स्वास्थ्य रक्षक घरेलू नुख्सों के क्या फायदे हैं।

आयुर्वेद में अनुपान का विशेष महत्व है। कोई चूर्ण उतना ही खाएं जीतना पचा सकें अन्यथा चूर्ण का काढ़ा बनाकर पीने लाभकारी है। द्रव्यगुण विज्ञान के अनुसार हल्दी एक  महीने में 10 से 15 ग्राम तक ही लेना हितकारी है अन्यथा फेफड़ों से कफ को सुखा देगी और दमा, श्वांस की समस्या खड़ी हो सकती है।

नीम के पत्तों का अधिक उपयोग जोड़ों में  सूजन पैदा करता है। ऐसी हजारों औषधियों का अनुपान भेद आयुर्वेदिक षडरों में वर्णित है। सोशल मीडिया पर बहुत सी जानकारी मनगढ़ंत लिखी जा रही हैं। इससे शरीर रोगमुक्त होने की जगह रोगों से घिरता जा रहा है। जब तक सन्दर्भ ग्रन्थ का उल्लेख न हो किसी भी बात पर कतई भरोसा न करें।

आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करें।

दवा, मसाले, फल, घी, तेल आदि की जानकारी हेतु घर में एक किताब मंगावकर रखें

भावप्रकाश निघण्टु लेखक-भावप्रकाश मिश्र इसके अध्ययन से भय-भ्रम-भटकाव दूर होगा।

अदरक की तासीर बहुत गर्म होती है। इसके अधिक सेवन से पित्तदोष की वृद्धि होगी। वैसे दिन भर में 5 ग्राम से ज्यादा अदरक की मात्रा नहीं लेना चाहिए। मर्दों को नीबू एक दिन में आधे से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। इससे अधिक लेने पर वीर्य को पतला करता है।

आयुर्वेद में अनुमान, मात्रा, समय का विशेष महत्व बताया है। नीम की नई कोपल जो मार्च, अप्रैल एवं 15 मई तक तक ही लेना हितकारी रहता है। नीम की 2 या 3 कोपल इतनी चबाएं की कण्ठ कड़वा हो जाये। बिसे अधिक लेंगे, तो जोड़ो में दर्द, सूजन होने लगेगी। आज नहीं तो बुढापे में।

तुलसी की 4 से 5 पत्ते ही हितकर हैं। इसमें पार होता है। ज्यादा लेने से त्वचा सिकुड़ने लगती है।

हल्दी का प्रयोग केवल कफ प्रकृति वालों को ही श्रेष्ठ है। ज्यादा हल्दी का सेवन फेफड़ों की श्वांस नली में संक्रमण पैदा करता है। दूध के साथ कच्ची हल्दी उबालकर लेना ही फायदेमंद है। एलोवेरा गूदे की एक चम्मच, करेले रस की मात्रा 3 से 5 ml तक, लोंकी का जूस 10 से 15 ml तक लेवें, तो लाभकारी अन्यथा तन को कचरा बना देता है।

सुबह गर्म पानी पृरी तरह त्याग दें। थायराइड की समस्या का कारण यही है।

देश में 99 फीसदी शहद नकली बेचा जा रहा है। असली शहद केवल 36 गढ़ , अमरावती, औंढा नागनाथ, मैसूर आदि स्थानों पर बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है। अतः शहद से मोह छोड़ें।

अगर बिना शहद के आपको कुछ अटपटा लगे, तो एक 50 ग्राम की छोटी शीश अमृतम द्वारा रिपैकेजिंग मधु पंचामृत की मंगवाकर चेक करें। अगर लगे कि यह पूर्णतः शुद्ध है, तो बड़ा पैक मंगवा सकते हैं।

आपके शरीर की तासीर कैसी-कौन सी है यह जानने के लिए अमृतम द्वारा प्रकाश किताब Ayurveda Life style का अध्ययन कर अमल करें।

आयुर्वेद के नियमानुसार देह में त्रिदोष के प्रकोपित होने से अनेक उदर रोग पनपने लगते हैं। अतः त्रिदोष की चिकित्सा जरूरी है। अमृतम ने आयुर्वेद के योग्य, विद्वान और वरिष्ठ वेदों-चिकित्सकों द्वारा एक बेहतरीन पुस्तक प्रकाशित की है। इस किताब का नाम

Ayurveda Life Style है, जो कि ओनली ऑनलाईन ही उपलब्ध है।

असन्तुलित वात-पित्त-कफ अर्थात त्रिदोषों की जांच स्वयं अपने से करने के लिए यह अंग्रेजी की किताब आयुर्वेदा लाइफ स्टाइल यह आपकी बहुत मदद करेगी। इसमें उपाय भी बताएं हैं। अपनी लाइफ स्टाइल बुक का अध्ययन तथा अमल कर सदैव स्वस्थ्य रह सकते हैं।

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【1】कफ की क्वाथ 【कफविनाश】

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