कुन्तल का इतिहास-

कुन्तल का इतिहास

महाभारत में कुन्तल/kuntal नाम के तीन प्रदेशों का उल्लेख है :–

मध्य देश में काशी-कोशल (UP) के निकट। समझा जाता है कि यह चुनार के आसपास का प्रदेश था।

आज का कर्नाटक (दक्षिण) में कृष्णा नदी के निकट। अनेक पुराणों में कर्णाटक को कुंतल देश कहा गया है। अजंता के एक अभिलेख में वाकाटक नरेश के कुंतलेश्वर विजय का उल्लेख है। राजकेसरी वर्मा राजेंद्र चोल के एक कुंतलेश्वर विजय का उल्लेख है। राजकेसरी वर्मा राजेंद्र चोल के एक अभिलेख में कुंतलाधिप के पराभव की चर्चा है। मैसूर प्रदेश से मिले एक अभिलेख से ऐसा प्रतीत होता है। कि वह कुंतल जनपद के अंतर्गत था।
कोंकण (गोवा) के निकट। पश्चिमी चालुक्य वंश के अनेक अभिलेखों में उन्हें कुंतल-प्रभु कहा गया है। ग्यारहवीं बारहवीं शती के अनेक अभिलेखों में कुंतल देश का उल्लेख हुआ है जिनसे अनुमान होता है कि इस देश के अंतर्गत भीमा और वेदवती नदी के काँठे तथा शिमोगा;/शिवमोक्षा, चितल दुर्ग या चित्र दुर्ग,  बेलारी, धारवाड़, बीजापुर ये सब कर्नाटक राज्य  के जिले रहे होंगे। कुछ लोग कुंतल की अवस्थिति वर्तमान कोंकण प्रदेश के पूर्व, कोल्हापुर के उत्तर, हैदराबाद के पश्चिम कृष्णा मालपूर्वी और वर्धा नदी के काँठे तक तथा अदोनी जिले के दक्षिण मानते हैं।

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