जवानी बनाये रखना है, तो सपरिवार आयुर्वेदक लिवर टॉनिक Keyliv लेते रहें !!

  • आज के समय में बच्चे पैदा होते ही सर्दी, खांसी, जुकाम ओर कवर की समस्या से ग्रसित हो जाते हैं इर माता पिता शिशु का इलाज अंग्रेजी दवाओं से करके बचपन में ही सारी रोगप्रतिरोधक क्षमता खत्म कर देते हैं।
  • वर्तमान ने बच्चा हो या बच्चे की मां इन्हीं सब दिक्कतों से बच्चों के बक ही सफेद नही यह बल्कि दिमाग भी कमजोर हो रहा है।
  • एक बच्चा जनने के बाद स्त्रियों का शरीर भी ढुल मूल होने लगता है और योनि भी ढ़ीली व शिथिल हो जाती है।
  • पुराने समय की महिलाएं , बच्चा की देखभाल पूर्णतः प्राकृतिक और आयुर्वेदक चिकित्सा से किया करती थी ।
  • नहान, स्नान के भी नियम, मुहूर्त होते थे। जच्चा को चारपाई पर लिटाकर उसके नीचे एक बरोसी यानि मिट्टी गोबर का बना अग्निपात्र रखते थे और इसमें अजवायन आदि अनेक जड़ी बूटियां डालते रहते थे और इस धुंआ से जच्चा, बच्चा हमेशा स्वस्थ्य रहते थे।
  • प्रसूता को दशमूल काढा ओर नीम का पानी पिलाते थे और इसी से स्नान भी कराते थे।
  • मेवा, मसाले, गुड़, जड़ी बूटी, त्रिफला, त्रिकटु, पीपल, गुग्गल आदि से निर्मित बिस्वार के लड्डू खिलाते थे। इसी वजह से बच्चे भविष्य में बहुत तजत्वर, शक्तिशाली और स्वस्थ्य रहते थे।
  • स्त्रियां भी 5 से 8 बच्चों को जन्म देकर बहुत खूबसूरत बनी रहती थी। लगभग 55 साल तक उनकी नाहवारी नियमित रहती थी। बुढापा भी 65 के बाद झलकता था।
  • आज स्थिति यह है कि कोई भी प्राणी डॉक्टर की मर्जी के बिना न पैदा हो रहा है और न मर पा रहा है।
  • ज्यादातर लोग भयभीत हैं। आज भारत में 95 फीसदी लोग किसी न किसी रोग से पीड़ित हैं। अधिकांश लोगों के पेट खराब है। मेटाबोलिज्म करेक्ट न होने लिवर फैटी हो चुका है।
  • 77 फीसदी लोग लिवर की समस्या से पीड़ित हैं। लिवर मानव शरीर का मुख्य अंग है, जो खाना पचाने से लेकर देह में रस, रक्त रज ओर वीर्य का निर्माण करता है तथा मन को प्रसन्नता प्रदान करने में सहायक है। स्वस्थ्य लिवर ही रक्त संचार को सुचारू बनाकर जवान बनाने में सहायक है।

हजारों वर्षों से पी रहे हैं लिवर टॉनिक

  • पाचन अच्छा होने से ही किस के प्रवचन अच्छे लगते हैं अन्यथा घर में क्लेश, कलह मची रहती है।
  • प्राचीन समय में प्रत्येक घर में भोजन के पहले या बाद में घर का बना आयुर्वेदक लिवर काढा या टॉनिक जरूर पिलाते थे। इससे पेट में कोई भी बीमारी नहीं होती थी।
  • मकोय, अर्जुन चाल, धनिया, हरड़, आमला, त्रिफला, त्रिकटु, नागरमोथा, रेवंदचीनी, निशोथ, कुटकी, पुर्ननवा, कालमेघ, चित्रककरिल, गुलाब, मेहंदी आदि द्रव्य लिवर को मजबूती प्रदान कर जल्दी बुढापा नहीं आने देते।
  • जान है, तो जहान है। लेकिन लोग आयुर्वेद जैसे अमृत को छोड़कर परेशान हो रहे हैं। परमात्मा भी इनकी वेवकूफी से हैरान है।
  • ज्ञान की बस इतनी सी बात है कि पूरा परिवार नियमित रूप से शुद्ध जड़ी बूटियों के काढ़े से निर्मित आयुर्वेदीक लिवर टॉनिक का सेवन शुरू कर दें। जीवन भर कोई रोग नही होगा।
  • हम पिछले कई सालों से Keyliv strong Syrup परिवार सहित इस्तेमाल कर रहे हैं और भगवान की दया से कभी किसी डॉक्टर के यहां जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • उपरोक्त जड़ी बूटियों से तैयार Keyliv 100 फीसदी आयुर्वेदक ओषधि है। इसमें किसी भी तरह का केमिकल यूक्त एक्सट्रेक्ट नहीं मिला है।
  • गूगल, amalaearth, अमेजन, Myupchar ओर amrutam पर केलिव के बारे में अध्ययन कर तुरन्त लेना शुरू करें।
  • यह आयुर्वेद की 5000 साल प्राचीन पद्दति से निर्मित लिवर टॉनिक है। इसके लेबल पर लिखा है कि Keyliv को आयुर्वेदक ग्रन्थ भावप्रकाश निघण्टु से फार्मूला लिया है।
  • यह कब्ज, गेस, एसिडिटी नहीं होने देता। पेट की अनेक बीमारियों को ठीक करता है। उदर को मुलायम रखता है। रक्त को शुद्ध रखता है। भूख बढ़ाता है।

चित्र गूगल से साभार

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से बात करें!

अभी हमारे ऐप को डाउनलोड करें और परामर्श बुक करें!


Posted

in

by

Tags:

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *