पूज्यनीय 5 ऐसी चीज़ें, जो कभी अशुद्ध नहीं होती। एक रहस्यमयी जानकारी amrutam !

  • amrutam अमृतम पत्रिका अघोर विशेषांक से साभार
  • वायु पुराण और तन्त्र रहस्य ग्रन्थ के मुताबिक सृष्टि में पाँच वस्तु ऐसी हैं, जो अशुद्ध होकर भी शुद्ध कहलाती हैं-
  • पुराणों में लिखा संस्कृत का यह श्लोक दिमाग को खोल देगा

उच्छिष्टं शिवनिर्माल्यं

वमनं शवकर्पटम् ।

काकविष्टा ते पञ्चैते

पवित्राति मनोहरा॥

उच्छिष्ट का अर्थ है– शेष, बचा हुआ, अस्वीकृत, त्यक्त, झूठन। गाय का दूध।

  1. गाय का दूध पहले उसका बछड़ा पीकर उच्छिष्ट करता है। फिर भी वह शुद्ध रहकर शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है।
  2. शिव निर्माल्यं के बारे में अधिकांश हिन्दू जानते हैं। पूजन के पश्चात शिंवलिंग पर चढ़ा हुआ सामान शिव निर्माल्य कहा जाता है।
  3. एक शब्द गंगा का जल भी है। गंगा जी का अवतरण स्वर्ग से सीधा शिव जी के मस्तक पर हुआ। नियमानुसार शिव जी पर चढ़ायी हुई हर चीज़ निर्माल्य है पर गंगाजल पवित्र है।
  4. वमनम्—वमनम का अर्थ है उल्टी।— शहद यानी मधु को मधुमक्खी का वमन कहा गया है।
  5. मधुमख्खी जब पुष्पों का रस लेकर अपने छत्ते पर आती है, तब वह अपने मुहं से उस रस की शहद के रूप में उल्टी करती है ,जो पवित्र कार्यों मे उपयोग किया जाता है। मधुमक्खी के कड़े परिश्रम के बाद मधु एकत्रित होता है।
  6. शव कर्पटम् अर्थात रेशमी वस्त्र धार्मिक कार्यों को सम्पादित करने के लिये हर वस्तु का शुद्ध होना जरूरी है। पूजा-अनुष्ठान में रेशमी वस्त्र को बहुत अधिक पवित्र माना गया है। लेकिन रेशम का श्रेष्ठ बनाने के लिए रेशमी कीडे़ को उबलते पानी में डाला जाता है।
  7. फिर रेशम के कीड़े मर जाते हैं। उसके बाद रेशम मिलता है, इसे शव कर्पट कहते हैं, जो कि पूर्णतः पवित्र है।
  8. काक विष्टा— यानि कौए का मल कौवा विशेषकर पीपल वृक्ष के फल खाता है ओर उन पेड़ों के बीज अपनी विष्टा में इधर उधर छोड़ देता है, इसे पशु-पक्षी द्वारा किया गया वृक्षारोपण कहते हैं।
  9. कौए के मल विसर्जन से पेड़ों की उत्पत्ति होती है। पीपल के पेड़ को उगाने में काक यानी कौवा का बहुत बड़ा योगदान है।
  10. ऐसे ही नाग ओर शेषनाग में क्या अंतर है। इस तरह की अनेक जानकारी amrutam कालसर्प विशेषांक म3न दी गई हैं।

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