क्या दिन में सोना दिमाग के लिए नुकसान दायक है?

Spread the love
आयुर्वेदिक नियमों के अनुसार दिन में

सोने से अवसाद अर्थात डिप्रेशन, तनाव, चिड़चिड़ापन आने लगता है। दिमाग कमजोर होने लगता है।

याददाश्त की कमी भूलने की आदत पड़ने लगती है। इसलिए दिन में सोने की मनाही है। लेकिन

रात में पर्याप्त नींद न आने से घटती है-इम्युनिटी…

जाने-आयुर्वेद का मस्तिष्क ज्ञान…

5 हजार साल पहले आयुर्वेद वैज्ञानिक आचार्य चरक ने भी अपने ग्रन्थ चरक सहिंता में उल्लेख किया है कि-

मानव का मस्तिष्क प्रकृति की उत्कृष्ट रचना है और तन का सबसे आवश्यक और जटिल अंग है। यह बिल्कुल महाभारत के चक्रव्यूह जैसा है।

इसमें में लगभग 100 करोड़ (१,००,००,००,०००) तंत्रिका, कोशिकाएं होती है, जिनमें से प्रत्येक अन्य तंत्रिका कोशिकाओं से १० हजार (१०,०००) से भी अधिक संयोग स्थापित करती हैं।

मानव मस्तिष्क इच्छाओं, संवेगों,

मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, चेतना, ज्ञान, अनुभव, व्यक्तित्व इत्यादि का केन्द्र भी होता है।

मानव मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र के शीर्ष पर

स्थित यह अंग शरीर की सभी क्रियाओं

को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित

करता है। यह संरचनात्मक रूप में जटिल

और क्रियात्मक रूप में जटिलतम होता है।

मस्तिष्क वैज्ञानिक (ब्रेन साइंटिस्ट)

मैट वॉकर द्वारा रचित पुस्तक

“वाय वी स्लिप”

किताब में शोध (रिसर्च) करके दिमाग

की कारगुजारियों के बारे में लिखा है

कि-नींद पूरी न हो, तो दूसरे दिन शरीर की

रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी

में 70 फीसदी तक कमी आ जाती है।

“मस्तिष्क नाड़ी सहिंता” के अनुसार

नींद का हमारी जीवनीय शक्ति,

जीने की उमंग अर्थात इम्युनिटी

सिस्टम से सीधा वास्ता है।

गहरी नींद न आने के कारण

प्राकृतिक हत्यारे जीवाणु यानि

किलर सेल्स हमारे इम्युन सिस्टम में

गुप्त प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं।

ये किलर सेल्स देह को हानि पहुंचाने

वाले घटक तत्वों को दूर रखते हैं।

लेकिन दिन में सोने तथा रात को अपर्याप्त नीद की वजह से ये किलर सेल्स अपना काम ठीक से नहीं कर पाते।

कैसे सहेजता है मस्तिष्क-आंकड़ों का अंबार

भारतीय वैज्ञानिक ने खोजा….

भारतीय विज्ञान संस्थान के सेंटर फॉर

न्यूरोसाइंस से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता

प्रोफेसर देवराजन श्रीधरन ने बताया

कि मानव मस्तिष्क में लगातार सूचनाएं

प्रवाहित होती रहती हैं। ध्यान मस्तिष्क से जुड़ी एक ऐसी प्रक्रिया है जो प्रासंगिक सूचनाओं को संसाधित करती है और किसी तरह के भटकाव से बचाकर गहरी और अच्छी नींद लाने में सहायक है। रात में कमजोर, कच्ची नींद और दिन में सोने की आदत दिमाग को दिनों-दिन बुद्धि-विवेक हीन बना देती है।

हमारी याददाश्त दुरुस्त न रहने का कारण भी समय पर नींद न आना है। “वाय वी स्लिप” पुस्तक के लेखक मैट वॉकर ने अपने एक प्रयोग के तहत कुछ युवाओं को रात में केवल 4/चार घण्टे ही सोने दिया।

दिन में दो घण्टे सुलाया, तो अगले दिन जांचने पर ज्ञात हुआ कि प्राकृतिक हत्यारी कोशिकाओं यानि नेचुरल किलर सेल्स एक्टिविटी में 70% तक गिरावट आई। दिमाग में सुस्ती छाई रही।

अधूरी नींद के नुकसान…

¶~ पूरी या अच्छी नींद न लेने से शरीर

में अनेक असाध्य-अज्ञात बीमारियां

अपना घर बना लेती हैं।

¶~ कम सोने से कर्कट रोग (केन्सर)

जैसा कष्टदायक रोग हो सकता है।

¶~ शुक्राणु या स्पर्म क्षेत्र (प्रोस्टेट) में सूजन, पानी भर सकता है।

¶~ प्रदाहक आन्त्र रोग {आईबीडी/IBD} बृहदान्त्र यानि बॉवेल जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

¶~ महिलाओं, लड़कियों को स्तन की सूजन (ब्रेस्ट) में तकलीफ की आशंका रहती है।

¶~ इंसान का स्वभाव चिड़चिड़ा, क्रोधी हो जाता है।

¶~ समय पर भूख नहीं लगती।

¶~ वात-पित्त-कफ विषम हो जाता है।

¶~ पेट में कब्जियत बनी रहती है।

¶~ उदर में जलन, गर्मी रहती है।

¶~ व्यक्ति उदास और तनावग्रस्त रहता है।

¶~नींद पूरी न हो, तो दिमाग का नर्वस सिस्टम कमजोर होकर इनबॉक्स खाली रहता है….

बुद्धि वैज्ञानिक श्रीधरण ने बताया कि-

मस्तिष्क के बायीं-दायीं (लेफ्ट-राइट)

मस्तिष्क जन्तुओं के केन्द्रीय तंत्रिका

तंत्र का नियंत्रण केन्द्र अर्थात

हिप्पोकैम्पस नाम का घटक होता है।

इसे सूचनाओं का ज्ञान संग्रहित करने

का स्थान [इनबॉक्स] कह सकते हैं।

यह नई आंकड़ों को एकत्र करने वाली कोशिकाओं मतलब मेमोरी फाइल्स को प्राप्त (रिसीव) कर सुरक्षित करने में माहिर होता है।

कम सोने वालों के दिमाग में कोई भी ज्ञान लम्बे समय तक ठहर या सुरक्षित नहीं रह पाता।

पर्याप्त अच्छी नींद के फायदे-

अच्छी नींद लेने वाले युवाओं को

दिमागी ध्वनि या तरंग ब्रेनवेव्स बहुत ही ताकतवर होती है। इनकी याददाश्त भी तीव्र, तेज एवं मजबूत होती है।

आयुर्वेद के प्राचीन शास्त्रों के मुताबिक कुछ भी ज्ञान एकत्रित करने और सीखने के पहले दिमाग को तैयार करना जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त सोना आवश्यक होता है।

जैसे सूखा स्पंज पानी सोख लेता है। अनिंद्रा मस्तिष्क भी पानी से भरे स्पंज की तरह ही होता है।

कच्ची नींद होने से दिमाग वह नवीन ज्ञान अथवा नई चीजें सीखने में असमर्थ होता है।

क्या करें उपाय या उपचार…

■ रात को सोने से पूर्व अपने मस्तिष्क में गन्दे विचारों को आने से रोके।

■ रात में ब्लूफिल्म, फूहड़ चित्रहार न देखें।

■ किसी महिला दोस्त या गर्लफ्रैंड से ज्यादा समय तक बात न करें।

■ रात को खाने के बाद 1 घण्टे तक पैदल घूमें/चलें।

■ मोबाइल का उपयोग कम करें

■ रात को वीडियो गेम न खेलें।

■ चैटिंग न करें

■ बिस्तर पर सीधे लेटकर कम से कम 50 बार गहरी-गहरी सांसे धीरे-धीरे लेकर छोड़े।

■ रात सोने से पहले अधिक से अधिक पानी पियें।

■ सोते समय मुख, हाथ-पैर धोएं।

■ हो सके, तो अपने इष्ट, गुरु, कुलदेवता, माता पिता का स्मरण ध्यान करें।

■ ॐ नमःशिवाय च शिवाय नमः का जाप करें।

■ सुबह जल्दी सोकर उठे।

■ सुबह उठते ही आंखें धोएं।

■ प्रातः दसरथ रूपी देह की कसरत करें।

■ रोज पूरे शरीर में अमृतम काया की मसाज आयल से अभ्यंग कर स्नान करें।

■ बिना स्नान किये भोजन आदि न लेवें।

गहरी नींद लाने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अपने भोजन में जोड़े पांच-5 आवश्यक आयुर्वेदिक ओषधियाँ….

【१】ब्रेन की गोल्ड माल्ट

2 से 3 चम्मच में आधा चम्मच

【२】अमृतम जटामांसी चूर्ण/पाउडर मिलाकर गुनगुने दूध के साथ सुबह खाली पेट सेवन करें।

【३】ब्रेन की गोल्ड टेबलेट

शाम को 2 गोली दूध या जल से लेवें।

【४】अमृतम टैबलट 2 गोली

रात को सोने से पहले सादे जल से लेवें।

【५】अमृतम गुलकन्द

दुपहर खाने से पहले या बाद में अथवा भोजन के साथ खाएं।उपरोक्त पांचों दवाएँ नियमित 3 से 6 महीने तक लेवें।

क्या होंगे फायदे…

@ इससे आपको नींद तो अच्छी आएगी ही साथ में मन-मस्तिष्क में आनंद और प्रसन्नता का अनुभव करेंगे।

@ धीरे-धीरे याददाश्त तेज होने लगेगी।

@ चिन्ता, तनाव, अवसाद, डिप्रेशन से मुक्ति मिलेगी।

@ सोच सकारात्मक होने लगेगी।

@ डर-भय-भ्रम का नाश होगा।

ब्रेन की गोल्ड के घटक-द्रव्यों,

फार्मूला आदि के बारे में ज्यादा

जानने के लिए अमृतम पत्रिका

के पुराने ब्लॉग ऑनलाइन पढ़ें-

अमृतम जटामांसी चूर्ण के लाभ..

अमृतम जटामांसी चूर्ण पाचन शक्ति ठीक रखने में सहायक है। तनाव, डिप्रेशन को दूर करने में चमत्कारी और एक जानीमानी औषधि है।

¶~ एक रिसर्च के अनुसार जटामांसी में एंटी-डिप्रेशन का गुण पाया जाता है। …

¶~ जटामांसी रोगप्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए एक अच्छा उपचार है।

¶~ जटामांसी मस्तिष्क और नाड़ियों के रोगों के लिए ये राम बाण औषधि है,

¶~ ये धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है।

¶~ पागलपन , हिस्टीरिया, मिर्गी,

¶~ नाडी का धीमी गति से चलना,

¶~ मन बेचैन होना,

¶~ याददाश्त कम होना,

इन सारे रोगों की यही अचूक दवा है।

¶~ अमृतम जटामांसी त्रिदोष को भी शांत करती है।

¶~ और सन्निपात के लक्षण ख़त्म करती है।

One thought on “क्या दिन में सोना दिमाग के लिए नुकसान दायक है?”

  1. ये पढ़ कर बहुत बहुत अच्छा लगा 👌🏻👌🏻👌🏻🌹🌹🌹🌹🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *