्शन पुष्प है इसकी खोज हिरण्यकश्यप ने ही कि थी। इसके गुण-लाभ के बारे में निघन्टुकार ने बहुत लिखा है-

बिहार में भी बताते हैं-वध—

उसको बाद में हिरण्यकश्यप से जाना गया। नाम पर जो भी मतभेद हों, उनकी मौत बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी प्रखंड के जानकीनगर के पास धरहरा में हुआ था। इसका प्रमाण अभी भी यहाँ है और प्रतिवर्ष लाखो लोग यहाँ होलिका दहन में भाग लेते हैं।

लेकिन प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार हिरण्यकश्यप का वध आन्ध्रप्रदेश के अहोबिलम में ही हुआ था। इस बात के पुख्ता सबूत भी उपलब्ध हैं।

दानवीर बलि के बाबा थे-हिरण्यकश्यप—

दानवीर राजा बलि इनके ही पोते थे। भगवान विष्णु ने इनसे चलकर तीन पग धरती मांगकर इन्हें अमर कर दिया। इसी छल के परिणाम स्वरूप राजा बलि ने विष्णुजी को शाप दिया था कि इन 5 दिनों में जो धोखा मेरे साथ किया है। उसके कारण तुम्हारी पत्नी यानी लक्ष्मी जी उनके घरों में रहेगी, जो दीपाली की रात्रि में पांचों दिन धनतेरस से दोज तक शिवालय में दीपक जलाएंगे।

लक्ष्मी रहस्य के अनुसार दीपावली का त्योहार राजा बलि की स्मृति में ही बनाने का मूल विधान है। बाकी कारवाँ शलत गया, किस्से जुड़ते गए।

किसी भी प्राचीन ग्रंथ में यह महीन लिखा कि श्रीराम के लौटने पर दीवाली मनाई जाती है। यह सब मनगढ़न्त कहानियां है।

भगवान महावीर ने दीपावली की रात्र में ही समाधि ली थी। इसलिए जैन धर्म के लोग पड़वा को उन्हें लड्डू या लाडू अर्पित करते हैं।

यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी से दोज के बीच 5 दिन हुआ था।

दीपावली के बारे में पूजन विधि, धनदायक विधान की वेदसम्मत यह महत्वपूर्ण जानकारी कभी अलग से विस्तारपूर्वक दी जावेगी।

जबलपुर की जय-जय

जाबालि ऋषि के नाम पर बसे संस्कार धानी जबलपुर मप्र जिले का अधिकांश क्षेत्र किसी न किसी धार्मिक प्रसंग का गवाह है। कुंडम क्षेत्र कभी राजा हिरण्यकश्यप के राज्य की राजधानी थी। ऐसा भी बताते हैं लेकिन ऐसा कुछ पक्के परिणाम नहीं मिलते हैं।

हिरण नदी को भी उसी से जोड़ा जाता है। जबकि मझौली का विष्णु वराह मंदिर हिरण्यकश्यप के भाई हिरयाक्ष वध के किस्से मशहूर हैं।

अहोबिलम भगवान नरिस्महा स्वामी का स्वयम्भू सुप्रसिद्ध मंदिर है और यहां भगवान विष्णु नर यानी मनुष्य और सिम्हा के रूप में स्थित हैं।

भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध करने के बाद सिहोरा खितौला के जिस स्थान पर विश्राम किया था वहां वर्तमान में प्राचीन

नरसिंह भगवान का मंदिर आज भी स्थापित है।

आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिला स्थित सुप्रसिद्ध अहोबिलम मंदिर विजयवाड़ा से 348 KM, हैदराबाद से 350 KM और बेंगलुरु से 407 KM की दूरी पर है। अहोबिलम भगवान नरिस्महा स्वामी का सुप्रसिद्ध मंदिर है और यहां भगवान विष्णु नर यानी मनुष्य और सिम्हा यानि शेर के रूप में स्थित हैं।

अहोबिलम में हुआ था-हिरण्यकश्यप का वध—

पुराणों के मुताबिक अहोबिलम वही स्थान है जहां भगवान नरसिम्हा ने हिरण्यकश्प का वध कर प्रह्लाद को बचाया था।

पास में ही एक लंबा पहाड़ में बहुत गहराई है है। इस गुफा में अनेकों स्वयम्भू शिवलिंग स्थापित हैं, जहां हिरण्यकश्यप ने महादेव की कठोर तपस्या की थी।

यह भगवान नरसिंह इसी से प्रकट हुए थे। यह पहाड़ रूपी स्तम्भ हिरण्यकशिपु के शाही महल का स्तंभ माना जाता है। इस मंदिर में भगवान को 9 अलग-अलग रूपों की पूजा जाता है वास्तविक रूप से मंदिर एक गुफा की संरचना है। इसलिए, चट्टानी इलाके के द्वारा पहुँचना बहुत मुश्किल भरा है। हम सपरिवार दो बार जा चुके हैं। पहाड़ों के बीच बने इस मंदिर के बगल में अदभुत झरना बहता है।

बताया जाता है कि यहां की मूर्ति की स्थापना तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर स्वामी ने की थी।

पहाड़ पर गुफा के रूप में बना अहोबिलम मंदिरनल्लामला के घने जंगलों में स्थित अहोबिलम 108 दिव्य देसमों से एक है। अहोबिलम मुख्य मंदिर के पांच किलो मीटर के दायरे में 9 अलग-अलग मुद्राओं में भगवान नरसिम्हा स्वामी क्षेत्र है।

अहोबिलम मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा है।

【१】ज्वाला नरसिम्हा,

【२】अहोबिला नरसिम्हा,

【३】मलोला नरसिम्हा,

【४】क्रोधा नरसिम्हा,

【५】कारंजा नरसिम्हा,

ये छह मंदिर ऊपरी अहोबिलम पहाड़ में स्थित है।

【६】भार्गव नरसिम्हा,

【७】योगानंद नरसिम्हा,

【८】छत्रवाता नरसिम्हा और

ये तीन नीचे के अहोबिलम में है।

【९】पावन नरसिम्हा के रूप में पूजा जाता है।

यहाँ भगवान उनकी सहचरी लक्ष्मी के साथ है जिन्हे संजुलक्ष्मी बुलाया जाता है इनमें से कुछ मंदिरों को आसानी से पहुंचा जा सकता है, जबकि कुछ तक पहुंचने में आपको कठिन जंगलों में पैदल या ट्रेकिंग करके जाना पड़ेगा।

जाने हिरण्य यानी सोने की जबरदस्त बातें—
स्वर्ण औऱ सात धातुओं की बेहतरीन दिलचस्प जानकारी पढ़े अमृतम पत्रिका…

रसेन्द्र पुराण नामक के पृष्ठ 241 पर

स्वर्ण के बारे में बहुत ही दिलचस्प जानकारी

दी गई है। संस्कृत भाषा का यह ग्रंथ

राज्यवेद्य वेद्यरत्न, पण्डित रामप्रसाद द्वारा रचित है, जो सम्वत 1986 में लगभग 90 साल पहले प्रकाशित हुआ था। इस

अनमोल किताब में पारद, शीशा आदि

सभी धातुओं के बारे में विस्तार से लिखा है।

इस लेख में केवल सोने के बारे में जाने….

सात तरह की धातु के विभिन्न नाम…

【1】स्वर्ण यानी सोना

【2】रजत, रौप्य यानि चांदी

【3】तांबा या ताम्र

【4】राँगा

【5】जसद

【6】सीसा वंग

【7】लोहा

स्वर्ण की उत्पत्ति की कहानी….

पंचमहाभूतों में से एक अग्निदेव के

वीर्यपतन से स्वर्ण की उत्पत्ति हुई।

यानी अग्नि के प्रकोप को वीर्यपतन कहा है।

स्वर्ण या सोने के विभिन्न 19 नाम….

स्वर्ण, सुवर्ण, कनक, हिरण्य, हेम,

हाटक, तपनीय, शातकुंभ, गांगेय

भर्म, कर्बुर, चामीकर, जातरूप,

महारजत, काञ्चन या कञ्चन,

रुक्म, कार्त स्वर, जाम्बुनद एवं

अष्टापद यह 19 नाम स्वर्ण के हैं।

शास्त्रों में स्वर्ण…

अग्नि पुराण, शिव महापुराण, वामनपुराण में शिवजी के सात कमरों वाले स्वर्ण मंदिर का उल्लेख है। यह स्वर्ण महल कहाँ बना, कैसे बना इसकी जानकारी “वामन पुराण” में हैै। इतना भी लिखा है कि-महादेव का यह निवास स्वास्तिक की तरह था।

कैसे करें शुद्ध सोने की पहचान…

जो स्वर्ण कसौटी पर घिसने से केशर जैसे रंग का हो जाये।

स्वर्ण शुद्ध करने का प्राचीन विधान

सोने को तेज अग्नि में पकाकर

कांचनार के काढ़े में बुझाकर पवित्र किया जाता था।

कांचनार के रस की 100 पुट देने से ‘स्वर्ण भस्म’ निर्मित होती है।

राँगा, जस्ता, सीसा आदि को मठे में बुझाकर ठंडा किया जाता था।

रसेन्द्र पुराण में भगवान शिव द्वारा नन्दी को 11 तरीके से स्वर्ण आदि धातुओ को शुद्ध करने उपाय बताए हैं।

सुनारों की उत्पत्ति का इतिहास…

स्वर्णकार समाज का उत्पत्ति पूर्वज स्थान राजस्थान के अजमेर शहर से बताते हैं, कोटा में इनकी कुलदेवी के अलावा राजस्थान में इनके कुल देवताओं के प्राचीन सिद्ध स्थल मरुप्रदेश में ज्यादा हैं। स्वर्ण की कारीगरी में इनका कोई सानी नहीं है। स्वर्ण आभूषण बनाना, सोने को चमकाना, सोने को घटाना-बढ़ाना इनके लिए बाएं हाथ का खेल है। पुरानी कहावत है कि स्वर्णकार यानि सुनार सोने में बट्टा लगाए नहीं छोड़ता।

अजमेर राज्य घराने का एक किस्सा भी सुनारों की चालाकी, बुद्धि के लिए कभी बहुत मशहूर था, जो इस प्रकार है-

गहना-आभूषण तो पहनने वाले का होता है, लेकिन सोना सुनार का ही रहता है। आप यदि 100 ग्राम स्वर्ण को 4 बार खरीद-बिक्री कर लो, तो आपके हाथ में केवल 15 या 20 ग्राम सोना बचा रह जायेगा।

स्वर्णकार कलाकार की कलाकारी….

एक बार किसी बादशाह ने ‘सुनार’ से पूछा-

कि तुम 1 तोले स्वर्ण में से कितना खा सकते हो? “स्वर्णकार ने जबाब दिया, – “सोलह आना!’

एक दिन बादशाह ने इसकी परीक्षा करना चाही और 5 किलो सोने की मूर्ति राजमहल में ही बैठकर बनाने को कहा, – साथ ही सुनार पर कड़ा पहरा बिठलवा दिया।

स्वर्णकार ने राजमहल में काम आरम्भ करने से पहले घर पर ही एक पीतल की मूर्ति बनाना शुरू कर दी और हूबहू वैसी ही मूर्ति राजमहल में भी बनाने लगा। जब मूर्ति बनकर तैयार हो गई तो, सुनार ने ‘मंत्री से कहा’, – मूर्ति की सफाई के लिए दही की जरूरत है, उसी समय स्वर्णकार की पत्नी, जिसे सुनार ने पहले ही सिखा-पढ़ा दिया था और मूर्ति, दही की मटकी लेकर

‘दही ले-लो, “दही ले-लो”- कहकर निकली।

सुनार ने उसे बुलाकर दही खरीद कर, फिर सोने की मूर्ति को मटके में डालकर, पीतल की मूर्ति राजमहल में रख ली। इस प्रकार सोने की मूर्ति स्वर्णकार के घर पहुंच गई। सुनार ने बादशाह के सामने सिद्ध करके दिखा दिया कि सुनार चाहे, तो “16 आने स्वर्ण” भी हजम कर सकता है।

स्वर्ण के गहने बनाने में जो वस्तुएं प्रमुख भूमिका अदा करती हैं, उनका विवरण निम्नलिखित है-

नौसादर शौरा सखा,

सलिल सुहागा सन्धि,

विमल-विश्व भूषण रचति,

दूर करे दुर्गंधि।

दूर करे दुर्गंधि, नेत्र शीतल करती है,

महाभयंकर रोग, ददरु पल में हरती है। ।

तेजाब-गाढ़े तेजाब में लोहा या जस्ता डालने पर गल जाते हैं किन्तु सोने पर तेजाब का कोई असर नहीं होता। पुराने समय स्वर्णाभूषण की सफाई या उजलाने के लिए इमली की खटाई काम में लाया करते थे। वर्तमान में स्वर्णकार गंधक का तेजाब, शोर का तेजाब और नमक का तेजाब का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सुहागा-यह सोने की खान के

मध्य मिलता है। कहावत भी है कि- सुहागे के बिना सुनार का तथा सुहाग (पति) के बिना स्त्री का जीवन व्यर्थ है।

प्राचीन काल के प्रसिद्ध स्वर्णकार श्री चंदूलाल वर्मा के अनुसार सुहागा का गुण यूं बताया है कि-

जारि करत है छार, मैल सब काट गिराबे।

सोना-चांदी माहिं डार दो, शीघ्र गलाबे। ।

सिख धर्म की पवित्र पुस्तक

श्री गरूग्रंथ साहिब में लिखा है कि….

कामु क्रोधु काइआ कउ गालै ॥

जिउ कंचन सोहागा ढालै ॥

कसि कसवटी सहै सु ताउ ॥

नदरि सराफ वंनी सचड़ाउ ॥18॥

{पन्ना 932)

अर्थ: जैसे सोहागा (कुठाली में डाले हुए) सोने को नर्म कर देता है, (वैसे ही) काम और क्रोध (मनुष्य के) शरीर को निर्बल कर देता है। वह (ढला हुआ) सोना (कुठाली में) सेक सहता है, फिर कसवटी का कस सहता है (भाव, कसवटी पर घिसा के परखा जाता है), और, सुनहरे रंग वाला वह सोना सराफ़ की नजर में कबूल होता है।

नौसादर-

यह गहने के निर्माण में जोड़ने हेतु उपयोगी है, इसके अलावा आयुर्वेदिक औषधियों में कफ-खांसी के उत्पादों में इसे अपनाते हैं।

अमृतम के “लोजेन्ज माल्ट”

में इसे विशेष रूप से मिलाया है। लोजेन्ज माल्ट की एक खुराक लेने पर ही पुरानी से पुरानी कफ सम्बंधित बीमारियों से राहत मिलती है।

सिरदर्द मिटाने के लिए नौसादर की नासिका लेने से सिर की पीड़ा मिटती है। चौपाई है-

नौसादर सादर करत, सिर पीड़ा अतिदूर,

पेटदर्द की भाँति यह, मैल करत काफूर। ।

मैल करत काफूर, स्वर्ण-चांदी भी चमकावै,

टुकड़े-टुकड़े जोड़, भव्य-भूषण बनवावे। ।

शौरा की विशेषता…

पर-पर विनाश की भूरी,

जहर सम इसका प्याला।

इस पदार्थ से मरे शीघ्र,

पशु व हाथी मतवाला। ।

शुद्ध सोने की पहचान कैसे करें-

24 कैरेट का सोना क्या होता है।

एक कैरेट की माप यानी सोने में 4.1666 ग्राम वजन होता है। इसमें 24×4.1666 =

99.9984 ग्राम गुणा करने पर होता है। एक कैरेट में 4 ग्राम1666 मिलीग्राम सोना रहता है। यदि किसी ने 22 कैरेट का 100 ग्राम सोना खरीदा, तो उसके पास शुद्ध सोना 91 ग्राम 66 मिलीग्राम आएगा। सराफा व्यापारी 22 कैरेट का सोना कहकर बेचते हैं, लेकिन वह 20 या 18 कैरेट से अधिक नहीं होता और रकम पूरे 24 कैरेट की लेता है। 24 कैरेट के स्वर्ण में 12 माशे तथा 22 कैरेट में 11 माशे सोना होता है।

सोने में बट्टे का रट्टा…

सोने का चमकदार औऱ हल्का बनाने के लिए चांदी व ताम्बे का उपयोग किया जाता है।

22 कैरेट का आभूषण में एक कैरेट चांदी तथा एक कैरेट ताम्बे का बट्टा लगाया जाता है।

रोग भगाए सोना…

सोने का स्वभाव गर्मतर है। यदि 10 ग्राम सोने की गोली 4 घण्टे रोज मुहँ में रखकर चूसे, तो उन्माद, पागलपन, नपुंसकता, मधुमेह मिटकर स्मरण शक्ति तीव्र होती है।

ब्राह्मी वटी गोल्ड

ब्रेन रोगों की बेहतरीन चिकित्सा है। अमृतम का “ब्रेन की गोल्ड माल्ट” इसी योग से निर्मित है।

स्वास्थ्य वर्धक सोना….

स्वर्ण पात्र में दाल या सब्जी बनाकर खाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

राजा-महाराजा खाने के पतीले दाल-सब्जी आदि में स्वर्ण का सिक्का डालकर रखते थे, इससे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता और काम शक्ति यानि सेक्स में वृद्धि होती थी।

पकवान आदि में स्वर्ण का वर्क लगाने का प्रचलन इसी वजह से है। गुजरात-राजस्थान आदि राज्यों में सोने के वर्क का बहुत प्रचलन है। ये मिठाई 2 हजार से 10 हजार रुपये किलो तक बिकती हैं।

हर्बल मेडिसिन है-सोना…

सोना हर्बल है अर्थात स्वर्ण, शरीर में हर-बल प्रदान करता है। स्वर्ण निर्बल व्यक्ति को बलशाली बनाता में है। “अमृतम गोल्ड माल्ट”

के खाने से, तन में-पल भर में हलचल शुरू हो जाती है।

स्वर्ण को आयुर्वेद की सर्वश्रेष्ठ ओषधि माना गया है। आयुर्वेद के सभी ग्रन्थों जैसे- रसेन्द्र सार, रसराज, रस तन्त्रसार, आयुर्वेद सारसंग्रह आदि अनेक किताबो के किबाड़ खोलने पर स्वर्ण के चमकारी परिणामों का खजाना मिलता है।

रोगों के रहस्यों को हटाता है-सोना…

स्वर्णयुक्त दवाएँ कृशता, निर्बलता, बुढापा, शारीरिक क्षीणता, जरा रोग, टीबी, नपुंसकता, शुक्राणु की कमी, वातरोग, मधुमेह, मानसिक बीमारी, याददाश्त की कमी, डिप्रेशन, तनाव आदि ऐसा कोई विकार नहीं है, जो अमृतम स्वर्ण भस्म से दूर न हो।

स्वर्ण भस्म मस्तिष्क, देह को स्थिर और हरेक कार्य करने में समर्थ बनाती है। शरीर की सप्त धातुओं को प्रकृति की सात धातु तन को रोगरहित बनाने में चमत्कारी हैं। आयुर्वेद के लगभग 100 से अधिक ग्रंथों में ऐसा उल्लेख है।

स्वर्ण शलाका से सर्जरी…

आदिकाल में स्वर्ण की सलाई से विष कंठा, केन्सर आदि असाध्य जड़दार फोड़े पर चीरा या दारा लगाकर इलाज करते थे। सोने के आभूषण पहनने से अनेकों बीमारियों का नाश होता है।

नशानाशक सोना…

आधुनिक चिकित्सा जगत में एल्कोहल, कैफीन, निकोटिन, समेक, अफीम आदि नशे की बहुत सी लटों को छुड़ाने में स्वर्ण का उपयोग हो रहा है। स्वर्ण में रक्तसंचार (ब्लड सर्कुलेशन), कैंसर तथा दिल के रोग दूर करने की क्षमता होती है। दिल के गम्भीर ऑपरेशन स्वर्ण निर्मित उपकरणों से ही सम्भव हैं।

शरीर के कटे-पिटे अंगों में टांका लगाने एवं प्लास्टिक सर्जरी हेतु इसे सुरक्षित माना जा रहा है। कैन्सर, प्रोस्टेड आदि में लेजर पध्दति के जरिये स्वर्ण भस्म की वाष्प या भांप द्वारा कैंसर सेल्स नष्ट किये जा रहे हैं।

पवित्रता का प्रतीक है-सोना..

जाने सोने के फायदे

भारत में स्वर्ण शुभत्व, शुद्धता और वैभव का प्रतीक है। गाँव में आज भी किसी के अछूत होने पर स्वर्ण का पानी छिड़का जाता है।

पुरानी परंपरा थी कि जब कोई दरवाजे से अर्थी या शवयात्रा निकलती थी, तो महिलाएं स्वर्णाभूषण से पानी का स्पर्श कराकर अपने घर के आगे डाल देती थी, ताकि मुर्दे का कीटाणु घर में न आ सकें।

स्वर्ण मुद्रा से बच्चों की नजर उतारने का प्रचलन भी प्राचीन है।

राजा-महाराजाओं के दौर में स्वर्ण-चांदी के सिंहासन का खासा महत्व था। स्वर्ण धारण से आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है।

व्यापार में बढ़ोत्तरी के लिए स्वर्ण का सिक्का गल्ले में रखने का प्रचलन पुराना है।

राजसी खजानों से लेकर धार्मिक अनुष्ठान में स्वर्ण का विशेष स्थान है।

स्वर्ण की शक्ति अटूट है…

सोना सभी के लिए शगुन, सहायता और बीमा है। बुरे-आड़े वक्त में कोई काम आए न आये, पर सोना 100 फीसदी साथ निभाता है। खराब समय में रिश्ते भी रिसने लगते हैं।

पक्षियों की परम्पराएं…

बेजुबान पक्षीयों को भी हैं- सोने से मोह रहता है..

अघोर तन्त्र विज्ञान के मुताबिक

प्राचीन काल में चील पक्षी अक्सर

सोने के गहने उठा ले जाती थी। ऐसी मान्यता है कि- जब तक स्वर्ण नजदीक न हो तब, तक चील के बच्चे आंखे नहीं खोलते। चील की एक खासियत औऱ भी है कि यह सूर्य को एकटक निगाह से देख सकती है। कभी कहा जाता था कि चील के घर में पारस होता है अर्थात चील के घोंसले में सोना निश्चित मिलता है। चील जमीन में दबे स्वर्ण भण्डार की भी जानकर होती है।

कौआ, नाग वहीं सहवास करते हैं, जिस धरती के अंदर स्वर्ण का खजाना छुपा होता है।

सोने की खोज….

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक स्वर्ण भंडार की सबसे पहले खोज महर्षि कश्यप-दिति के पुत्र दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने की थी। हिरण्य, स्वर्ण को कहते हैं और कश्यप का अर्थ अविष्कारक होने यह नाम पड़ा।

हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष के नेत्र स्वर्ण के होने से यह जिस भी धातु पर नजर डाल देते थे, वह स्वर्ण का हो जाता था।

सोना सबके लिए रोना है…

आदिकाल से ही सोना देवी-देवताओं और सबके लिए महत्वपूर्ण रहा है। सफल अनुभवी लोगों के अनुसार सोना वही पाते हैं, जो सदैव जागते रहते हैं। दिन-रात हर हालात में काम में लगे लोगों की पत्नी सोने से लदी रहती है। स्त्रियों को सोने से बहुत लगाव होने के कारण वे हमेशा जागृत अवस्था में रहती हैं।

सोना किधर पाया जाता है-

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सोना जमीन में कम बिस्तर पर ज्यादा पाया जाता है। यहां स्वर्ण से ज्यादा नींद जरूरी है। कुछ लोगों के लिए आलस्य, दूषित विचार, द्वेष-दुर्भावना आदि ही सोना है।

शास्त्रों में सोना…

शिवमहापुराण, लिंग पुराण, स्कन्ध पुराण के अनुसार पारद, मुक्ता, रजत, अष्टधातु, दधि स्वर्ण शिंवलिंग आदि की पूजा से चमत्कारी परिणाम मिलते हैं। महालक्ष्मी की

कृपा बरसती है।

सोने की लंका कैसे बनी…

माँ भगवती के हठ के चलते महादेव ने देवताओं के वास्तुविद और गणपति के स्वसुर श्री विश्वकर्मा जी को एक अदभुत महल बनाने का निर्देश दिया। हालांकि इस स्वर्ण महल में शिव परिवार एक दिन भी नहीं रुक सका, क्योंकि रावण के पिता विश्रवा द्वारा इस भवन का गृहप्रवेश पूजन कराकर इसे दक्षिणा में मांग लिया था। ऋषि विश्रवा ने इसका नाम लंका रखा था, इसमें सोने का अत्याधिक प्रयोग होने के कारण यह सोने की लंका कहलाई।

लंका निर्माण हेतु “विश्वकर्मा”

ने जो नक्शा बनाया उसमें सोने की जरूरत अधिक थी। अतः भोलेनाथ ने स्वर्ण बनाने का सूत्र इन्हें समझाया।

कामाख्या के एक बंगाली तांत्रिक ने सोना बनाने की विधि इस प्रकार बताई-

गन्धक, पारा, थुथिया।

विधि न जाने चूतिया। ।

अर्थात उक्त 3 पदार्थो के मिश्रण से मन्त्रो के सम्पुट देने से सोना तैयार हो सकता है। स्वर्ण निर्माण के प्रयास सदियों से हो रहा है, लेकिन सफलता कुछ ही सिद्ध अवधूत सन्तों को मिल पाई। विज्ञान को तो आज तक सफलता नहीं मिल सकी।

खोजीजन स्वर्ण बनाने का विधान भले ही नहीं ढूढ़ सके, किन्तु उपयोग के हजारों तरीके ईजाद कर डाले।

स्वर्ण आज विद्युत उपकरणों, मोबाइल, इंटरनेट, आदि उपकरणों का कीपार्ट (KEYPART) है।

स्वर्ण वैज्ञानिकों के हिसाब से सृष्टि की अहम अष्ट धातुओं में से एक मात्र परिष्कृत,

परिपूर्ण और पूज्यनीय धातु सोना हमारे लिए जीवनी शक्ति से कम नहीं है।

लाखों वर्षों से सोना रहस्यमयी, जादुई द्रव्य के रूप में लोगों की तमाम तकलीफें दूर करता रहा है।

स्वर्ण को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शोधन के लिए लेपन, अनुपान के रूप में उपयोग करने का प्राचीन इतिहास मिलता है।

कायाकल्प करता है सोना…

भारत के आयुर्वेदिक महर्षियों ने स्वर्ण को बहुत चमत्कारी धातु बताया है। शरीर की सप्तधातुओं को इसकी भस्म रिचार्ज करने में बेहतरीन ओषधि है। आयुवर्धक के रूप में राजा-महाराजा और अमीर लोग इसका सेवन सदियों से करते रहे हैं।

स्वर्ण में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो शरीर में प्राण फूक देते हैं। तन की अनेक अज्ञात असाध्य बीमारियों को दूर कर यौवन निखारने में आयुर्वेद की शक्तिदायिनी दवा अमृतम स्वर्ण

भस्म एक महत्वपूर्ण योग है। अमृतम का हरेक माल्ट अवलेह स्वर्ण भस्म युक्त है।

अमृतम गोल्ड माल्ट कायाकल्प करने की सर्वश्रेष्ठ अवलेह है। बशर्ते इसे 3 से 5 महीने तक सेवन किया जाए। यह सभी उम्र के स्त्री-पुरुषों का बुढापा रोकने में सहायक है।

चीन की चतुरता…

चीन के लोग बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए अपने दाँत सोने के लगवाते हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में दांतों में स्वर्ण लगवाना बेहतर निवेश मानते हैं। खोल, बत्तीसी और दांतों में जड़वाने के लिए प्रतिवर्ष 16 से 20 टन सोने की खपत होती है।

सुर मिले मेरा-तुम्हारा….

सुरा पीने वालों के सुर में सुर पल में मिल जाते हैं। आदिकालीन भारत में स्वर्णजड़ित आयुर्वेदिक गोलियां एवं स्वर्णजल का प्रयोग बहुत चलन में रहा है। आज दुनिया के अनेकों देश हिंदुस्तान की नकल कर रहे हैं।

भारत का ऋषि ज्ञान हर क्षेत्र में समृद्ध था, यहाँ के पुराने वैद्य, चिकित्सक, शारीरिक व मानसिक थकान मिटाने के लिए

सुरा यानि एक तरह की आयुर्वेदिक शराब में

स्वर्ण का चूर्ण मिलाकर पिलाते थे।

वात को मारो लात…

वात रोगों की जड़ से मिटाने के लिए आयुर्वेद में वृहत्वातचिन्तामणि

रस, योगेंद्र रस, रसराज रस, स्वर्ण भस्म आदि अनेको ओषधियाँ मिलाकर चिकित्सा की जाती थी। आयुर्वेद वात को घात से बचाता हैं, इन्हीं योगों से निर्मित ऑर्थोकी गोल्ड कैप्सूल

बहुत ही अदभुत दर्दनाशक दवा है। थायरॉइड, लकवा,

जोड़ो के दर्द में अत्यंत राहतकारी है।

आम के आम गुठलियों के दाम..

दुनिया के कई देशों में घोर आर्थिक मंदी झेली है, लेकिन भारत में इसका प्रभाव कम ही होता है, क्योंकी हिंदुस्तान की महिलाएं निवेश के रूप में सोने को संभालकर रखती हैं। स्वर्ण यहां शौक भी है और निवेश भी।

भविष्य में स्वर्ण बहुत महँगा हो जाएगा, इसलिए महिलाओं को सोना खरीदने दीजिए।

पुत्र की प्राप्ति स्वर्ण से..

जिन महिलाओं को पुत्री संतान अधिक हो और वह पुत्र चाहती हैं, तो अपनी दसों उंगलियों में सोने का छल्ला अवश्य पहने।

हर महीने की अमावस्या के एक दिन पहले चतुर्दशी यानी मास शिवरात्रि और मंगलवार को “अमृतम मधु पंचामृत” से शिंवलिंग पर 7 बार रुद्राभिषेक कराएं।

मनोकामना पूरी होने पर 5 पुराने जीर्ण-शीर्ण शिवमंदिरों का जीर्णोद्धार करवाना न भूले।

धरती में स्वर्ण का खाजाना…

भारत में ही नहीं सन्सार के सभी लोगों की यह मानसिकता है कि-हमारे खेत-खलिहान, घर, जमीन में धन या माल यानी सोना दवा पड़ा है।

तांत्रिक विद्या के अनुसार कैसे जाने की धरती में धन यानि सोना दबा है?

■ जिस भूमि पर अग्नि जलाने पर भी न जले, वहां धन गढ़ा हो सकता है।

■ जहाँ भीषण गर्मी में, सूर्य की तपन के बाबजूद ऐसी घांस जमी रहे कि उसे पशु चौपाये नित्य खाते रहें, तो समझे नीचे धरती में धन है।

■ जिस स्थान पर जेष्ठ मास यानि मई-जून के महीने में किसी पेड़ पर नये पत्ते आते हों और अन्य ऋतु में नहीं रहते हों, तो ऐसा समझे कि नीचे सोना है।

कौए जिस जगह मैथुन करते हैं वहां धन दबा होता है।

स्वर्ण देखने का काजल…

अघोरी तन्त्र विद्या के मुताबिक दीपावली की रात किसी श्मशान में जाकर, मृत मनुष्य के कपाल में सूअर वसा में तिल का तेल मिलाकर दीपक जलाकर काजल पारे।

फिर, उस काजल को आंख में अंजन करने से जमीन में गढ़ी वस्तुएं साफ दिखाई देती हैं। ध्यान रहे यह प्रयोग बिना गुरु के न करें।

प्रथ्वी में स्वर्ण भंडार जानने के अनेको प्रयोग हैं, जो 100 फीसदी कारगर हैं, लेकिन जोखिम भरे हैं और अल्पज्ञानियों के लिए नहीं हैं।

36 गढ़ में राजनन्दगांव के नजदीक एक नदी की बालू, रेत में स्वर्ण के कण मिलते हैं।

सोना यानि आलस्य छोड़कर व्यक्ति यदि तन-मन से सफलता हेतु कोशिश करे, तो जीवन में अनेकों अवसर मिलते हैं। कहते भी हैं-

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। प्रतिदिन परम् प्रयास और परिवर्तन करते हुए प्रगति की तरफ बढ़ना भी सोने के खजाने की प्राप्ती से कम नहीं होता।

स्वर्ण का साथ और कृपा…

सोने की कृपा ने कई कंगालों को कुबेर बना दिया। कुबेर बाबा कल्यानेश्वर के परम भक्त और सृष्टि के धनाध्यक्ष हैं। इनकी कमर झुकी होने के कारण ये कुबड़ा स्वरूप है। रावण दशानन के कुबेर भाई भी हैं।

भारत था कभी सोने की चिड़िया..

“यहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, यह भारत देश है मेरा। ” यह गीत तो सबने सुना होगा। भारत में कभी अथाह स्वर्ण का भंडार था, जिसे मुगलों-मुसलमानों तथा विदेशियों लूट लिया।

परिवर्तन परमात्मा की परम्परा है…

समय बदला-सोना बदला। राजाओं की आपसी रंजिश के चलते अपना माल पराया हो गया। अनेको युद्ध ने देश को अशुद्ध कर दिया। आज हजारों टन सोने का खजाना जमीन में दबा पड़ा है। लोगों को बहुत से बीजक मिले, किन्तु खजाना नहीं मिल सका। लगभग सभी खजाने अभिमंत्रित या कीलित हैं।

सोने की पोथी-

शाही शहर पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के अध्ययन विभाग में महाराजा रंजीत सिंह के समय का नीलम जडि़त दुर्लभ व पुरातन

24 कैरेट सोने की स्याही से लिखा हुआ

श्री गुरु ग्रंथ साहिब सहेजकर रखा गया है इस स्वर्ण स्याही की चमक आज भी बरकरार है।

पटियाला विश्वविद्यालय में 568 हस्तलिखित दुर्लभ और प्राचीन ग्रंथों को डिजिटलाइजेशन करने काम भी हो रहा है।

260 हस्तलिखित श्री गुरु ग्रंथ साहिब, 44 श्री गुरु गोबिंद सिंह का लिखित श्री दशम ग्रंथ साहिब और 272 पोथियां भी मौजूद हैं. यह हस्तलिखित ग्रंथ 1604 ई. से लेकर 20वीं सदी तक के हैं।

स्वर्ण मन्दिर…

★ अमृतसर पंजाब का जगत प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री हरमिन्दर साहिब ‘स्वर्ण मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है।

★ दूसरा दक्षिण भारत के वेल्लूर का महालक्षमी स्वर्ण मंदिर।

बौद्ध धर्म के स्वर्ण ग्रन्थ…

700 साल पुराना ये ग्रंथ तिब्बती में लिखा है। भारत में कई किताबें सोने और चांदी के चूर्ण से लिखी हुई है। स्वर्णप्रभा सूत्र पूरा सोने और चांदी से लिखा हुआ है।

दूसरा बौद्ध ग्रन्थ शतसाहस्रिका प्रज्ञा पारमिता ग्रंथ का पहला पन्ना सोने की स्याही से लिखा हुआ है। इस ग्रंथ में बुद्ध के मूल वचन हैं। ग्रंथ में पहले पन्ने पर ही बुद्ध का चित्र है। ये भी सोने के पानी से बनाया गया है।

सौवर्ण का अर्थ है – सुनहरी और दूसरा अर्थ- तोल में एक स्वर्णमुद्रा के बराबर।

सौवर्चल नामक देश से प्राप्त सोंचर नमक,

सज्जी का खार

स्वर्णनगरी शिवधाम को कहा गया है।

सोने की लंका – सृष्टि के पहले वास्तुविद द्वारा निर्मित शिवभवन, जिसे दशानन रावण ने दक्षिणा स्वरूप शिव से मांग लिया था।

स्वर्णम- सोना एवं सोने का सिक्का कहलाता है।

सोने के दाने को ‘कणिका’ कहते हैं।

भगवान विष्णु का वाहन श्री गरुण जी का एक नाम स्वर्णम भी है, जिनके स्मरण से अचानक आये घनघोर कष्ट दूर होते हैं।

दखिण भारत में विशेष दुःखों को दूर करने हेतु इनकी पूजा का विधान है।

स्वर्ण गैरिक- लालरंग की गेरू या खड़िया होती है। मध्यप्रदेश के जैतवारा में इसकी बहुत खदानें हैं। यह बवासीर नाशक भी है।

स्वर्णचूड़:- महादेव का एक नाम, नीलकंठ औऱ मुर्गा कहा जाता है।

स्वर्णजम-राँगे का एक नाम है।

स्वर्ण दीधिति का मतलब है- अग्नि क्योंकि आग का रंग स्वर्ण जैसा होता है।

चंपक वृक्ष ही स्वर्ण पुष्प है।

सोना गिरवी रखना- स्वर्ण बंध कहलाता है।

स्वर्णमाक्षिक नाम का एक खनिज पदार्थ है, जिससे आयुर्वेद में अमृतम स्वर्णमाक्षिक भस्म निर्मित होती है, जो रक्त वृद्धि आदि अनेकों रोगों का शमन करने में सहायक है।

सोना मक्खी नामक रेशम का कीड़ा होता है।

स्वर्णरेखा-सोने की लकीर एवं लक्ष्मण रेखा को कहते हैं।

स्वर्णरेखा नामक एक नदी, जो कभी में ग्वालियर में बहा करती थी। कहते हैं- इस नदी में पारस पत्थर था। यह नदी अब नगर निगम की कृपा से अब गन्दा नाला बन चुकी है।

स्वर्णगंगा नदी-यह दक्षिण के वायुतत्व शिंवलिंग श्रीकालाहस्ती शिवालय के नजदीक है।

स्वर्णवणिज- सोने का व्यापारी।

स्वर्णकार-सोने के आभूषण बनाने वाला।

स्वर्ण का एक नाम “कनक” है। कनक धतूरे को भी कहते हैं। कहावत भी है-

कनक-कनक से सौ गुने मादकता अधिकाय”

स्वर्ण जयन्ती-50वे वर्ष में बनाये जाने वाला उत्सव।

स्वर्णकोश, स्वर्णकोष, स्वर्ण मंडित, स्वर्णपदक, स्वर्णमान यानि सोने का स्टेंडर्ड, स्वर्णमुद्रा, आदि स्वर्ण से जुड़े नाम हैं।

मन्दिर औऱ गुरुद्वारों की छत पर लगे सोने के खम्बे स्वर्ण शिखर कहे जाते हैं।

ज्योतिष चिंतामणि ग्रन्थ के अनुसार स्वर्ण शिखर के दर्शन से केतु दोष दूर होता है। बच्चे तेजस्वी होते हैं।

स्वर्णिम यानी सुनहला, जो पुखराज रत्न का सब्सिट्यूट पत्थर है।

सोने की कहावतें-

जानने के लिए सर्च करे-amrutampatrikaa

इस लेख में स्वर्ण भस्म युक्त “अमॄतम गोल्ड माल्ट” के 100 से ज्यादा फायदे पढ़कर प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। रोगरहित होने और मनोबल वृद्धि के लिये एकाग्रचित्त होकर पढ़ें….

अपना स्वर्ण भंडार कैसे भरें—

कैसे-किस प्रकार करें-स्वर्ण निवेशदुनिया में बहुत से लोग सोने में निवेश, तो करते हैं, लेकिन इसके कुछ तरीके हैं। इन्हें आजमाकर आप स्वर्ण से समृद्धि पा सकते हैं।

विश्व में लगभग सभी को खासकर हम भारत की महिलाओं को सोने में इन्वेस्ट करने बहुत पसंद है।अच्छी बात भी है क्योंकि स्वर्ण एक अच्छी वित्तीय सहायता के रूप में भी काम करता है।

वास्तव में, यह वित्तीय आपात स्थितियों से निपटने के लिए भारत में गिरावट की संपत्ति है।गोल्ड का रिटर्न–सन 2020 में, सोने ने 41% से अधिक का असाधारण रिटर्न दिया है, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक रिटर्न है।

जबकि यह आकर्षक है, सोने ने पिछले 30 वर्षों के लिए 9% प्रति वर्ष का औसत रिटर्न दिया है।क्या गोल्ड आपके पोर्टफोलियो में फिट बैठता है?

स्वर्ण हर किसी के मस्तिष्क में ऊर्जा भर देता है इसलिए हमने सोचा कि हम उन तरीकों को उजागर करें जिनसे आप सोने में निवेश कर सकते हैं। हालांकि किसी भी तरह से हम अनुशंसा या किसी को प्रेरित नहीं कर रहे हैं कि आप जाएं और इसे बिना चेक किए खरीद लें।

गोल्ड में निवेश भौतिक सोने के रूप में और कागज सोने के रूप में (MCX) स्वामित्व में हो सकता है।दूसरा तरीका यह भी है कि आप इसे शारीरिक रूप से गहने में लेते हैं, तो आपके हाथ में 100 ग्राम के पैसे देकर 80 ग्राम पा सकते हैं अथवा, सिक्के और सोने की छड़ के रूप में खरीद सकते हैं।

गोल्ड को गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) और डिजिटल गोल्ड के रूप में पर्स के जरिए डिजिटल रूप से स्वामित्व दिया जा सकता है। हमने उनमें से प्रत्येक पर यहां विस्तार से चर्चा करेंगे।

【】 फिजिकल गोल्डज्वेलरी खरीदना–: गहने-आभूषण खरीदने के लिए किसी जौहरी या इसे ऑनलाइन खरीद सकते हैं। इस तरह के गहने आम तौर पर आपकी निवेश संपत्ति के खिलाफ आपकी व्यक्तिगत संपत्ति का एक हिस्सा बनाते हैं।

【】गहनों से नुकसान-निवेश के रूप में, सुरक्षा, शुद्धता और इसकी उच्च लागत (जैसे शुल्क बनाना) जैसे सोने के गहनों के साथ कुछ चिंताएं हैं। आभूषण बनाने का शुल्क सोने की लागत का 6% से 10% तक होता है और आपके लिए एक दिन होता है जब आप गहने खरीदते हैं और इसलिए निवेश का एक पसंदीदा या फायदेमंद तरीका नहीं है।आने वाले भविष्य में अगले दस सालों में सोने की कीमत 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकती है।

सोने की खपत दिनोंदिन उद्योग में बहुत तेजी से बढ़ रही है।

अमृतम आयुर्वेद में बनने वाले स्वर्ण योग जैसे-स्वर्ण भस्म, वृहत्वात चिंतामणि रस, योगेंद्र रस स्वर्णयुक्त, बसन्तकुसुमाकर रस आदि 98 दवाओं में सोना मुख्य द्रव्य घटक है।

अमृतम फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित अधिकांश ओषधियों में स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल या समावेश किया जाता है। जैसे-

¶~ अमृतम गोल्ड माल्ट

¶~ पाइल्स की गोल्ड माल्ट

¶~ ऑर्थो की गोल्ड माल्ट एवं कैप्सूल

¶~ ब्रेन की गोल्ड माल्ट

¶~ बी फेराल गोल्ड माल्ट-कैप्सूल आदि।

यंत्रों में भी होता है सोने का उपयोग—

इलेक्ट्रॉनिक समानों में भी सोने की मांग बहुत है।इसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए, आपको द ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) हॉलमार्क, ज्वैलर्स की पहचान चिह्न और गहनों पर सोने की मोहर की शुद्धता की जाँच करनी चाहिए, जो अधिकांश लोग नहीं जानते कि आप इसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए खरीद रहे हैं।【१】गोल्ड सेविंग स्कीम -सोने की उच्च कीमतों को देखते हुए, (5 अगस्त 2020 तक 24kt शुद्धता वाले सोने के लिए for 55,000 प्रति 10 ग्राम), कई ज्वैलर्स सोने की बचत योजनाएं चलाते हैं, जिससे किस्तों में भुगतान करके खरीदारों के लिए सोना खरीदना आसान हो जाता है।

【२】ज्वेलर्स की आकर्षक योजनाएं–एक विशिष्ट स्वर्ण योजना आपको चुने हुए कार्यकाल के लिए हर महीने एक निश्चित राशि जमा करने की अनुमति देती है। जब शब्द समाप्त हो जाता है, तो आप जमाकर्ता को प्रोत्साहित करने के लिए ज्वैलर द्वारा जोड़ी गई बोनस राशि सहित, जमा किए गए कुल धन के बराबर मूल्य पर (उसी जौहरी से) सोना खरीद सकते हैं।

किश्तों से करें स्वर्ण को अपना—

ज्यादातर मामलों में, जौहरी जमा की गई प्रत्येक 11 किस्तों के लिए एक महीने की किस्त जोड़ता है या उपहार वस्तु की पेशकश कर सकता है। मतलब 11 महीने तक रकम जमा करके 12 महीने की किश्त का गोल्ड मिल सकता है।

कृपया ध्यान दें कि यह योजना केवल तभी उपयोगी है जब आप ज्वैलर (जैसे तनिष्क या कल्याण ज्वैलर्स या अपने स्थानीय ज्वैलर) से सोने के गहने खरीदना चाहते हैं, जिन्हें आप हर महीने किस्त जमा कर रहे हैं।

यह मत भूलो कि जब आप गहने खरीदते हैं, तो गहने बनाने का शुल्क आपको ही होगा।

【३】गोल्ड सिक्के:– अगर फिर भी फिजिकल गोल्ड का मालिक बनना चाहते हैं, तो गोल्ड “क्वाइन यानि 99.99 टंच के सिक्के एक अच्छा विकल्प है। आप उन्हें जौहरी, बैंक, गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों और यहां तक ​​कि कुछ ई-कॉमर्स वेबसाइटों से खरीद सकते हैं।

सोना बेचते समय केवल बाजार मूल्य से आधा से 1 फीसदी कटौती होती है।

सरकार ने सरलता से खनन किए गए सिक्के लॉन्च किए हैं जिनमें एक तरफ राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र होगा और दूसरी तरफ महात्मा गांधी।

सिक्के 5 और 10 ग्राम के मूल्यवर्ग में उपलब्ध हैं जबकि पट्टियाँ 20 ग्राम के लिए हैं।

【४】पेपर गोल्ड या गोल्ड सिक्योरिटीज:-भौतिक सोने के अपने फायदे हैं और हम में से अधिकांश के पास खुद का सोना है। हालाँकि, PAPER GOLD सोने में निवेश का नया सहज व सरल तरीका है। यह खरीदने के लिए सहज है, और भौतिक सोने के सुरक्षा जोखिम और शुद्धता जोखिम को नहीं उठाता है। आइए पेपर गोल्ड में निवेश के विकल्प देखें।

■~ गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) -गोल्ड ईटीएफ सोने के मालिक होने का सबसे किफायती तरीका है। गोल्ड ईटीएफ को स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई या बीएसई) के माध्यम से खरीदा जा सकता है, जिसमें अंतर्निहित संपत्ति के रूप में सोना होता है। मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता एक और लाभ है।

■~ ईटीएफ में निवेश करने के लिए आपके पास एक ट्रेडिंग और एक डीमैट खाता होना चाहिए जो वही है जो स्टॉक रखने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे इंडिया इंफोलाइन iifl में ऑनलाइन भी खोल सकते हैं।

■~ ईटीएफ चुनते समय, फंड प्रबंधन शुल्क और अन्य ईटीएफ के साथ ईटीएफ की ट्रैकिंग त्रुटि की तुलना करें और सबसे कम फंड प्रबंधन शुल्क (आपके लिए ईटीएफ के प्रबंधन के लिए खर्च) और सबसे कम ट्रैकिंग त्रुटि (सोने की कीमतों से विचलन) के साथ चुनें। यह सुनिश्चित करता है कि आपको वास्तविक सोने की कीमतों से कम से कम विचलन के साथ अपने सोने के निवेश पर रिटर्न मिले।

■~ गोल्ड म्यूचुअल फंड–:यदि आपके पास ट्रेडिंग और डीमैट खाता नहीं है, तो आप गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं! गोल्ड ईटीएफ की तरह, सबसे कम फंड प्रबंधन खर्च और ट्रैकिंग त्रुटि के साथ गोल्ड म्यूचुअल फंड चुनें।

■~ जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड आपको बिना ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट के सोने की अनुमति देते हैं, आप म्यूचुअल फंड के साथ-साथ गोल्ड ईटीएफ को भी दो बार फंड मैनेजमेंट चार्ज देते हैं।

■~ डिजिटल गोल्ड–:आप मोबाइल वॉलेट्स जैसे पेटीएम, फोनपे, गूगल पे और भारत के स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन के गोल्ड रश प्लान के तहत ऑनलाइन खरीद सकते हैं। इन सभी सोने की खरीद के विकल्प या तो MMTC-PAMP या SafeGold या दोनों के साथ मिलते हैं।

■~ यह एक अच्छा विकल्प है कि सोने में थोड़ी मात्रा में INR कम से कम 1 ग्राम सोने के रूप में निवेश किया जाए। हालांकि, आप सोने को 5 साल तक अपने पास रख सकते हैं, इसके बाद आपको या तो सोना बेचना चाहिए या फिर इसे सोने के सिक्कों में बदलना होगा। डिजिटल गोल्ड के बारे में अधिक जानकारी गूगल पर भी उपलब्ध है।

■~ सुनिश्चित करें कि आप इस विकल्प के माध्यम से सोने में निवेश करते समय आपके द्वारा जमा की गई राशि को रोकते हैं।

■~ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड:- -यदि आप अपने निवेश के लिए 8 साल का लॉक-इन नहीं मानते हैं, तो सोने में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका भारत सरकार द्वारा जारी सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड्स (SGBs) लेवें।

■~ इस मोड के माध्यम से सोने पर रिटर्न टैक्स-फ्री निवेश है क्योंकि इन बॉन्ड की परिपक्वता पर पूंजीगत लाभ पर कोई कर नहीं लगाया जाता है। इसके अलावा, आप सोने की कीमतों में वृद्धि के अलावा स्वर्ण बांड पर प्रति वर्ष 2.5% का साधारण ब्याज भी अर्जित करते हैं।

■~ यदि आप मूल्य प्रशंसा के लिए गोल्ड में अपने पैसे का निवेश करना चाहते हैं तो SGB एक खतरा रहित अच्छा निवेश विकल्प है।

■~ SGB ​​’ऑन-टैप आधार’ पर उपलब्ध नहीं हैं। इसके बजाय, सरकार निवेशकों को SGB की नई बिक्री के लिए रुक-रुक कर एक खिड़की खोलती है।■~ यह आमतौर पर हर 2-3 महीने में हो सकता है और लगभग एक सप्ताह तक खिड़की खुली रहती है। यदि आप SGBs को कभी भी बीच में खरीदना चाहते हैं, तो आप उन्हें द्वितीयक बाजार से खरीद सकते हैं क्योंकि SGB स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं।

■~ गोल्ड खरीदने के लिए आपके पास काफी कुछ विकल्प हैं। अब, आपको कौन सा विकल्प चुनना चाहिए यह सोने की खरीद की आवश्यकता पर निर्भर करेगा? यदि आप शादी के कार्यों के लिए इसे गहने या उपहार के रूप में पहनने के लिए सोना खरीदना चाहते हैं तो भौतिक सोने के लिए रास्ता है।

हालांकि, अगर आप गोल्ड में निवेश करना चाह रहे हैं, तो आपके द्वारा दिए गए समय अवधि के आधार पर – अल्पकालिक जरूरतों (जैसे 3 – 4 वर्ष) के लिए, आप लंबी अवधि की जरूरतों के लिए गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड म्यूचुअल फंड में कम से कम 6 से 8 वर्ष के निवेश का विकल्प चुन सकते हैं।फिलहाल कुछ समय और इंतजार करें। सोना अभी एक बार 44 या 45000/- प्रति 10 ग्राम के आसपास आएगा।

फिर इसे 65 या 70 हजार को छूना ही है। अभी दो साल तक गोल्ड के भाव 45 हजार से नीचे जाने वाले नहीं हैं।हाल के अतीत के अच्छे रिटर्न को देखते हुए सोने के निवेश के साथ ओवरबोर्ड जाने से बचें और अपने एसेट आवंटन से चिपके रहें।

गोल्ड हमेशा 24 कैरेट का ही खरीदें। बाजार में 22 कैरेट के भी सिक्के मिलते हैं। एक कैरेट में लगभग 4.16 होता है। 22 कैरेट का यदि 100 ग्राम का सिक्का लेते हैं, तो पैसे 100 ग्राम के लगेंगे और गोल्ड करीब 91.63 ग्राम मिलेगा।ध्यान रखे स्वर्ण में ठगी बहुत होती है। पक्के बिल में लें तो बहुत सुरक्षा रहती है। भले ही 3% gst लग जाये।

1920 में 10 से 12 रुपये 10 ग्राम और 1947 में सोने का भाव 100 रुपए से भी कम था।

1995 में 4500/- सन 2000 हजार में तथा 2002 तक भी यही रेट था। आज लगभग 52000/-रुपये प्रति 10 ग्राम है। आप खुद ही केलकुलेशन लगा लीजिये कि जिन्होंने सन 2000 में 10000/- रुपये निवेश किये थे , वे आज 1लाख 4000 के मालिक हैं मात्र 218–20 सालों में 90 गुना फायदा हुआ।

सोने की कीमत कभी नहीं घटने वाली यह सन्सार का सबसे सुरक्षित निवेश है, जो लोग बैंक में पैसा डालकर रखते हैं, उन्हें स्वर्ण में निवेश करना चाहिए।

सोने में निवेश सदैव लाभकारी होता है। यह रहस्य केवल महिलाओं को मालूम है।

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