हमारा मस्तिष्क सबसे शक्तिशाली पर्सनल कंप्यूटर है ..
और हम इसके प्रोग्रामर है जैसा हम कंप्यूटर रूपी मस्तिष्क को को निर्देश देते हैं ..
की उच्च विचार शुद्ध भाव रखते हुए अच्छा व्यापार नौकरी चुने हम अपने मस्तिष्क को इस तरह प्रोग्राम कर सकते हैं ..
कि जीवन की काफी महत्वपूर्ण समय व्यर्थ बातों से बचाकर सफलता की ओर ले जा सकता है..
हमारे मस्तिष्क एक आज्ञाकारी सेवक है इसे आप जिस और जाने का निर्देश देंगे वहां वही भागेगा……
किसी के प्रति हानि विचार दुर्भावना दृष्टा लाएंगे तो हमारा मस्तिष्क हमें उसी तरफ गहराई में ले जाता जाएगा यह हमेशा हमारे आदेश का पालन करता है.
हमारा मस्तिष्क खेत की मिट्टी की तरह है इसमें कौन सा बीज बो रहे हैं..
इसे परवाह नहीं आलू मेथी आम या गोभी हमारे मस्तिष्क रूपी मिट्टी का काम है ..
बोए गए बीजों को पोषण देना आप अच्छे विचारों के बीज बोकर अच्छे संबंध स्थापित कर सफल लोगों से आगे बढ़ने के सत्र पा सकते हैं ..
हम जो पाना चाहते हैं कुछ बनना चाहते हैं कुछ करना चाहते हैं यह सब की शक्ति हमारे मस्तिष्क में ही है..
असफलता काम है गिरने की चिंता करते ही हमारा कंप्यूटर रुपी मस्तिष्क उसी प्रकार का प्रोग्राम खोल देता है ..
और हम छोटी मोटी नौकरी तलाशने लग जाते हैं इनमें से कई लोग जब अपनी ऊर्जा शक्ति का एहसास करते हैं ..
तो नौकरी करते करते सफलता की टोकरी पा जाते हैं इन लोगों की नजरों में नौकरी कंपनी की जेल में काटी जाने वाली सजा की तरह नहीं होती बल्कि एक प्रेरणादायक चुनौती की तरह होती है..
हर व्यक्ति के पास नेत्र दृष्टि और मस्तिष्क दृष्टि होती है नेत्र दृष्टि से हमारे चारों ओर की वस्तुएं दिखाई देती है नेत्र दृष्टि केवल भौतिकता का प्रतीक है..
प्राकृतिक का नहीं मस्तिष्क दृष्टि वास्तविकता और सत्य पर ही विश्वास करती है केवल संभावनाएं देखना इसका मुख्य कार्य है ..
मस्तिष्क दृष्टि से ही हमारी सफलता उपलब्धि प्रभाव और संतुष्टि हमारी संपत्ति पूंजी कमाह स्वास्थ्य सुख समान और शांति निर्धारित होती है.
यह नेत्र दृष्टि से बिल्कुल विपरीत होती है क्योंकि नेत्र दृष्टि सभी की एक जैसी ही होती है सभी कम उम्र में सब वस्तुओं को स्पष्ट देख सकते हैं ..
जैसे लोग सामान मकान पानी आदि ज्यादातर लोग भविष्य को मुश्किलों से भरा देखते हैं..
नौकरी या व्यापार उद्योग के क्षेत्र में भी एक औसत कम वेतन के काम में खुद को व्यवस्थित करने वाला सामाजिक जीवन मैं ..
ऐसे प्राणियों की मानसिक दृष्टि बहुत कम खुशी या किसी प्रशंसा देख पाती है..
इन्हें हमेशा जीवन बहुत अबाउ प्रतीत होता है बोरियत और बड़ी परेशानियां महसूस करते रहते हैं ..
सफलता चाहने वाले लोग शक्ति सामर्थ्य से भरे ऊर्जावान आत्म विश्वासी और आध्यात्मिक शक्ति से लबालब होते हैं…
जो लोग जीवन को स्वर्ग की तरह देखते हैं वही विजेता होते हैं …
जो लोग सट्टा लॉटरी जुआ खेलकर पांसे फेककर भाग्य भोरोसे बैठकर गुजारना चाहते हैं वे शीघ्र ही रोग से घिर जाते हैं…
किसी चीज को केवल चाहना निष्क्रिय क्रिया है चाहना एक आलसी मनोरंजन है इसके पीछे बुद्धि विवेक ठोस कार्य योजना या एक्शन प्लान नहीं होता …
सपनों को साकार करने हेतु सदकार्य करना ही पड़ेगा अपने मस्तिष्क में रुपए कंप्यूटर में प्रोग्राम फिट करना ही पड़ेगा…
इस प्रोग्राम के अनुसार कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलेगी विजेता सक्रिय स्वप्नदर्शी होते हैं ..
पराजित निष्क्रिय दोष दर्शी होते हैं वे यह मानते हैं कि सिस्टम उनके खिलाफ है और भविष्य भाग्य द्वारा तय होता है ..
पराजित असफल कमजोर लोग सदैव सम्मान के भूखे होते हैं यह अहम से चलते है अहम को ठेस लगते ही चिड़चिड़े हो जाते हैं ..
यह लोग कभी भी एकाग्र चित्त नहीं होते हैं इनका मन इन्हें भटकाए रहता है ..
आध्यात्मिक चंचल प्रवृत्ति इन्हें बार-बार पराजित करती है पराजित लोग दूसरों की बुराई और व्यर्थ की बातों में समय और धन बर्बाद करते रहते हैं..
अपनी मूर्खता पूर्ण निर्णय हो से धन का नुकसान कर स्वयं को परोपकारी होने का ढोंग करते हैं..
पराजित लोग निराशावादी होते हैं पराजित लोग स्वार्थी होते हैं…
पराजित लोग कभी किसी की मदद नहीं करते यह किसी पर विश्वास नहीं करते और अपना विश्वास भी कम ही जमा पाते हैं…
पराजित लोग बिना कुछ किए दिए लिए सब कुछ हासिल करना चाहते हैं विजेता जानते हैं कि मुफ्त में कुछ नहीं मिलने वाला क्या का मतलब है..
अपने परिवार के सुनहरे भविष्य के लिए निवेश करना कड़ी मेहनत इंसान को सुखी बनाती है ..
लेकिन मधुर संबंध आत्मीयता अपनेपन से आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करना पूंजी के साथ-साथ शून्य से शिखर तक पहुंचाती है
जीवन के सत्य को जीवन में डूब कर पकड़ा जा सकता है अथवा मृत्यु में डूब कर दो ही द्वार हैं जीवनऔर मृत्यु ..
केवल सत्य ही जीवन का उत्सव है जहां उत्सव नहीं वही असत्य है उत्सव हो मस्ती का शिव भक्ति का…
जो लोग झूठ नहीं बोल सकते सत्य बोलना संभव नहीं है इन्हें मौन रहना चाहिए..
ईश्वर शब्द का अर्थ है ऐश्वर्या और ऐश्वर्या महेश्वर ही ईश्वर है ईश+वर मनुष्य शिव का वरदान है ..
इसे ई अर्थात शक्ति के स्वर है लय वध होते रहना चाहिए….
संकट में शनि और शनि का संकट:- दिल्ली आदि शहरों में अनेकों लड़के शनि की बल्टी लिए घूमकर भीख मांग रहे हैं…
घोर कष्टों में चेहरे पर चिपडने को तेल नहीं होता तब कोई चबूतरे पर दीपक रखने की सलाह दे तो क्रोध ही आएगा……!




Leave a Reply