क्या आयुर्वेद में यौन शक्ति में वृद्धि का कोई इलाज है? “?

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आयुर्वेद की काम शक्तिवर्द्धक ओषधियाँ

शुक्राणु, काम शक्ति वृद्धि एवं वीर्य स्तंभन हेतु एक अद्भुत अमृतम योग श्री काशी संस्कृत “ग्रंथमाला” 161 के “वनोषधि-चंद्रोदय” भाग-2 (*AN ENCYCLOPAEDIA OF। INDIAN BOTANIES & HERBS) *लेखक-
*श्री चन्द्रराज भण्डार*
‘विशारद’प्रकाशक- चौखम्बा संस्कृत संस्थानवाराणसी-221001 (भारत)
एवं दूसरी पुस्तक औषधीय पादपों का कृषिकरण
लेखक- डॉ.गुरपाल सिंह जरयाल।

डॉ.मायाराम उनियाल।
प्रकाशक- इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रो बिसिनेस प्रोफेसनल आदि इन किताबों में सेक्स संतुष्टि के बहुत ही उम्दा तुरन्त असरदायक हर्बल योगों का वर्णन है।
सहवास के सरताज
बनाने के लिए एकप्राकृतिक फार्मूला घर में बनाकर उपयोग कर सकते हैं-
√ 100 ग्राम धुली उड़द की दाल
√ 200 ml प्याज के रस में डालकर 24 घंटे तक फुलाएं। फिर, दाल को सुखाकर रख लें। प्रतिदिन
15 से 20 ग्राम दाल
दूध की खीर बनाकर सुबह खाली पेट खाएं दुपहर में खाने से एक घंटे पूर्व
◆ 3 ग्राम ईसबगोल का पाउडर
◆ 1 ग्राम सालम मिश्री
◆ 1 ग्राम पिसी मुलेठी
◆ 1 ग्राम शतावर
◆ 1 ग्राम अश्वगंधा
सबकी मिलाकर खावें फिर, 100 या 200 ग्राम गर्म दूध ऊपर से पियें। रात्रि में सोते समय खाने से 1-2 घण्टे पहले
¶ बी.फेराल गोल्ड केप्सू
¶ बी.फेराल गोल्ड माल्ट
2 चम्मच गर्म दूध के साथ 15 दिन तक सेवन करें।
नपुंसकता से निराश व नर्वस हो चुके पुरुषों के लिए यह बेहद लाभकारी ऒर चमत्कारी दवा है। यह अद्भुत योग
चालीस के बाद शरीर को खाद
देकर-पचास की उम्र में भी खल्लास
नही होने देता।
शुक्राणुओं की वृद्धि करता है
बी फेराल माल्ट तथा कैप्सूल
परम् प्रसन्नता देने वाला प्रकृति प्रदत्त यह शुद्ध
हर्बल बाजीकरण
योग है, जो नंपुसकता का नाश कर
कामातुर रमणियों, स्त्रियों में काम की कामना शांत करता है। यह वीर्य को गाढ़ा करने एवं सहवास के समय में वृद्धि करने वाले अनेकों प्रामाणिक प्रयोगों निर्मित है।
यह इतना उपयोगी है कि – –
साठ के बाद खाट और
सत्तर के पश्चात बिस्तर
पर नहीं पड़ना पड़ता। यह देशी दवा अनेकों रोग मिटाकर जीवनीय शक्ति में बढोत्तरी कर जीव व
जीवन का कायाकल्प कर देती हैं।

आयुर्वेद में यौन शक्तिवर्धक, पुरुषार्थ में वृद्धि करने वाली अनेकों ओषधियों, जड़ीबूटियों का उल्लेख आयुर्वेद सार संग्रह,

भावप्रकाश,

द्रव्यगुण विज्ञान,

भारत भेषजयरत्नावली आदि ग्रंथों में मिलता है। इन चमत्कारी ओषधियों को अमृत या अमृतम बताया गया है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा या ओषधियाँ कभी तुरन्त असरकारक नहीं होतीं। किसी भी दवा को यदि एक से तीन माह तक सेवन करेगा, तभी इनके फर्क का अनुभव कर सकेगा।

आयुर्वेद शरीर की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली को ठीक करता है, उसके बाद ही सम्बंधित दवा का असर होना आरम्भ होता है। एक तरीके से आयुर्वेद देह के सिस्टम को ठीक करने में कारगर है। जो लोग चमत्कार के चक्कर में आयुर्वेद से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें निराश ही हाथ लगती है।

वर्तमान में कुछ कम्पनियां आयुर्वेद के नाम पर रसायनिक घटक-द्रव्यों ला उपयोग कर र्गइं हैं, जो अत्यंत हानिकारक है। कृपया इसे बचें।

आपको शास्त्रमत कुछ ओषधियों के नाम बता रहे हैं, जो बिना किसी नुकसान के यौन शक्ति की वृद्धि करती हैं।

यौन शक्ति में वृद्धि करने वाली-जड़ीबूटियाँ—

◆~ अमृतम अश्वगंधा

◆~ अमृतम सहस्त्रवीर्या

◆~ अमृतम शुद्ध शिलाजीत

◆~ शुद्ध गूगल

◆~ सफेद मूसली,

◆~ कौंच बीज

◆~ सेमल मूसली

◆~ मोरंगा

◆~ जटामांसी

◆~ अमृतम त्रिफला

◆~ अमृतम बादाम पाक

◆~ इमली बीज

◆~ विदारी कन्द

◆~ मुलेठी

◆~ गूलर

◆~ गोरखमुंडी

◆~ छुआरा

◆~ कर्णफूल

◆~ नागबला

◆~ हरीतकीL

◆~ भांग

◆~ गांजा

◆~ अहिफेन

◆~ ब्राह्मी

◆~ कुचला

◆~ भिलावा

◆~ केशर

आयुर्वेदिक ओषधियाँ—

∆~ बसन्तकुसुमाकर रस स्वर्णयुक्त

∆~ शिलाजित्वादी वटी

∆~ बी फेराल गोल्ड माल्ट

∆~ बी फेराल गोल्ड कैप्सूल

∆~ अमृतम अश्गन्धा चूर्ण

∆~ अमृतम शतावर चूर्ण

∆~ अमृतम त्रिफला चूर्ण

∆~ अमृतम जटामांसी चूर्ण

∆~ शुद्ध कजली

∆~ सिद्ध मकरध्वज स्वर्णयुक्त

∆~ जातिफलादि वटी स्तम्भक

∆~ अमृतम च्यवनप्राश

∆~ अमृतम स्वर्ण भस्म

∆~ शुक्रमातृका वटी

∆~ अश्वगंधा पाक

∆~ मदनानंद मोदक

∆~ अमृतम धातुपौष्टिक चूर्ण

∆~ मदनप्रकाश चूर्ण

∆~ अश्वगंधारिष्ट

∆~ महालाक्षादि तेलम

∆~ अमृतम कुंकुमादि तेल

∆~ आंवला मुरब्बा

∆~ चन्द्रप्रभा वटी।

अब जाने-क्यों जरूरी है यौन शक्ति को बढ़ाना—

शरीर में पर्याप्त मात्रा में वीर्य होने से व्यक्ति वीर, शक्तिशाली, आत्मविश्वासी बना रह सकता है। यौन शक्तिवर्धक दवाएं जल्दी बुढापा आने से रोकती हैं।

माधव निदान ग्रन्थ के अनुसार 40 की उम्र से यौन शक्ति की वृद्धि करने वाली दवाओं का सेवन करना नितांत जरूरी है अन्यथा अनेक ज्ञात-अज्ञात रोग देह में सेंध लगाने शुरू कर देते है।

वीर्य की बूंदे व्यक्ति के लिए बहुत कीमती हैं, जो आजकल के युवा बर्बाद कर रहे हैं। वीर्य के रहने तक ही व्यक्ति वीर-बलवीर, बलशाली बना रहता है।

आयुर्वेद की शक्ति उर्वरक ओषधियाँ खाने से बहुत से अनजाने रोगों से तन की रक्षा होने लगती है।

क्यों जरूरी है — काम (सेक्स)

सृष्टि में आदि काल से सम्भोग का मुख्य काम वंश को आगे चलाना व बच्चे पैदा करना है। जहाँ कई जानवर व पक्षी सिर्फ अपने बच्चे पैदा करने के लिए उपयुक्त मौसम में ही सम्भोग करते हैं , वहीं इंसानों में सम्भोग का कोई समय निश्चित नहीं है।

इंसानों में सम्भोग बिना वजह के भी हो सकता हैं। सम्भोग इंसानों में

मानसिक सुख प्राप्ति या प्यार या जज्बात

दिखाने का भी एक रूप हैं।

सम्भोग अथवा मैथुन से पूर्व की क्रिया, जिसे अंग्रेजी में फ़ोर प्ले कहते हैं इसके दौरान हर प्राणी के शरीर से कुछ विशेष प्रकार की गन्ध (फ़ीरोमंस) उत्सर्जित होती है जो विषमलिंगी को मैथुन के लिये अभिप्रेरित व उत्तेजित करती है।

¶ काम (सेक्स)का आनंद सबसे बड़ी शुभकामना है।

¶ काम की शांति से ही सदभावना सहज-सरल हो पाती है।

¶ काम (सेक्स) की पूर्ति एक ऐसी दवा है, जिसके उपभोग और उपभोग से

●क्रोध, ●चिड़चिड़ापन, ●मानसिक क्लेश, ●अशान्ति, ●मनो-विकार दूर होकर शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है।

¶ काम (सेक्स) का जाम (नशा) है , जिसने चखा ,वो दुखी और जिसने नहीं चखा वह भी दुखी-पीड़ित रहता है।

¶ संसार में काम से ही सब ताम-झाम है।

सारे काम (कर्म) का कारण काम (सेक्स) है।

¶ काम की वजह से पीढ़ी दर पीढ़ी नाम

चल पाता है।

¶ काम के कारण प्राणी नये-नये कलाम (उक्ति या बातचीत) पढ़कर सबको सलाम करता है।

¶ पूजा-पाठ , ठाठ-बाट , संपति-संवृद्धि,

ऐश्वर्यादि का कारक काम (सेक्स) है।

¶ सृष्टि में सभी तरह के कष्ट-क्लेश, दुःख-दारिद्र , लड़ाई-झगड़े , खून, कानून, विधान , संविधान काम की कामना से प्रेरित होकर होते हैं।

श्रृंगार शतक में लिखा है कि—

आदिकाल से काम से बड़ा कोई धर्म या कर्म

नहीं है।

【】काम (सेक्स) परम आनंद है।

【】कामवासना की उपासनासे शरीर में उमंग-ऊर्जा बनी रहती है। रोग नहीं सताते।

【】काम की गति से व्यक्ति गतिमान एवं महान बनता है।

【】काम ही मति (बुद्धि) है , तभी तो श्रीमती

(पत्नी) आने के बाद आदमी की गति-मति (स्वविवेक) बदल जाती है। अपने-पराये समझ आने लगते हैं

【】विवाह पश्चात काम (सेक्स) की संतुष्टि के बाद ही व्यक्ति की दशा , ग्रहों की महादशा

, और दिशा में परिवर्तन होता है , इसीलिए “शादी का उल्टा “दिशा” कहलाता है।

【】”काम तरँगणि” नामक प्राचीन पुस्तक में उल्लेख है कि- काम पर लगाम लगाने से व्यक्ति पेट तथा हृदय की नाड़ी जाम होने लगती है।

【】काम की कमी से शरीर की कोशिकाएं शिथिल , कमजोर होकर काम करनाकम कर देती हैं। अनेक बीमारियों उसे घेर लेती हैं। सुबह हो या शाम, काम से परेशान व्यक्ति सदैव दुःखी रहता है।

【】 काम (सेक्स) के बिना तन का पतन

हो जाता है।

【】काम एक अनमोल रत्न है, जो मन-मस्तिष्क को शांतिदायक है।

पुरानी एक गन्दी कहावत है कि-

बुद्धि की शुद्धि केवल फुद्दी (योनि) से होती है।

क्या कहना है ? कामशास्त्र का- – –

{} काम (सेक्स) भाग्य-दुर्भाग्य का निर्माण करता है।

{} काम (सेक्स) भोग-योग , जप-तप, यंत्र-मंत्र-तंत्र है।

{} काम बिना मानव मन, बे-मन होकर तन-मन की तासीर बिगाड़ लेता है।

{} काम के तीर, पीर (तकलीफ) दर्द देते रहते हैं।

{} काम को अनुष्ठानमानना चाहिए न कि चुदाई। सेक्स की पूर्ण आहूति के बाद ही शारीरिक-मानसिक आधि-व्याधि दूर होकर आनंद की प्राप्ति हो पाती है।

क्या कहते हैं — धर्मग्रंथ

सेक्स (काम) के इतिहास में प्राचीनकाल से ही

भारत की भूमिका अति महत्वपूर्ण रही है क्योंकि भारत में ही सबसे पहले कामग्रन्थ (सेक्स बुक) “कामसूत्र” की रचना हुई जिसमें संभोग को धर्म एवं विज्ञान के रूप में देखा गया। लाखों वर्षों से “कामकला” साहित्य के माध्यम से यौन शिक्षा

(सेक्स एजुकेशन) का अग्रदूत (गुरु) भारत ही रहा है। इस ग्रंथ में बताया है कि काम/सेक्स भी एक कला है।

कामसूत्र” का नाम सुनते ही लोग सचेत हो जाते हैं, इस शब्द का उपयोग करने से हर कोई कतराता है। ना केवल इस ग्रंथ को, बल्कि

कामसूत्र शब्द और बुर दोनों को ही बुरा माना गया है। जबकि हकीकत यह है कि किसी भी अन्य हिन्दू ग्रंथ की तरह ‘कामसूत्र’ भी महज एक ग्रंथ है जिसमें जनमानस के लिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गई हैं।

काम (सेक्स) है क्या बला-

इस लेख में काम (सेक्स) के बारे में काम की बातें जानना जरूरी है।

सुलझाएं : “ग्रंथो की ग्रन्थियां”

काम के लिये संस्कृत भाषा में बहुत कुछ लिख गया। कुछ अंश प्रस्तुत हैं :

शतायुर्वै पुरुषो विभज्य कालम्

अन्योन्य अनुबद्धं परस्परस्य

अनुपघातकं त्रिवर्गं सेवेत।

(कामसूत्र १.२.१)

बाल्ये विद्याग्रहणादीन् अर्थान् (कामसूत्र १.२.२)

कामं च यौवने (१.२.३)

स्थाविरे धर्मं मोक्षं च (१.२.४)

संस्कृत के पुराणोक्त इन श्लोकों का सार अर्थ यही है कि पुरुष को सौ वर्ष की आयु को तीन भागों में बाँटकर

**●** बाल्यकाल (बचपन) में विद्या ,

**●** युवावस्था में अर्थ (धन-सम्पदा) का अर्जन अर्थात कमाई या संग्रह करना चाहिये,

**●** काम (सेक्स) की पूर्ति या तृप्ति यौवनकाल में तथा

**●** बुढ़ापे में धर्म और मोक्ष का अर्जन करना चाहिये।

कामसूत्र’ की कुछ अनजानी बातें

1 – सनातन धर्म में कई ऐसे शास्त्रीय ग्रंथ , पुराण और भाष्य हैं, जिनमें मनुष्य के अच्छे भविष्य और जीवन सुधार हेतु अदभुत ज्ञान भरा पड़ा है। इन ग्रंथो के अनुसार शास्त्रीय बातों का ध्यान रखकर मनुष्य सफल जीवन जी सकता है। कामसूत्र में भी ऐसी ही बातें लिखी हुई हैं, जो मनुष्य और समाज के लिए बहुत फायदेमंद है। समाज ने भले ही इसे ‘हौवा’ बना दिया हो, किंतु सच्चाई इससे परे है।जबकि जीवन में ‘काम’ यानी संभोग का होना भी आवश्यक माना गया है।

निर्देश है कि सेक्स के मामले कभी जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। लम्बे समय तक सम्भोग की इच्छा हो , तो प्राकुतिक चिकित्सा या आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करना हितकर होता है।

शुद्ध शिलाजीत, तालमखाना, सहस्त्रवीर्या, वंग भस्म , स्वर्ण भस्म , युक्त ओषधियाँ उत्प्रेरक होती हैं जो हमेशा सेक्स की इच्छा बनाये रखती हैं

**ऐसा ही एक योग है,**

**बी फेराल गोल्ड माल्ट एवं केप्सूल**

, जो आयुर्वेद की असरदार जड़ीबूटियों से निर्मित है। इसका नियमित उपयोग करने से

सेक्स की इच्छा दिनोदिन बढ़ती जाती है। शरीर में चुस्ती फुर्ती रहती है।

सेक्स के प्रति यह हमेशा शक्ति व ऊर्जा में बनाये रखता है।

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