हमारी खूबसूरती का आधार है लिवर/यकृत..
यकृत की तंदरुस्ती के बिना, कितना ही फेशियल, मसाज करा लें अथवा खूब बाहरी संसाधन आजमा लेवें।
कुछ भी लाभ होने वाला नहीं है।
शरीर की सारी सुंदरता का आधार हमारा यकृत है। यदि लिवर क्रियाशील या एक्टिव है, तो बुढापे तक सुंदरता बनी रहती है।
देह में लिवर का सबसे महत्वपूर्ण कार्य रहता है।
भोजन पचाने से लेकर रक्त, रस का निर्माण कर मल-मूत्र विसर्जन का काम लिवर ही करता है।
अगर समय रहते अपने यकृत या लिवर पर जो स्त्री-पुरुष ध्यायं नहीं देते, उन्हें अधेड़ावस्था में अनेक बीमारियों से जूझना पड़ता है।
सभी ने देखा होगा कि 50 के बाद स्त्री का फिगर और पुरुष का फिगर बिगड़ जाता है।
इन सबकी वजह लिवर की खराबी ही है।
आप नियमित एवं जिंदगी भर अमृतम द्वारा निर्मित लिवर उत्पादों का सेवन करते रहें।
【1】कीलिव माल्ट/KEYLIV Malt
【2】कीलिव स्ट्रांग सिरप/KEYLIV
【3】कीलिव कैप्सूल/KEYLIV capsule
कीलिव माल्ट के 17 फायदे | 17 Benefits of Keyliv Malt
कीलिव के 17 फायदे | 17 Benefits of Keyliv
।।अमृतम।।
कीलिव माल्ट (यकृत रोगों की खास दवा)
Specific for liver troubles
“कीलिव माल्ट”यकृत एवं प्लीहा की सम्पूर्ण समस्या निराकरण हेतु बहुत ही लाभकारी ओषधि है।
चिकित्सा ग्रन्थों में उल्लेख है कि वर्षा ऋतु में लिवर की विशेष सुरक्षा करना चाहिए।
इन दिनों प्रदूषित जल के कारण अनेकों बीमारी पनपने लगती है।
इसके लिये कीलिव माल्ट तन रक्षक के रूप में अटूट विश्वसनीय ओषधि है।
पुराना खानपान प्राचीन काल में पहले गाँव के लोग यकृत की रक्षा हेतु “मकोय एवं पुर्ननवा की भाजी (सब्जी) बनाकर खाने के साथ खाया करते थे ..
यह पुराने समय से लिवर की प्राकृतिक सर्वोत्तम दवा है।
लिवर में कारगर घटक द्रव्य
धनिया, नागरमोथा, निशोथ, कुटकी, कालमेघ, करील, गुलकन्द, वायविडंग, शुण्ठी, पिप्पली, अजवायन, हरीतकी मुरब्बा, आंवला मुरब्बा, भृङ्गराज, अर्जुन छाल आदि जड़ी बूटियाँ हैं,
जो सदियों से लिवर को क्रियाशील व मजबूत बनाने में उपयोगी हैं।
इन सबको एक विशेष विधि से काढ़ा बनाकर मिलाया गया है।
कीलिव माल्ट जीर्ण, गम्भीर एवं घातक यकृत रोगों में सदपरिणाम की सुनिश्चितता के लिए जिन्दगी भर इसका सेवन अत्यन्त हितकारी है।
शल्य चिकित्सा संबंधित व्याधियों को छोड़कर अधिकांश यकृत विकारों के लिये कीलिव माल्ट तुरन्त असरकारक अचूक ओषधि है।
दूषित पाचन तन्त्र को शुध्द करने में यह चमत्कारी है।
कीलिव माल्ट अनेक उदर विकार में उपयोगी है
1-चयापचय विकार
(Metabolic disorders)
2-लिवर में सूजन
3-भोजन का समय पर न पचना
4-उदरी ( Dropsy)
5-यकृत वृद्धि
6-खून का कम बनना
7-भूख की कमी
8-खाने की इच्छा न होना
9-पांडु पीलिया वृद्धि
10-पाचन सम्बन्धी विकार
11-रक्तसंचार की शिथिलता
12-रक्ताल्पता
13-गुल्म
14-संग्रहणी
15-आंतों की निर्बलता
16-अरुचि
17-यकृत की न्यून कार्यक्षमता आदि बीमारियों को दूरकर ठीक करने में सहायक है।
यकृत व पेट के रोगों से
परेशान लोगों को एक बार इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
इसमें डाली गई “मंडूर भस्म“ रक्ताल्पता अर्थात खून की कमी दूर करने के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
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