भारत के अजूबे आध्यात्मिक रहस्य

Spread the love

सूक्ष्म व सिद्ध आत्माओं का स्थान पवित्र हिमालय :

जीवन का परम आनंद लेना हो, तो एक बार चारों धाम के अलावा उत्तराखंड की यात्रा अवश्य करें। पिछले 25 वर्षों में मुझे भी अनेकों बार इस देवात्मा हिमालय के दर्शन का सौभाग्य मिला। 

इस अद्भुत यात्रा का विस्तार से वर्णन हमारे द्वारा प्रकाशित कालसर्प विशेषांक में कई गई है। 

उत्तराखंड के बारे में यह प्रसिद्ध है कि इस भूमि में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री ये चार धाम है। लेकिन इसके अलावा भी यहां अनेक तीर्थ स्थानों का भी वास है जिसकी चर्चा अमृतम पत्रिका के बद्रीनाथ की यात्रा शीर्षक में की गई है।

मुण्डकोपनिषद् के अनुसार उत्तराखंड में स्थित हिमालय की वादियों में बसे अनेक सिद्ध-सन्त, महात्माओं की आत्माओं का एक संघ है। यह सभी सूक्ष्म-शरीरधारी अपने

को कभी भी छोटा-बड़ा होकर प्रकट या अदृश्य हो जाते हैं। यहां हरेक इंसान का पहुंचना बहुत ही मुश्किल भरा काम है।

इन सिद्ध-सन्तों की खास बात यह है कि जब भी पृथ्वी पर संकट आता है, नेक और श्रेष्ठ व्यक्तियों की सहायता करने के लिए वे पृथ्वी पर भी आती हैं।

इस देवात्मा हिमालय में भौगोलिक दृष्टि से उसे उत्तराखंड से लेकर कैलाश पर्वत तक बिखरा हुआ माना जा सकता है। इसका प्रमाण यह है कि देवताओं, यक्षों, गंधर्वों, सिद्ध पुरुषों का निवास इसी क्षेत्र में पाया जाता रहा है।

इतिहास, स्कन्ध पुराणों के अवलोकन से प्रतीत होता है कि यह देवभूमि और स्वर्गवत स्थान है। आध्यात्मिक शोधों के लिए, साधनाओं, सूक्ष्म शरीरों को विशिष्ट स्थिति में बनाए रखने के लिए वह विशेष रूप से उपयुक्त है।

शरीर में किसी दिव्य आत्मा का आना- :

अपने अक्सर सुना होगा कि फलां मनुष्य को या

किसी व्यक्ति विशेष के शरीर में नाग महाराज, भेरू महाराज या काली माता के आने के किस्से सुनते रहते हैं।

इसे भारत में माता आना, हाजिरी आना या पारगमन की आत्मा का आना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में डील में आना आदि कहते हैं।

भारत में ऐसे कई स्थान या चौकी हैं, जहां आह्वान द्वारा किसी व्यक्ति विशेष के शरीर में दिव्य आत्मा का अवतरण होता है और फिर वह अपने स्थान विशेष या गद्दी पर बैठकर हिलते हुए लोगों को उनका भूत और भविष्य बताता है और कुछ हिदायत भी देता है।

हालांकि इन लोगों में अधिकतर तो नकली ही सिद्ध होते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो किसी भी व्यक्ति का भूत और भविष्य बताकर उसकी समस्या का समाधान करने की क्षमता रखते हैं।

ऐसे लोग किसी भी व्यक्ति का जीवन बदलने की क्षमता रखते हैं। ऐसे कुछ लोगों के स्थान पर मेला भी लगता है। जहां वे किसी मंदिर में बैठकर किसी चमत्कार की तरह लोगों के दुख-दर्द दूर करते हैं।

प्रेत बाधा- : हालांकि यह भी देखा गया है कि कुछ बुरी आत्माएं भी लोगों को परेशान करने के लिए उनके शरीर पर कब्जा कर लेती हैं।

विदेशों (अमेरिका या यूरोप में) में अधिकतर लोगों को बुरी आत्माएं परेशान करती हैं जिससे छुटकारा पाने के लिए वे चर्च के चक्कर लगाते रहते हैं।

भारत में भी यह बहुत चलन है। बहुत से लोग किसी दरगाह, समाधि या मंदिर, किसी जानकार, तांत्रिक, बाबा या संत या ऐसे लोगों के पास जाते हैं जिनके शरीर में पहले से ही किसी समय विशेष में कोई दिव्य आत्मा आई हुई होती है।

प्राचीनकाल से मृत आत्मा को बुलाने के कई तरीके का उपयोग होता रहा है। जैसे – हिप्नोटिज्म, प्लेनचिट और ओइजा बोर्ड, जेलंगकुंग आदि

इनके माध्यम से किसी दिव्य आत्मा के संपर्क से सवालों के जवाब और समाधान पाए जाते हैं।

चमत्कारिक संत और उनकी समाधि : शंकराचार्य, गुरु मत्स्येंद्र नाथ, गुरु गोरखनाथ, गोगादेव जाहर वीर, झूलेलाल, वीर तेजाजी महाराज, संत नामदेव, संत ज्ञानेश्‍वर, संत कबीर, रामसा पीर, गुरुनानक, रविदास, संत धन्ना, संत तुकाराम, एकनाथ, समर्थ रामदास और चरणदास।

इसके अलावा शिर्डी साईं बाबा, दादा धूनी वाले, शेगांव वाले बाबा, नैनीताल के नीम करौली बाबा, स्वामी रामकृष्ण परमहंस, परमहंस योगानंद, देवराह बाबा, लाहिड़ी जी महाराज, स्वामी विवेकानंद, स्वामी शिवानंद, ओशो रजनीश, मेहर बाबा, महर्षि अरविंद, जे. कृष्णमूर्ति,  हजारों ऐसे संत और महापुरुष हुए हैं जिनके कारण भारत की विश्व में एक आध्यात्मिक पहचान बनी हुई है।

माना जाता है कि उक्त संतों या दिव्य पुरुषों की समाधि पर जाकर उनके दर्शन करने से जीवन के सभी तरह के संकटों का हल नजर जाने लगता है। उपरोक्त जो नाम दिए गए हैं, उन्होंने बगैर किसी भेदभाव के मनुष्य मात्र के लिए कार्य किया।

योग, तप और ध्यान : योग का जन्म भारत में ही हुआ। वेदों में योग और ध्यान के महत्व और रहस्य का उल्लेख मिलता है। भगवान बुद्ध और पतंजलि ने योग और ध्यान को एक व्यवस्थित रूप दिया। इसे आप आष्टांगिक मार्ग कहें या आष्टांग योग।

सिद्धियां प्राप्त करने या मोक्ष प्राप्ति करने की ये 8 सीढ़ियां हैं जिन पर चढ़कर चेतना के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा जा सकता है। आष्टांग योग के बाहर धर्म और अध्यात्म की कल्पना नहीं की जा सकती। योग से जहां शरीर सेहतमंद बना रहता है वहीं मन-मस्तिष्क भी तरोताजा और शांतिमय बना रहता है।

अध्यात्म के लिए उचित वातावरण और स्थान : भारत में ध्यान, योग और अध्यात्म विद्या सीखने के लिए अन्य देशों की अपेक्षा उचित वातावरण है। यहां एक ओर जहां हिमालय है, तो वहीं दूसरे छोर पर समुद्र। एक ओर जहां रेगिस्तान है, तो दूसरे छोर पर घने जंगल और ऊंचे-ऊंचे पहाड़।

इसके अलावा कई प्राचीन आश्रम, गुफाएं और पहाड़ हैं, जहां जाकर तपस्या की जा सकती है या ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। अध्यात्म की इसी तलाश के लिए हजारों विदेशी यहां आकर भारत के वातावरण से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

भारत में बहुत सारी प्राचीन गुफाएं हैं, जैसे बाघ की गुफाएं, अजंता-एलोरा की गुफाएं, एलीफेंटा की गुफाएं और भीमबेटका की गुफाएं। अखंड भारत की बात करें तो अफगानिस्तान के बामियान की गुफाओं को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। भीमबेटका में 750 गुफाएं हैं जिनमें 500 गुफाओं में शैलचित्र बने हैं। यहां की सबसे प्राचीन चित्रकारी को कुछ इतिहासकार 35,000 वर्ष पुरानी मानते हैं, तो कुछ 12,000 साल पुरानी।

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित पुरा-पाषाणिक भीमबेटका की गुफाएं भोपाल से 46 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। ये विंध्य पर्वतमालाओं से घिरी हुई हैं। भीमबेटका मध्यभारत के पठार के दक्षिणी किनारे पर स्थित विंध्याचल की पहाड़ियों के निचले हिस्से पर स्थित है। पूर्व पाषाणकाल से मध्य पाषाणकाल तक यह स्थान मानव गतिविधियों का केंद्र रहा।

सूर्य विद्या से भूख और प्यास पर कंट्रोल : आज भी भारत की धरती पर ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने कई वर्षों से भोजन नहीं किया, लेकिन वे सूर्य योग के बल पर आज भी स्वस्थ और जिंदा हैं। भूख और प्यास से मुक्त सिर्फ सूर्य के प्रकाश के बल पर वे जिंदा हैं।

प्राचीनकाल में ऐसे कई सूर्य साधक थे, जो सूर्य उपासना के बल पर भूख-प्यास से मुक्त ही नहीं रहते थे बल्कि सूर्य की शक्ति से इतनी ऊर्जा हासिल कर लेते थे कि वे किसी भी प्रकार का चमत्कार कर सकते थे। उनमें से ही एक सुग्रीव के भाई बालि का नाम भी लिया जाता है। बालि में ऐसी शक्ति थी कि वह जिससे भी लड़ता था तो उसकी आधी शक्ति छीन लेता था।

वर्तमान युग में प्रहलाद जानी इस बात का पुख्ता उदाहरण हैं कि बगैर खाए-पीए व्यक्ति जिंदगी गुजार सकता है। गुजरात में मेहसाणा जिले के प्रहलाद जानी एक ऐसा चमत्कार बन गए हैं जिसने विज्ञान को चौतरफा चक्कर में डाल दिया है। वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे संभव हो रहा है?

रहस्यमय किताबें : दुनिया की प्रथम पुस्तक होने का गौरव प्राप्त है ऋग्वेद को। भारत में अध्यात्म और रहस्यमयी ज्ञान की खोज ऋग्वेद काल से ही हो रही है जिसके चलते यहां ऐसे संत, दार्शनिक और लेखक हुए हैं जिनके लिखे हुए का तोड़ दुनिया में और कहीं नहीं मिलेगा। उन्होंने जो लिख दिया वह अमर हो गया। उनकी ही लिखी हुई बातों को 2री और 12वीं शताब्दी के बीच अरब, यूनान, रोम और चीन ले जाया गया, रूपांतरण किया गया और फिर उसे दुनिया के सामने नए सिरे से प्रस्तुत कर दिया गया।

वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण, मनु स्मृति और पुराणों के अलावा उपनिषद की कथाएं, पंचतंत्र, बेताल या वेताल पच्चीसी, जातक कथाएं, सिंहासन बत्तीसी, हितोपदेश, कथासरित्सागर, तेनालीराम की कहानियां, शुकसप्तति, कामसूत्र, कामशास्त्र, रावण संहिता, भृगु संहिता, लाल किताब, संस्कृत सुभाषित, सामुद्रिक विज्ञान, पंच पक्षी विज्ञान, अंगूठा विज्ञान, हस्तरेखा ज्योतिष, प्रश्न कुंडली विज्ञान, नंदी नड़ी ज्योतिष विज्ञान, सम्मोहन विज्ञान, विमान शास्त्र, योग सूत्र, परमाणु शास्त्र, शुल्ब सूत्र, श्रौतसूत्र, अगस्त्य संहिता, सिद्धांतशिरोमणि, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, च्यवन संहिता, शरीर शास्त्र, गर्भशास्त्र, रक्ताभिसरण शास्त्र, औषधि शास्त्र, रस रत्नाकर, रसेन्द्र मंगल, कक्षपुटतंत्र, आरोग्य मंजरी, योग सार, योगाष्टक, अष्टाध्यायी, त्रिपिटक, जिन सूत्र, समयसार, लीलावती, करण कुतूहल आदि लाखों ऐसी किताबें हैं जिनके दम पर आज विज्ञान, तकनीक आदि सभी क्षेत्रों में प्रगति हो रही है।

रहस्यमयी पत्थर : एक बार ओशो ने जानकारी दी थी कि 1937 में तिब्‍बत और चीन के बीच बोकाना पर्वत की एक गुफा में 716 पत्‍थर के रिकॉर्डर मिले हैं। जी हां, पत्‍थर के! आकार में वे रिकॉर्ड हैं। महावीर से 10,000 साल पुराने यानी आज से कोई 13,500 हजार साल पुराने।

ये रिकॉर्डर बड़े आश्‍चर्य के हैं, क्‍योंकि ये रिकॉर्डर ठीक वैसे ही हैं, जैसे ग्रामोफोन का रिकॉर्ड होता है। ठीक उसके बीच में एक छेद है और पत्‍थर पर ग्रूव्‍ज है, जैसे कि ग्रामोफोन के रिकॉर्ड पर होते हैं। अब तक यह राज नहीं खोला जा सका है कि वे किस यंत्र पर बजाए जाते रहे होंगे या बजाए जा सकेंगे।

लेकिन एक बात तो हो गई है- रूस के एक बड़े वैज्ञानिक डॉ. सर्जीएव ने वर्षों तक मेहनत करके यह प्रमाणित कर दिया है कि वे हैं तो रिकॉर्ड ही, पर किस यंत्र पर और किस सुई के माध्‍यम से वे पुनर्जीवित हो सकेंगे, यह अभी तय नहीं हो सका। अगर एकाध पत्‍थर का टुकड़ा होता तो सांयोगिक भी हो सकता है। 716 हैं।

सब एक जैसे, जिनमें बीच में छेद हैं। सब पर ग्रूव्‍ज है और उनकी पूरी तरह सफाई धूल-ध्वांस जब अलग कर दी गई और जब विद्युत यंत्रों से उनकी परीक्षा की गई, तब बड़ी हैरानी हुई। उनसे प्रति पल विद्युत की किरणें विकिरणित हो रही हैं। लेकिन क्‍या आदमी के पास आज से 12,000 साल पहले ऐसी कोई व्‍यवस्‍था थी कि वह पत्‍थरों में कुछ रिकॉर्ड कर सके? तब तो हमें सारा इतिहास और ढंग से लिखना होगा।

प्राचीन विद्याएं- : प्राचीन काल से ही भारत में ऐसी कई विद्याएं प्रचलन में रही जिसे आधुनिक युग में अंध विश्वास या काला जादू मानकर खारिज कर दिया गया लेकिन अब उन्हीं विद्याओं पर जब पश्‍चिमी वैज्ञानिकों ने शोध किया तो उनको नया नाम मिला। जैसे प्राचीन त्राटक या सम्मोहन विद्या को आधुनिक युग में हिप्नोटिज्म और मेस्मेरिज्म कहा जाता है।

दूर संवेदन या परस्पर भाव बोध को आजकल टैलिपैथी कहा जाता है।

कलारिपट्टू को मार्शल आर्ट कहा जाता है। प्राण विद्या के हम आज कई चमत्का‍र देखते हैं जैसे किसी ने अपने शरीर पर ट्रक चला लिया।

किसी ने अपनी भुजाओं के बल पर प्लेन को उड़ने से रोक दिया।

कोई जल के अंदर बगैर सांस लिए घंटों बंद रहा। किसी ने खुद को एक सप्ताह तक भूमि के दबाकर रखा।

इसी प्राण विद्या के बल पर किसी को सात ताले में बंद कर दिया गया, लेकिन वह कुछ सेकंड में ही उनसे मुक्त होकर बाहर निकल आया। कोई किसी का भूत, भविष्य आदि बताने में सक्षम है तो कोई किसी की नजर बांध कर जेब से नोट गायब कर देता है।

इसके अलावा ऐसे हैरतअंगेज कारमाने जो सामान्य व्यक्ति नहीं कर सकता उसे करके लोगों का मनोरंजन करना यह सभी भारतीय प्राचीन विद्या को साधने से ही संभव हो पाता है। आज भी वास्तु और ज्योतिष का ज्ञान रखने वाले ऐसे लोग मौजूद है जो आपको हैरत में डाल सकते हैं।

वैदिक गणित, भारतीय संगीत, ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, हस्तरेखा, सम्मोहन, टैलीपैथी, काला जादू, तंत्र, सिद्ध मंत्र और टोटके, पानी बताना, गंभीर रोग ठीक कर देने जैसे चमत्कारिक प्रयोग आदि ऐसी हजारों विद्याएं आज भी प्रचलित है जिन्हें वैज्ञानिक रूप में समझने का प्रयास किया जा रहा है।

योग की सिद्धियां- : कहते हैं कि नियमित यम‍-नियम और योग के अनुशासन से जहां उड़ने की शक्ति प्राप्त ‍की जा सकती है वहीं दूसरों के मन की बातें भी जानी जा सकती है। परा और अपरा सिद्धियों के बल पर आज भी ऐसे कई लोग हैं जिनको देखकर हम अचरज करते हैं।

सिद्धि का अर्थ- : सिद्धि शब्द का सामान्य अर्थ है सफलता। सिद्धि अर्थात किसी कार्य विशेष में पारंगत होना। समान्यतया सिद्धि शब्द का अर्थ चमत्कार या रहस्य समझा जाता है, लेकिन योगानुसार सिद्धि का अर्थ इंद्रियों की पुष्टता और व्यापकता होती है। अर्थात, देखने, सुनने और समझने की क्षमता का विकास।

परा और अपरा सिद्धियां- : सिद्धियां दो प्रकार की होती हैं, एक परा और दूसरी अपरा। विषय संबंधी सब प्रकार की उत्तम, मध्यम और अधम सिद्धियां ‘अपरा सिद्धि’ कहलाती है। यह मुमुक्षुओं के लिए है। इसके अलावा जो स्व-स्वरूप के अनुभव की उपयोगी सिद्धियां हैं वे योगिराज के लिए उपादेय ‘परा सिद्धियां’ हैं।

पुनर्जन्म -: पुनर्जन्म या पूर्वजन्म के बारे में विस्तार से जानकारी भारतीय धर्म में ही मिलती है। आध्यात्मिक रहस्य का यह सबसे बड़ा पहलू है। यहूदी, ईसाईयत, इस्लाम जो पुनर्जन्‍म के सिद्धांत को नहीं मानते। उक्त तीनों धर्मों के समानांतर- हिंदू, जैन और बौद्ध यह तीनों धर्म मानते हैं कि पुनर्जन्म एक सच्चाई है।

हिंदू धर्म पुनर्जन्म में विश्वास रखता है। इसका अर्थ है कि आत्मा जन्म एवं मृत्यु के निरंतर पुनरावर्तन की शिक्षात्मक प्रक्रिया से गुजरती हुई अपने पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है। उसकी यह भी मान्यता है कि प्रत्येक आत्मा मोक्ष प्राप्त करती है, जैसा गीता में कहा गया है।

आधुनिक युग में पुनर्जन्म पर अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. इयान स्टीवेंसन ने 40 साल तक इस विषय पर शोध करने के बाद एक किताब ‘रिइंकार्नेशन एंड बायोलॉजी’ लीखी थी जिसे सबसे महत्वपूर्ण शोध किताब माना गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *