याददास्त की कमी भी लाभदायक है। रक्तचाप के असन्तुलन से होती है भूलने की बीमारी।

क्या चिन्ता, भय-भ्रम, तनाव आदि बुद्धि विकार स्वयं के विरुद्ध, एक युद्ध है?
आयुर्वेद में बुद्धिवर्धक 25 जड़ीबूटी बहुत उपयोगी हैं, जिससे भूलने की बीमारी दूर होती है।
हमेशा आयुर्वेद की दवाएं लेते रहने से बुद्धि का विकास होता है और भूलने की बीमारी पैदा नहीं होती।
याददास्त तेज करने वाली आयुर्वेदिक औषधि का नाम…

क्या ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जटामांसी, मालकांगनी, अगर-तगर, त्रिफला, स्मृतिसागर रस, स्वर्ण माक्षिक भस्म, आंवला, हरड़ मुरब्बा, गुलकन्द से बनी दवा ब्रेन की गोल्ड माल्ट खाने से भूलने की समस्या से राहत मिल सकती है।
मेमोरी बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधि BRAINKEY Gold Malt & Tablet ऑनलाइन मंगवा सकते हैं.

क्या भूलना भी फायदेमंद होता है? …
भूलने की आदत से घबराएं नही। यह भी जरूरी है। हमारे लिए क्या आवश्यक है यह दिमाग ही तय करता है, इसी आधार पर यादों को सहेजकर स्टोर करता है।
मस्तिष्क वैज्ञानिकों एवं मनोविज्ञान विशेषज्ञों के मुताबिक जरूरत से ज्यादा सोचना स्वयं को कमजोर करता है। ये सोच का रोग भी मन को विचलित बननकर याददाश्त कम कर देता है।
बीपी हाई दिमाग को कमजोर करता है, जाने 6 देह को क्षीण करने वाली खास बातें … चक्रदत्त आदि प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रन्थों के अनुसार 10 से 20 पॉइंट अधिक होने से हमारा मस्तिष्क 55 दिन बूढ़ा हो जाता है। उच्च रक्तचाप की वजह से बुद्धि बल घटने लग जाता है।
बीपी सामान्य या सन्तुलित रहने से दिमाग 8 माह ज्यादा तेज काम करता है। बीपी ज्यादा बना रहे, तो मस्तिष्क के मेमोरी और तालमेल वाले हिस्से की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त यानि डैमेज करने लगता है।
आयुर्वेद शरीर विज्ञान के मुताबिक 50 की उम्र के बाद सामान्य से 10–15 पॉइंट उच्च रक्तचाप को ज्यादा नहीं मानना चाहिए।
महर्षि चरक ने चरक सहिंता में लिखा है कि ज्यादा चिन्ता, तनाव के चलते रक्त का संचार कम ज्यादा होता रहता है।
अतः बीपी असन्तुलन के समय शरीर को ढ़ीला कर दोनों नाक से गहरी श्वांस लभी तक ले जाकर धीरे से छोड़ें। ऐसा 12 बार करें, तो बीपी तुरन्त सामान्य हो जाएगा।
भूलने की बीमारी से मुक्ति के लिए हमें बचना है, तो मन को लड़ाकू और आस्थावान बनाने पर जोर देना होगा।
यह मुशिकल है किंतु आत्मविश्वास से सब सम्भव है। आत्मबल याददाश्त वृद्धि में सहायक है। काम को टुकड़ों में बांटकर समय पर निपटाएं। हल्का व्यायाम करें। दिन का रूटीन बनाएं। अभ्यङ्ग करें!
भूलना भी कुछ नया सीखने की प्रक्रिया है। इसके जरिये दिमाग खास जानकारियों तक पहुंच बनाता है। अनावश्यक कम जरूरी चीजें मस्तिष्क से मिटाता है।
आशा के उजाले जब दिमाग के जालों को पार नहीं कर पाते, तो मस्तिष्क की कोशिकाओं का संतुलन बिगड़ जाता है।
थकान, आलस्य, नींद की कमी, मानसिक दबाब, दूषित गन्ध, श्वांस का नाभि व फेफड़ों तक नहीं पहुंचना, मालिश न करना, धूप न लेना, नशे की नियमित आदत, शरीर में लचीलापन न होना, लगातार कब्जियत, औऱ एकाग्रता की कमी से जुड़ी समस्याएं भूलने की बीमारी को बढ़ाती जाती हैं।
बुजुर्गों का वंदन-अभिनंदन, प्रणाम करें…वे अशिक्षित होने के बाद भी उनमें आशा के बीज बहुत गहरे थे। उनमें जिंदगी को समझने-परखने और उसमें भरोसा रहने में बहुत शिक्षित थे।
हमारे बड़े-बुजुर्गों के पास जीवन को जानने, समझने का गहरा तथा विविधता पूर्ण अनुभव होता है, जिसे आज की पीढ़ी ने नकार दिया है।
बुजुर्ग कहते थे कि बाहर से सब ठीक हो जाएगा। पहले अपने मन को ठीक रखो। संकट, परेशानी सामना करने वालों के मन में होता है। समस्या का समाधान हमारे नजदीक ही है।
हमारे हर कष्ट एवं धर्म-अर्थ-काम मोक्ष में रुकावट का कारण मानसिक कमजोरी है। सबका मन कर्ज, बेरोजगारी और बीमारी से नहीं टूट रहा है। बल्कि इस बात से बिखर रहा है कि भविष्य में आगे क्या होगा?

चिन्ता में घुलने, चिन्तित होते चले जाना, भय-भ्रम, अशांति का मन में प्रवेश आदि ये सब विचार एक तरीके से अकेलेपन का आरम्भ है। यही से भूलने की बीमारी का श्रीगणेश होने लगता है।

ज्यादातर लोग बैठे-बैठे कहानियां बुनने में मशगूल रहते हैं। अतीत की कड़वाहट और भविष्य की आशंका वर्तमान को तंग करने लगती है। मन-मस्तिष्क कमजोर होने की तरफ बढ़ने लगता है। इसके चलते हम खुद-खुदा तथा ईश्वर से हटकर आत्मघाती बन जाते हैं।
भूलने की मुख्य 14 वजह यह भी हैं…
निगेटिव सोच।
बिगड़ती विचारधारा।
द्वेष-दुर्भावना, जलन, कुढ़न।
भविष्य की चिंताओं से परेशान।
आत्मविश्वास की कमी।
भाग्य, ज्योतिष का भरोसा, अंधविश्वास।
परम्परा गत संस्कारों को न अपनाना।
सुबह जल्दी न जागना।
मन में चल रहा दुष्चक्र
अनिंद्रा या नींद से दुश्मनी।
अनिर्णय का रोग,
चिन्ता, फिक्र, भय-भ्रम, अशांति, तनाव।
बार-बार खाने की ज्यादा लत।
ध्यान, प्राणायाम, परिश्रम से अरुचि।
ओवरथींकिंग, चिन्ता, नकारात्मकता माइंड फुलनेस होने से मस्तिष्क में स्पेस नहीं बचता और वर्तमान में रहने नहीं देता। अच्छी सोच, मेहनत द्वारा ही दिमाग में आग जलाकर दूषित भाग्य को जलाकर एनर्जी पाई जा सकती है।
बड़े-बुजुर्ग कहते थे कि अगर सुखी रहना है, तो…
बीती ताहिं बिसार दे, आगे की सुधि लेय।
आपको तन-मन-धन और अन्तर्मन से प्रसन्न रख सकती है। बुद्धि की शुद्धि का इलाज आपके विचारों के अंदर ही है। अगर सोच को बदलोगे, तो सितारे बदल जाएंगे नजरों को बदलते ही नजारे बदल जाएंगे।
भूलने की बीमारी को Alzheimer’s कहते हैं। यह भी दिमाग सम्बन्धी तकलीफ भी है और सुधार भी।
क्यों बढ़ रहा है मानसिक विकार, स्मृति भ्रंश तथा याददाश्त की पढ़े इस लेख को..☺️
प्रमुख सद्ग्रन्थ श्रीमद्भागवत गीता में लिखा है-
!!धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः!!
अर्थात-हमारा तन-मन,मस्तिष्क कुरुक्षेत्र है, इसमें सदा युद्ध (महाभारत) चलता ही रहता है। इस कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और मानसिक विकार उत्पन्न होते हैं ।
एलसायमर रोग मनोभ्रंश रोग (डिमेंशिया) की सबसे सामान्य रोग है। ये दिमाग की क्षमता का निरंतर कम करता है। मनोभ्रंश रोग (डिमेंशिया) दिमाग की बनावट में शारीरिक बदलावों के परिणामस्वरूप होता है। यह ये बदलाव स्मृति, सोच, आचरण तथा मनोभाव को प्रभावित करते हैं।
2050 तक हो जाएंगे डिमेंशिया प्रभावित तीन गुना बढ़कर हो जाएंगे-20 करोड़। महिलाओं व बच्चों को ज्यादा खतरा…क्योंकि तनाव, चिन्ता और रोगों की वजह से दिमाग की कुशलता घटती चली जाती है।
भूलने की बीमारी को अंग्रेजी शरीर विज्ञान में Alzheimer’s Disease बताया है।
इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना तथा फिर इसकी वजह से सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं की गंभीर स्थिति आदि शामिल हैं।
रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में कई बार चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका अधिक बढ़ जाती है।
25 से 35 साल की उम्र में भूलने की बीमारी…
55 से अधिक के करीब 45 फीसदी लोग भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) के साथ जी रहे हैं। कम आयु में डिमेंशिया की पहचान व उपचार कठिन। दुनिया में करीब 6 करोड़ याददास्त की समस्या से जूझ रहे, अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत।
बुद्धि को प्रखर बनाती हैं ये आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां….., एक शोध के अनुसार वैज्ञानिकों का दावा है कि व्यायाम, कसरत, अभ्यंग, शारीरिक मेहनत, प्राकृतिक नियमों को अपनाने से याद्दाश्त में सुधार होता है।
आयुर्वेद की ये ओषधियाँ भी हैं-चमत्कारी..
नैतिक नियमों के अलावा शंखपुष्पी, ब्राह्मी, बादाम, कालीमिर्च, मुनक्का, आँवला मुरब्बा, मालकांगनी, स्मृति सागर रस, स्वर्ण भस्म कादि आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग से स्मृति भ्रंश और भूलने की बीमारी से निजात पा सकते हैं। ये स्मृतियों को पुनः वापस लाने में भी कारगर है।
ब्रेन की गोल्ड माल्ट एवं टेबलेट….उपरोक्त सभी जड़ीबूटी के काढ़े, गुलकन्द, गुलाब, बादाम तथा कई तरह के मुरब्बे, मेवा-मसालों, औषधियों से निर्मित यह स्मृति वर्द्धक आयुर्वेदिक दवा है, जो मन-मस्तिष्क को क्रियाशील बनाकर याददाश्त बढ़ाने में कारगर है।
ब्रेन की गोल्ड मनोभ्रंश रोग (डिमेंशिया) नाशक यह दुनिया का पहला हर्बल जैम है, इसे आयुर्वेद में माल्ट कहा जाता है। पूर्णतः हानिरहित है।
ब्रेन की गोल्ड माल्ट  नियमित लेते रहने से यह भूलने की बीमारी को जड़ से मिटा देता है।

बच्चों को बचपन से ही ब्रेन की गोल्ड माल्ट खिलाया जाए, तो बहुत कुशाग्र बुद्धि वाले बनते हैं।
ब्रेन की गोल्ड माल्ट में 25 से अधिक बुद्धि वर्धक जड़ीबूटियां था हरड़, आंवला मुरब्बा व गुलकन्द का मिश्रण है। यह स्वादिष्ट भी है।

16 ग्रन्थों से संकलित यह लेख पढ़कर भूलने की वजह से होने वाले घाटे से बचें।
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