देह का कायाकल्प करने वाला प्राकृत उपहार
- शुद्ध मधु में यदि पान का रस, अदरक रस और मुलेठी, अश्वगंधा, ब्राह्मी का काढ़ा मिलाकर सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता, इम्यूनिटी में वृद्धि होती है और कायाकल्प होने लगता है। मानसिक शांति, बुद्धि वृद्धि के लिए भी बेहतरीन है।
- आयुर्वेद सार संहिता ग्रंथ में इस प्राचीन योग को मधुपंचामृत (MADHU PANCHAMRIT) बताया है। इसका उल्लेख चरक संहिता आदि में भी मिलता है।
मधुपंचामृत (MADHU PANCHAMRIT) के 22 लाभ
- सम्पूर्ण संसार में मधु ही एक ऐसी प्राकृतिक अमृत औषधि है, जो शरीर में जाते ही अपना कार्य शुरू कर देती है। शरीरिक शक्ति दृढ़ करने में मधु पंचामृत रामबाण है।
- ठंडे दूध के साथ बढ़ते बच्चों के लिए सर्वोत्तम।
- ब्रेकफास्ट के समय एक छटाक मलाई में एक बड़ा चम्मच
- मधु पंचामृत मिलाकर खाने से दिमाग और स्नायुओं को असाधारण रूप से शक्ति मिलती है। क्योंकि इसमें स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली आयुर्वेद की सुप्रसिध्द जड़ी बूटी ब्राम्ही रस का समावेश है।
- चेहरे को चमकाने, गन्दगी साफ करने में मधु का प्राकृतिक गुण है!
- एक चम्मच अमृतम उबटन एक चम्मच मधु पंचामृत, टमाटर का रस एक चम्मच तीनो को मिलाकर धूप में बैठकर लगाकर 30 मिनिट तक सूखने दें। फिर सादे जल से धोएं, तो चेहरे की सारी गंदगी निकल जाती है तथा मुख चमकने लगता है।
- मुहांसे, झुर्रियां मिटाने हेतु- मधु पंचामृत 1 चम्मच, निबहु का रस 3 ml, हल्दी पिसी, आधा ग्राम सबको मिलाकर चेहरे पर लगाएं, तो कील-मुहांसे साफ हो जाते हैं।
- मधु पंचामृत 10 ग्राम, अमृतम उबटन 10 ग्राम कच्चा दूध 20 ml सबको मिलाकर सुबह की धूप में चेहरे पर लगाकर 30 से 40 मिनिट बिना बोले सूखने दें। फिर सादे जल से धोकर अमृतम कुंकुमादि तेल लगाएं। 10 दिन नियमित प्रयोग से बुढापे के लकधन समाप्त होने लगते हैं।
- मधु पंचामृत में अनेक प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं।
- मधु के सेवन से ऊर्जा-उमंग और फुर्ती आती है। जल्दी बुढापा नहीं आता।
- मानसिक तनाव और डिप्रेशन मिटता है।
- निघण्टु के मुताबिक मधुपंचामृत (MADHU PANCHAMRIT) प्राकृतिक ग्लूकोज की पूर्ति करता है।
- आयुर्वेद के मुताबिक मोटापा कम करने के लिए मधु में नीबू का रस सादे जल के साथ भोजन के एक घण्टे बाद लेते हैं, तो चर्बी गलने लगती है।
- मधु के साथ कुछ अन्य चीजे उपयोग करने से मुखमंडल में ग्लो बढ़ता है।
- मधु व अमृतम उबटन शक्ल पर प्रकट धाग-धब्बे, कील-मुंहासे और झुर्रियों से मुकाबला करने में मदद करता है।
- मधु को चेहरे पर नियमित लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है। इसे अपनी स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकती हैं।
- कॉन्टेक्ट-99264-56869- 0751 4065581
- अनुष्ठान, पूजन धर्म में पंचामृत का उपयोग परम् हितकारी है शिवपुराण में पंचमहाभूतों की प्रसन्नता के लिए पुराणों में पंचामृत द्वारा शिवलिंग के अभिषेक का वर्णन है। सत्यनारायण की कथा हो या सामान्य पूजा में पांच तरह के अमृत जैसे-दूध, दही, मधु, शक्कर का बूरा, गाय का शुद्ध देशी घी का मिश्रण करते हैं, उसे पंचामृत कहते हैं।
- स्कन्ध पुराण, शिव सहिंता तथा कालितन्त्र में उल्लेख है कि-शिवलिंग या ईश्वर को पंचामृत का स्नान करने से अनेकों रोग-शोक, वास्तु, कालसर्प-पितृदोष, गरीबी आदि परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
- भगवान को अर्पित नैवेद्य का प्रसाद रूप में ग्रहण करने से शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी की वृद्धि होती है।
- मङ्गल के दंगल को दूर करे-मधु पंचामृत मंगलदोष से मुक्ति हेतु प्रत्येक मंगलवार, रविवार शिवलिंग पर शुद्ध शहद अर्पित करना चाहिए।
- आयुर्वेद के अनुसार शुद्ध घी और शुद्ध मधु दोनों ही पोष्टिक ओषधि हैं। बस अनुपान का फर्क है। शहद को सुबह खाली पेट पानी में मिलाकर अथवा सीधे लिया जा सकता है और घी के साथ दूध, दाल, सब्जी, रोटी, परांठा और अंडे की हाफ फ्राई के साथ लिया जा सकता है। दोनो ही लाभकारी हैं।
- अमेजन, amrutam की वेवसाइट से मधुपंचामृत (MADHU PANCHAMRIT) ऑनलाइन मंगवा सकते हैं।
- सही सलाह फिलहाल छोटी पैकिंग 50 ग्राम मंगवाकर इसकी शुद्धता और फायदे जाने




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