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व्यंग्य और विज्ञान की कसौटी पर खरा यह ब्लॉग ध्यानपूर्वक अध्ययन करें। “कोरोना” हाथ मिलाने से फैलता है… नजरें मिलाने से नहीं, इतना भी याद रखें!
ऐसी मान्यता है कि- नारी, ब्रह्मचारी और जो लोग मांसाहारी नहीं हैं, उन पर कोरोना की महामारी कम असरकारी है। फिलहाल कोरोना ब्याही हो या क्वारी किसी को करुणा नहीं दिखा रहा…. कोरोना वायरस के 16 लक्षण जाने। आपको यदि लगता है कि-कुछ गड़बड़ है, तो नजदीकी शासकीय चिकित्सालय में जांच कराएं और आयुष द्वारा जारी “आरोग्य सेतु एप्प” गूगल से डाउनलोड करें। किसी तरह की तकलीफ…
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सर्दी-खांसी, जुकाम, सांस लेने में दिक्कत के अलावा कोरोना के ओर भी लक्षण हैं।
अर्थात- विद्या से बड़ा कोई बंधु नहीं, व्याधि जैसा कोई शत्रु नहीं, पुत्र जैसा स्नेह नहीं और दया से श्रेष्ठ कोई धर्म नहीं। तन-मन-वतन का कोना-कोना साफ रखें…. कोई भी पीली धातु सोना हो या न हो, लेकिन अब पता नहीं कौन सी बीमारी कोरोना निकल आये। जब चिकित्सक भी चक्कर खा गए… यूरोप के डॉक्टरों ने बताया है कि- कोरोना…
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क्या आप कब्ज की शिकायत, पेट की बीमारियों से जूझ रहे हैं? ऐसा न हो कि- गृहिणी रोग से पीड़ित हों….
जीवन की आपाधापी में अपने पेट की परेशानियों को भी समझें… ¥ समय पर भूख न लगना और खाना खाने के बाद भोजन न पचना, ¥ पेट में गुड़गुड़ाहट होते रहना, ¥ पेट में अक्सर दर्द बने रहना, ¥ पेट पर कब्ज का कब्जा होना, ¥ एक बार में पेट साफ न होना ¥ गैस की समस्या, एसिडिटी, अम्लपित्त आदि तकलीफें…
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पीलिया और 72 तरह की बीमारी दूर कर, “पेट को अपडेट” रखता है- keyLiv malt – 40 कारगर आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों से तैयार योग
अमॄतम कीलिव माल्ट. A TOTAL CARE of LIVER- जाने-पेट की 23 बीमारियां… जो कीलिव माल्ट के सेवन से ठीक होती हैं। 【१】उदर रोग, 【२】पेट की खराबी, 【३】पाण्डु रोग (रक्त न बनना), 【४】खून की कमी, 【५】अनिच्छा, 【६】अरुचि (खाने की इच्छा न होना) 【७】कामला, 【८】पीलिया, (Jaundice), 【९】भूख न लगना, 【१०】गृहिणी रोग (आईबीएस ibs) 【११】अग्निमान्द्य (Anorexia), 【१२】यकृतवृद्धि, 【१३】यकृतशोथ, 【१४】अजीर्ण…
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![ॐ का हर अक्षर अमॄतम। अ-उ-म [ॐ] का वेद-सम्मत वैज्ञानिक उच्चारण••••](https://amrutampatrika.com/wp-content/uploads/2020/04/mor-shani-H47uK4Q98-s-unsplash.jpg)
ॐ का हर अक्षर अमॄतम। अ-उ-म [ॐ] का वेद-सम्मत वैज्ञानिक उच्चारण••••
!!ॐ!! के उच्चारण से होते हैं-उच्च स्तर के सात से अधिक फायदे… कभी ध्यान से सुनेंगे, तो मन्दिर के घण्टों की गूंज में ॐ स्वर का नाद सुनाई देता है। 【1】प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करता है! 【2】ह्रदय रोग नहीं होते! 【3】उदररोग, पेट की तकलीफ, लिवर, गुर्दा (किडनी) की परेशानी मिट जाती हैं! 【4】मानसिक शान्ति मिलती है। 【5】घबराहट, बेचैनी, नींद न आना, भय-भ्रम,…
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भारत में कोविड- 19 पर जीत, तो सुनिश्चित है, चाहें वह दवा से हो, दुआ से हो, समय के साथ हो अथवा प्रकृति या आयुर्वेदिक चिकित्सा से हो
भारत में कोविड- 19 पर जीत, तो सुनिश्चित है, चाहें वह दवा से हो, दुआ से हो, समय के साथ हो अथवा प्रकृति या आयुर्वेदिक चिकित्सा से हो हिंदुस्तान का अब जागृत अवस्था में आने का समय आ गया है। कोरोना-जीवन बदलने वाली घटना है… कोविड- 19 के पश्चात सन्सार में सभी के साथ परिवर्तन होना निश्चित है।…
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महादेव अवतार महान हनुमान का विज्ञान…. जय-जय-जय हनुमान गुसाईं! कृपा करो गुरुदेव की नाईं!! यह बहुत रहस्यमयी शक्तिशाली मन्त्र है।
कलयुग में चराचर जीव-जगत के जीवन की जबाबदारी हनुमानजी पर है। माँ अंजना के आशीर्वाद फलस्वरूप इन्हें चिंरजीवी होने का वरदान प्राप्त है। पवनपुत्र के चमत्कार की चर्चा चलचित्रों से लेकर ग्रन्थ-पुराणों में मिलती है। इन्हें चन्दन की जगह सिन्दूर का चोला चढ़ाने की परम्परा है। इनकी भक्ति से तन-मन चमक जाता है। किस्से अनेक हैं। हम भी…
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कैसे रोके-रोगों का रायता फैलने से…
च्यवनप्राश त्रिदोषनाशक होता है। यह शरीर के सिस्टम को पूरी तरह ठीक कर “रोगप्रतिरोधक क्षमता“ में वृद्धि करता है। बशर्ते इसे कम से कम 3 माह तक सेवन करें। स्वस्थ्य जीवन के लिए सजग रहें…. सन्सार में स्वस्थ्य न रह पाना बड़ी समस्या है। आयुर्वेद को समझने वाले लोग हमेशा च्यवनप्राश का सेवन कर सदैव स्वस्थ्य रहकर…
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दीपक जलाने का विधान
#देश के लिए हर दीप अमॄतम# लभ्यते यस्य दीपस्य तापस्तु चतुरंगुलात्! न स दीप इति…सस्मृत: (कालिका पुराण) दीपक की गर्माहट पृथ्वी पर न लगे, इसलिए दीपक को पान के पत्ते या पीपल के पत्ते पर रखकर जलाने का विधान है। “लोभादिना नर:..निर्वापको भवेत्” कालिका पुराण में घी-तेल बचाने के भाव से दीप बुझाना महापातक पाप बताया है। इससे रोग उत्पन्न होकर आयु क्षीण होती है।
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खुद ही करें-कालसर्प का इलाज
माणिक्य से करें-कालसर्प की शान्ति.. एक रहस्यमयी दुर्लभ खोज- !!!ज्योतिष ग्रन्थ का हर शब्द अमॄतम!!! वाराह मिहिर सहिंता के श्लोकानुसार भ्रमरशिखि……. भुजङ्गानाम् भवतिमणि:…..स विज्ञेय: प्राचीन शास्त्रों में लिखा है- माणिक्य की उत्पत्ति मणिधारी नागों से होने के कारण माणिक्य रत्न का एक नाम नागमणि भी है। दूषित कालसर्प-नागदोष की शान्ति के लिए इसे स्वर्ण धातु में जड़वाकर, दही में शुद्ध कर अनामिका उंगली में रविवार को दुपहर ११.४० से १२.२८ के मध्य पहिनने से रुकावटें दूर…
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