कालसर्प की शान्ति होटी है – मूली से
मूली – अघोरियों की पहली पसंद है
मूली – का उपयोग तन्त्र में भी बहुत किया जाता है।
सलाद के अलावा मूली औषधि भी है
।मूली के संस्कृत नाम।
आयुर्वेद के अनेकों ग्रंथों में मूली के
बहुत फायदे बताये गए हैं।
भावप्रकाश निघण्टु में मूली के
निम्न 7 नाम लिखे हैं
【1】चाणक्य मूलक,
【2】भूमिकक्षार,
【3】दीर्घ्कंध,
【4】क्षरमुलाक,
【5】कुञ्जर,
【6】नीलकंठ,
【7】राजूक, रुचिर ।
मूली के ये सब नाम
वनोषधि चंद्रोदय,
आयुर्वेदिक निघंथु,
वन बुटी ,
भावप्रकाश निघण्टु,
आदि अमृतमआयुर्वेदिक
ग्रंथो में बताये हैं ।
मूली का उपयोग-
■ ह्रदय हितकारी, मूत्रदोष, दाद,
बवासीर, श्वांस, खांसी, नेत्ररोग
कंठरोग नाशक है।
मूली के तांत्रिक प्रयोग
■■ मूली के बारे में सिद्ध अघोरियों को
बहुत जानकारी रहती है। अघोर तन्त्र
में मूली का बहुत उपयोग किया जाता है।
■■■ आद्रा नक्षत्र में मूली के हवन से सिद्धियांपाने का विधान अघोराचार्य अवधूत सन्त श्री मोतीराम अघोरी ने बताया है।
■■■■ अघोर तन्त्र के अनुसार पृथ्वी से गढ़े माल को देखने और निकलने की विधि-विधान बताया है।
■■■■■ सीमा शुद्धि के लिए यह अत्यंत प्रभावी है।
■■■■■■ घर-दुकान, उद्योग का वास्तु दोष दूर करने के लिए मूली एक बेहतरीन इलाज है।
■■■■■■■ मुस्लिम तन्त्र एव लाल किताब में राहु ग्रह की शांति के लिए मूली का दान,
जल में प्रवाह करना, मूली जमीन में गाढ़ना
आदि टोटके लिखे हैं।
■■■■■■■■ एक मूली पत्ते सहित
तकिए के नीचे, सिरहाने रखकर सोने से
मानसिक विकार और मिर्गी जैसी तकलीफ
का शमन होता है।
कालसर्प का इलाज
सिद्ध अघोरी शिवहरिहराराम
के अनुसार दो मूली के 20 गोल टुकड़े
काटकर उसकी माला बनाकर 11 दिन लगातार किसी जंगल या एकांत के शिव
मंदिर में शिंवलिंग पर अर्पित कर
5 दीपक “अमृतम राहुकी तेल” के
जलाकर एक माला
!!ॐ अघोरेभ्यो अघोरेभ्यो नमः!!
जाप करने से रुके काम बनने लगते हैं।
[] मूली द्वारा कैंसर से बचाव
[] विवाह में अवरोध
[] जादू-टोना का भय
[] नामर्दी, नपुंसकता से कैसे हो मुक्ति
[] औलाद न होना
[] सम्पत्ति का विवाद
[] तलाक की समस्या आदि
मूली के अनेकों अदभुत चमत्कारी
प्रयोग बाकी हैं-
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