कैसे करें जुकाम का काम- तमाम

कैसे करें जुकाम का काम- तमाम
नये-पुराने और जिद्दी यानि क्रोनिक जुकाम का जरूरी है- पक्का इलाज…
 
बदलते मौसम के चलते लोगों को कई तरह की बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं. ख़ासतौर से खांसी, जुखाम और बुखार ने ज़्यादातर लोगों को परेशान किया हुआ है. कई लोग, इन छोटी-छोटी बीमारियों पर न ध्यान देते हुए किसी भी मेडिकल स्टोर्स से जाकर दवाई ले लेते हैं, तो कई बिना दवाई लिए घर पर देसी इलाज द्वारा इन समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं।
जाने इस लेख में जुकाम के बारे में…
 
नासिका और फेफड़ों के संक्रमण है-ज़ुकाम
यह बीमारी मनुष्यों में बहुत प्राचीन समय से चली आ रही है। ज़ुकाम नाक और गले का एक आम वायरल यानि विषाणुजनित संक्रमण है।
ज़ुकाम क्यों होता है, कैसे होता है  इसके होने के कारण की पहचान सन 1950 के दशक में हुई थी।
युनाइटेड किंगडम UK में, द कॉमन कोल्ड यूनिट (CCU) की स्थापना 1946 में मेडिकल रिसर्च काउंसिल द्वारा की गई थी और यहीं पर 1956 में राइनोवायरस खोजा गया था।
फ़्लू के विपरीत, जुकाम अलग-अलग तरह के वायरस के कारण हो सकता है।
ज़ुकाम के समय 200 से अधिक वायरस तन को घेर लेते हैं। इसे नैसोफेरिंजाइटिस नाम से भी जाना जाता है।
ज़ुकाम होने के फायदे भी हैं…
 आयुर्वेद के अनुसार ज़ुकाम होने से पित्त का निष्कासन हो जाता है, जो बहुत हितकारी है। ज़ुकाम यदि 5 से 7 दिन तक रहे, तो यह अधिकांशत:  यह हानिरहित होता है और दो सप्ताह के भीतर जुकाम के लक्षण आमतौर पर खत्म हो जाते हैं।
सर्दी-जुकाम के लक्षण.
लगातार बहती नाक, छींकना बार-बार छींक आना और नाक बंद होना शामिल हैं। कभी-कभी विशेष रूप सेे बच्‍चों में जुकाम की वजह से तेज़ बुखार या गंभीर लक्षण दिखाई देवें, तो समझे शरीर में रोगप्रतिरोधक Immunity क्षमता की भारी कमी हो चुकी है। यह आयुर्वेद ग्रंथों का कथन है।
ज़ुकाम बच्चों के  श्वसन तन्त्र को जल्दी संक्रमित कर देता है…
ज़ुकाम को नैसोफेरिंजाइटिस, 
राइनोफेरिंजाइटिस, अत्यधिक नज़ला या ज़ुकाम के नाम से भी जाना जाता है। यह ऊपरी श्वसन तंत्र का आसानी से फैलने वाला संक्रामक रोग है जो अधिकांशतः नासिका यानि नाक को प्रभावित करता है।
भारत में ऐसी मान्यता है कि ज़ुकाम, सर्दी लगने के कारण होता है। ग्रामीण क्षेत्रो के रहवासियों के मुताबिक सर्दी-खाँसी-जुकाम तीनों सगे भाई-बहिन हैं और तीनों एक साथ ही आते हैं।
 
क्या जुकाम हानिकारक है
ज़ुकाम मनुष्यों में सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है। हमेशा निरोग बने रहने के लिए औसत वयस्क यानि हरेक व्यक्ति को वर्ष में दो से तीन बार ज़ुकाम होना चाहिए।
छोटे बच्चों को साल में छह से लेकर बारह बार ज़ुकाम होना अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। जुकाम- शरीर और फेफड़ों की गन्दगी बाहर निकल देता है जिससे प्राणवायु अर्थात श्वांस लेने में आसानी होती है। प्रतिवर्ष यदि 4 से 6 बार ज़ुकाम का होना श्वसन तन्त्र की क्रिया को प्राकृतिक रूप नियमित शुद्ध, साफ-सुथरा बनाता है।
बिना किसी चिकित्सा के यदि ज़ुकाम मिट जाए, तो ऐसे लोगों को बुढ़ापे तक श्वांस या फेफड़ों की बीमारी नहीं होती। बुढापा जल्दी नहीं आता तथा ये लोगअनेक रोगों से बचे रहते हैं।
फेफड़ों और नासिका का संक्रमण या प्रदूषित जलवायु की वजह से ज़ुकाम जैसा संक्रमण प्राचीन काल से मनुष्यों में होते आ रहे हैं।
क्या निशानी है जुकाम की….
ज़ुकाम के लक्षणों में खांसी, गले की खराश, नाक से स्राव (राइनोरिया) आदि समस्या उत्पन्न होती है। सिर एवं बदन में आलस्य, भारीपन का एहसास होने लगता है और किसी-किसी को ज्वर-फीवर भी आता है।
ज़ुकाम अगर ज्यादा समय तक बना रहे, तो
समझे, शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो चुका है ऐसी स्थिति में ज़ुकाम
काफी समय में या बिना चिकित्सा के ठीक नहीं होता। ज्यादा अंग्रेजी दवाओं के सेवन से शरीर दिनोदिन खोखला होता चला जाता है। अन्यथा सामान्यतः ज़ुकाम के
 लक्षण सात से दस दिन के भीतर समाप्त हो जाते हैं। हालांकि कुछ लक्षण तीन सप्ताह तक भी रह सकते हैं। ऐसे दो सौ से अधिक वायरस होते हैं जो सामान्य ज़ुकाम का कारण बन सकते हैं। राइनोवायरस इसका सबसे आम कारण है।
सर्दी-ज़ुकाम,खांसी के लिए एक राहतकारी दवा…..
क्या आप जानते हैं कफ लाइफ को टफ बना देता है। वात-पित्त-,कफ ये तीनों दोष
अर्थात त्रिदोष शरीर को खोखला कर देते हैं जिसमे कफ सर्दी-खांसी-जुकाम लंबे समय तक रहे, तो टीबी भी हो सकती है
इसलिए कफ के पूर्ण निष्कासन के लिए अमृतम “लोजेन्ज माल्ट” जैसी ओषधियाँ पूरी तरह सुरक्षित हैं।
ज़ुकाम ठीक करने में जल्दबाज़ी न करें...
खांसी को जल्दी ठीक करने के चलते अंग्रेजी और केमिकल घटक युक्त दवाएँ आपको नुकसान पहुंचा सकती है।
सर्दी खांसी के लिए सबसे बेहतरीन चिकित्सा घरेलू नुस्खे हैं या फिर आयुर्वेदिक ओषधियों में सबसे सुरक्षित दवा है।
 अमृतम द्वारा निर्मित उच्च गुणवत्तापूर्ण
लोजेन्ज माल्ट का नियमित
उपभोग कर रोग हमेशा के लिए ज़ुकाम जैसे जिद्दी रोग से राहत पा सकते हैं।
लोजेन्ज माल्ट के फायदे…
 यह सर्दी-खांसी, कुकर खांसी, बार-बार गले में लगने वाला ठसका, कण्ठ व गले की खराबी, गले की ख़राश, सांस लेने में दिक्कत, निमोनिया आदि फेफड़ें सम्बन्धी विकारों से मुक्त हो सकते हैं।
लोजेन्ज माल्ट पूर्णतः अल्कोहल रहित आयुर्वेदिक दवा है।  इसमें मिलाई गई तुलसीपत्र
प्राकृतिक कीटाणुनाशक ओषधि है
पिप्पली
यह कफ को उत्पन्न होने से रोकता है
वासा
फेफड़ों में पुराने जमे हुए कफ को पतला करके बाहर निकालता है जिससे शरीर की ऐंठन कम होती है। आलस्य मिट जाता है
मुलेठी
यह कफ-खांसी की सर्वश्रेष्ठ ओषधि है यह गले की खराश आदि रोगों को दूर करती है। यह पेट की जलन, एसिडिटी में भी लाभकारी है।
शरीर का काम खत्म कर देता है- जुकाम
क्या आपको मालूम है- ज़ुकाम, सर्दी-खांसी बहुत लंबे समय तक बनी रहे, तो कम उम्र में ही शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है, जो भविष्य में बहुत सी बीमारियों का कारण बनती है। ये लोग युवा अवस्था में ही बुजुर्ग से लगने लगते हैं। हमारी सलाह है की इस रोग को जड़ से मिटाने के लिए और रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि
इम्युनिटी पॉवर बढ़ाने के लिए लोजेन्ज माल्ट एक महीने तक नियमित सेवन करें।
 क्या आप जानते हैं कि खांसी एक ऐसी बड़ी बीमारी है, जिसके एक बार होने से इससे छुटकारा पाना आसान नहीं होता
 खांसी-जुकाम शरीर की एक रक्षात्मक प्रणाली है, जो वायु मार्ग से बलगम, धूल या धुएं को साफ करने के लिए होती है।
सूखी खांसी के लक्षण …..  सूखी खांसी में बहुत कम या बिल्कुल भी बलगम नहीं निकलता। यह सीने में जलन करने वाली होती है और गले में खराश पैदा करती है।  कुछ मामलों में, यह नाक संबंधी एलर्जी, ऐसीडिटी, अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) या ट्युबरक्लॉसिस (टीबी) हो सकती है. इसलिए, व्यक्ति को यदि ज़्यादा दिन तक खांसी रहे, तो लोजेन्ज माल्ट का तत्काल सेवन करना आरम्भ कर दें।
सन्दर्भ ग्रन्थ पुस्तकें:–
【१】भावप्रकाश निघण्टु
【२】चरक सहिंता
【३】शरीर विज्ञान
【४】आयुर्वेद सार संग्रह
【५】सर्दी-खांसी, ज़ुकाम जानें इसके कारण, लक्षण और रोकथाम के उपाय।
दा इंडियन वायर
 
 
 
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