क्या शुद्ध शहद या मधु की पहचान सम्भव है ? Amrutam

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आयुर्वेद के 5000 वर्ष प्राचीन ग्रन्थ वनोषधि सहिंता, द्रव्यगुण विज्ञान,अष्टाङ्ग ह्रदय चरक सहिंता, सुश्रुत आदि में शुद्ध शहद की कोई विशेष या वैज्ञानिक पहचान नहीं लिखी है।

गूगल पर पड़ी अनेकों जानकारियां मनगढ़ंत हैं। कृपया बिना ग्रन्थ-शास्त्र, उपनिषद, भाष्य आदि सन्दर्भ के बिल्कुल भी भरोसा न करें।

जैसे-

ग्रन्थों में लिखा है कि शहद में गर्म करने से उसका मूल असर नष्ट हो जाता है। पुराना मधु ही मेदनाशक यानी मोटापा कम करने में सहायक है। शुद्ध शहद के साथ बराबर मात्रा में केवल गाय का शुद्ध देशी घी मिलाने वह विष बन जाता है।

 बनाया शहद को असली मान रहे लोग…

आजकल पेटी वाला शहद भी बहुत मिल रहा है। ये एक तरह से शक्कर ही है, जो ज्यादा उपयोगी नहीं है। इसके सेवन से मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है, जबकि शुद्ध शहद डाइबिटीज में लेना लाभकारी है।

शुद्ध शहद की पहचान अनुभव और स्वाद से ही होती है। इसकी महक अलग ही होती है, यह जीभ पर रखते ही लार में बदल जाता है।

परखने के लिए एक बार छोटा सा 50 ग्राम का पैक अमृतम मधु पंचामृत का मंगवाकर देख सकते हैं।

शुद्ध शहद की पहचान.. .

¶ – शुद्ध honey की पहचान,जो हमारी समझ आया कि शुद्ध मधु ऊपर तालु पर लगाएं, तो चिपकता नहीं है।

¶ – शुद्ध शहद ज्यादा देर तक पानी रुकता नहीं है, तुरन्त जल में मिश्रित हो जाता है।

¶ – शुद्ध शहद होगा, तो सर्दी के दिनों में हल्का जमेगा जरूर परन्तु ग्लूकोज से निर्मित शहद नहीं जमेगा।

¶ – शुद्ध शहद होगा, तो वस्त्र पर चिपकेगा नहीं लेकिन शहद अपना निशान अवश्य छोड़ता है।

नकली शहद का अंबार ….

● पहले आंखों में लगाने से हल्की चिनमिन्हाहट होती थी, लेकिन अब नकली शहद में कालीमिर्च का एक्सट्रेक्ट मिला देते हैं।

● अब नकली शहद पर मक्खी नहीं बैठती, क्योंकि उसमें एक रसायनिक द्रव्य साइट्रीट एसिड मिला देते हैं।

● आजकल बाजार में जी मधु बिक रहा है, वह पूर्णतः नकली है। यह शहद इन्वर्ट शुगर और ग्लूकोज मिलाकर बन रहा है। जिसका लागत मूल्य अधिक से अधिक 100 से 125 रुपए किलो पड़ता है और बाजार में 300 रुपया किलो मे बिक जाता है, इसमें दुकानदार का लगभग 35 से 50 फीसदी कमीशन या मार्जन रहता है।

मधु पंचामृत में 4 जड़ीबूटियों का सत्व….

मधु में ब्रेन व चेहरे की सूक्ष्म नाड़ियां जागृत करने वाली अदभुत बूटी आदि ब्राह्मी मिलाकर उपयोग किया जाए, तो बेहतरीन परिणाम आते हैं।

मुलेठी खाने और चेहरे को चमकाने में विशेष कारगर ओषधि है।

तुलसी यह प्राकृतिक एंटीएलर्जिक, एंटी फंगस ओषधि है। इसके खाने और मुख पर लगाने से कीटाणु नष्ट होते हैं।

मधु पंचामृत के 16 चमत्कारी फायदे….

【1】 सम्पूर्ण संसार में मधु ही एक ऐसी प्राकृतिक अमृत औषधि है, जो शरीर में जाते ही अपना कार्य शुरू कर देती है। शरीरिक शक्ति दृढ़ करने में मधु पंचामृत रामबाण है।

【2】ठंडे दूध के साथ बढ़ते बच्चों के लिए सर्वोत्तम।

【3】नास्ते के समय एक छटाक मलाई में एक बड़ा चम्मच

【4】मधु पंचामृत मिलाकर खाने से दिमाग और स्नायुओं को असाधारण रूप से शक्ति मिलती है। क्योंकि इसमें स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली आयुर्वेद की सुप्रसिध्द जड़ी बूटी ब्राम्ही रस का समावेश है।

【5】चेहरे को चमकाने, गन्दगी साफ करने में मधु का प्राकृतिक गुण है!

【6】एक चम्मच अमृतम उबटन एक चम्मच मधु पंचामृत, टमाटर का रस एक चम्मच तीनो को मिलाकर धूप में बैठकर लगाकर 30 मिनिट तक सूखने दें। फिर सादे जल से धोएं, तो चेहरे की सारी गंदगी निकल जाती है तथा मुख चमकने लगता है।

【7】मुहांसे, झुर्रियां मिटाने हेतु- मधु पंचामृत 1 चम्मच, निबहु का रस 3 ml, हल्दी पिसी, आधा ग्राम सबको मिलाकर चेहरे पर लगाएं, तो कील-मुहांसे साफ हो जाते हैं।

【8】मधु पंचामृत 10 ग्राम, अमृतम उबटन 10 ग्राम कच्चा दूध 20 ml सबको मिलाकर सुबह की धूप में चेहरे पर लगाकर 30 से 40 मिनिट बिना बोले सूखने दें। फिर सादे जल से धोकर अमृतम कुंकुमादि तेल लगाएं। 10 दिन नियमित प्रयोग से बुढापे के लकधन समाप्त होने लगते हैं।

【9】मधु में अनेक प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं।

【10】मधु के सेवन से ऊर्जा-उमंग और फुर्ती आती है। जल्दी बुढापा नहीं आता।

【11】मानसिक तनाव घटता है।

【12】निघण्टु के मुताबिक यह प्राकृतिक ग्लूकोज की पूर्ति करता है।

【13】आयुर्वेद के मुताबिक मोटापा कम करने के लिए मधु में नीबू का रस सादे जल के साथ भोजन के एक घण्टे बाद लेते हैं, तो चर्बी गलने लगती है।

【14】मधु के साथ कुछ अन्य चीजे उपयोग करने से मुखमंडल में ग्लो बढ़ता है।

【15】मधु व अमृतम उबटन शक्ल पर प्रकट धाग-धब्बे, कील-मुंहासे और झुर्रियों से मुकाबला करने में मदद करता है।

【16】मधु को चेहरे पर नियमित लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है। इसे अपनी स्‍किन केयर रूटीन में शामिल कर सकती हैं।

धर्म में पंचामृत का उपयोग परम् हितकारी है…

शिवपुराण में पंचमहाभूतों की प्रसन्नता के लिए पुराणों में पंचामृत द्वारा शिवलिंग के अभिषेक का वर्णन है। सत्यनारायण की कथा हो या सामान्य पूजा में पांच तरह के अमृत जैसे-दूध, दही, मधु, शक्कर का बूरा, गाय का शुद्ध देशी घी का मिश्रण करते हैं, उसे पंचामृत कहते हैं।

स्कन्ध पुराण, शिव सहिंता तथा कालितन्त्र में उल्लेख है कि-शिवलिंग या ईश्वर को पंचामृत का स्नान करने से अनेकों रोग-शोक, वास्तु, कालसर्प-पितृदोष, गरीबी आदि परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

भगवान को अर्पित नैवेद्य का प्रसाद रूप में ग्रहण करने से शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी की वृद्धि होती है।

मङ्गल के दंगल को दूर करे-मधु पंचामृत…

मंगलदोष से मुक्ति हेतु प्रत्येक मंगलवार, रविवार शिवलिंग पर शुद्ध शहद अर्पित करना चाहिए।

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